भारतीय जहाज दिशा ने पार किया होर्मुज, जानिए उस पर क्या लदा है और कब तक पहुंचेगा भारत
अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता होने के बाद फारस की खाड़ी में फंसा भारतीय गैस जहाज 'दिशा' सुरक्षित बाहर आ गया है. आइए जानें कि इसमें क्या लदा हुआ है और यह भारत कब तक पहुंचेगा.

तीन महीने से ज्यादा का लंबा इंतजार, युद्ध का खौफ और समुद्र में थमी हुई सांसें...आखिरकार इस तनाव पर पूर्णविराम लग गया है. सोमवार, 15 जून को भारतीय जहाज 'दिशा' ने जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) को सुरक्षित पार किया, तो यह सिर्फ एक जहाज का निकलना नहीं था, बल्कि दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते के दोबारा खुलने का सबसे बड़ा सबूत था. अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच महीनों चले युद्ध और तनाव थमने के बाद आखिर भारत के इस पहले जहाज ने बिना किसी डर के सुरक्षित सफर तय कर एक नया रास्ता खोल दिया है. आइए जानें कि इस पर क्या लदा है और यह भारत कब तक पहुंचेगा.
शांति समझौते से खुली राह
यह बड़ी राहत तब मिली है जब अमेरिका और ईरान ने एक प्रारंभिक शांति समझौते (सीजफायर) पर दस्तखत करने का फैसला किया है. इस समझौते की घोषणा होते ही फारस की खाड़ी में महीनों से फंसा हुआ समुद्री ट्रैफिक अब धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा है. 'दिशा' पहला ऐसा भारतीय एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) टैंकर है जो संकट खत्म होने के बाद इस रास्ते से सुरक्षित बाहर आया है.
फंसे हुए 34 जहाजों को मिलेगी जिंदगी
'दिशा' जहाज के सुरक्षित निकलने से केवल भारत को ही राहत नहीं मिली है, बल्कि फारस की खाड़ी में फंसे 34 अन्य जहाजों के लिए भी उम्मीद की नई किरण जाग गई है. इन जहाजों पर भारतीय और विदेशी दोनों तरह के झंडे लगे हुए हैं. अब यह साफ हो गया है कि ये सभी फंसे हुए जहाज भी बहुत जल्द और तेजी से भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच सकेंगे. इससे व्यापारिक जगत में फैला डर पूरी तरह खत्म हो गया है.
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इस जहाज पर क्या लदा है?
यह जहाज भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है. 'एमटी दिशा' (MT Disha) नाम के इस विशाल जहाज पर 62,370 मीट्रिक टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) लदी हुई है. यह प्राकृतिक गैस का एक बहुत बड़ा कार्गो है, जो देश में ईंधन और बिजली उत्पादन जैसी जरूरी व्यवस्थाओं के काम आएगा. युद्ध के कारण यह जरूरी ईंधन फारस की खाड़ी में ही अटका हुआ था.
कौन कर रहा है जहाज का संचालन?
इस पूरे मिशन और जहाज के संचालन के पीछे भारत की बड़ी कंपनियों की जिम्मेदारी है. इस जहाज का पूरा प्रबंधन शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) के नेतृत्व वाले एक कंसोर्टियम (कंपनियों के समूह) द्वारा किया जा रहा है. वहीं, इस जहाज को भारत की मशहूर गैस कंपनी पेट्रोनेट एलएनजी (PetroNet LNG) द्वारा चार्टर्ड यानी किराए पर लिया गया है.
भारत कब तक पहुंचेगा ‘दिशा’?
होर्मुज को पार करने के बाद अब यह जहाज पूरी रफ्तार से भारत की तरफ बढ़ रहा है. तय शेड्यूल के मुताबिक, 18 जून 2026 को गुजरात के दाहेज बंदरगाह (Dahej Port) पर इसके पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है. जहाज के आने की खबर से दाहेज पोर्ट पर गैस को सुरक्षित उतारने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं. यह भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है.
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