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महंगी गाड़ियां और भारी टैक्स, क्या 48% से ज्यादा GST के कारण भारत नहीं आ रहे ग्लोबल ब्रांड्स?

Auto Industry India: भारत में कारों पर लगने वाला GST और सेस कई मॉडलों पर टैक्स को 48% से ऊपर पहुंचा देता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे कारें महंगी होती हैं और ग्लोबल ब्रांड भारत आने से बचते हैं.

Auto Industry India: भारत दुनिया के सबसे बड़े ऑटो बाजारों में शामिल है, लेकिन इसके बावजूद कई बड़े अंतरराष्ट्रीय कार ब्रांड यहां अपनी पूरी रेंज नहीं बेचते. कुछ कंपनियां भारत में आईं और बाद में बाजार छोड़ गईं, जबकि कई मशहूर ब्रांड आज भी भारतीय ग्राहकों के लिए उपलब्ध नहीं हैं. इसके पीछे कई वजहें हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा कारों पर लगने वाले भारी टैक्स को लेकर होती है. 

भारत में कारों पर 28 प्रतिशत GST के साथ अलग से सेस भी लगाया जाता है. बड़ी एसयूवी और लग्जरी कारों पर कुल टैक्स 48 प्रतिशत या उससे भी ज्यादा तक पहुंच सकता है. इसका सीधा असर कारों की कीमत पर पड़ता है. जो कार विदेशों में सस्ती मिलती है, वही भारत में काफी महंगी हो जाती है. ऐसे में ग्राहकों की पहुंच कम होती है और कंपनियों के लिए कारोबार करना मुश्किल हो जाता है.

भारी टैक्स से कैसे बढ़ जाती है कारों की कीमत?

भारत में कार खरीदते समय ग्राहक केवल वाहन की मूल कीमत नहीं चुकाता, बल्कि उस पर लगने वाले कई तरह के टैक्स भी देता है. छोटी कारों की तुलना में बड़ी एसयूवी, लग्जरी कारों और ज्यादा इंजन क्षमता वाले मॉडलों पर टैक्स का बोझ और ज्यादा होता है. जब किसी कंपनी को पता होता है कि उसकी कार भारत में दूसरे देशों की तुलना में काफी महंगी बिकेगी, तो उसके लिए बिक्री बढ़ाना आसान नहीं रहता. 

आयातित कारों पर कस्टम ड्यूटी भी अलग से लगती है, जिससे कीमत और ऊपर चली जाती है. यही कारण है कि कई ग्लोबल कंपनियां भारत में केवल चुनिंदा मॉडल बेचती हैं या फिर स्थानीय उत्पादन शुरू करने तक इंतजार करती हैं. कम बिक्री की संभावना और ज्यादा लागत कई ब्रांड्स को भारत में बड़े निवेश से रोक सकती है.

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सिर्फ टैक्स ही नहीं, ये वजहें भी हैं जिम्मेदार

हालांकि केवल GST को ही पूरी तरह जिम्मेदार नहीं माना जा सकता. भारत का बाजार कीमत को लेकर काफी संवेदनशील है. यहां ज्यादातर ग्राहक अच्छी माइलेज, कम मेंटेनेंस और किफायती कीमत वाली गाड़ियों को प्राथमिकता देते हैं. कई विदेशी ब्रांड ऐसे मॉडल बनाते हैं जो भारतीय ग्राहकों की जरूरतों से पूरी तरह मेल नहीं खाते. इसके अलावा मजबूत सर्विस नेटवर्क, स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता और स्थानीय उत्पादन भी किसी कंपनी की सफलता के लिए जरूरी होते हैं. 

यही वजह है कि कुछ ग्लोबल ब्रांड भारत में संघर्ष करते नजर आए, जबकि कुछ कंपनियों ने स्थानीय जरूरतों के हिसाब से खुद को ढालकर बड़ी सफलता हासिल की. फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भविष्य में टैक्स का बोझ कम होता है, तो भारतीय बाजार में और ज्यादा अंतरराष्ट्रीय ब्रांड और नए मॉडल देखने को मिल सकते हैं. इससे ग्राहकों को भी ज्यादा विकल्प और बेहतर प्रतिस्पर्धा का फायदा मिलेगा.

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