कहीं आप नई के बदले टेस्ट ड्राइव वाली कार तो नहीं चला रहे? इस मामले में डीलर पर 9 लाख का जुर्माना
जांच और सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि डीलर ने ग्राहक को नई कार देने की बजाय टेस्ट ड्राइव में इस्तेमाल की गई गाड़ी सौंप दी थी. अब इस मामले में डीलर पर 9 लाख का जुर्माना लगा है.

नई कार खरीदते समय हर किसी की यही उम्मीद होती है कि उसे बिल्कुल नई और बिना इस्तेमाल की हुई गाड़ी मिले. लेकिन अगर किसी ग्राहक को टेस्ट ड्राइव के लिए इस्तेमाल की गई कार को नई बताकर बेच दिया जाए तो यह न सिर्फ धोखाधड़ी है बल्कि अधिकारों का भी उल्लंघन है.
ऐसा ही एक मामला उस दौरान सामने आया जब सालों तक कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद ग्राहक को आखिरकार इंसाफ मिला. राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपनी और डीलर को मुआवजा देने का आदेश दिया.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, पटियाला के साधु सिंह ने 2011 में हिंद मोटर्स इंडिया लिमिटेड से Tata की नई कार खरीदी थी, जिसकी कीमत 7 लाख से ज्यादा थी. कार की पूरी कीमत चुकाने के बाद उसे कार की डिलीवरी दी गई, लेकिन कुछ समय बाद उसे पता चला कि यह वही कार थी जिसका पहले टेस्ट ड्राइव और डेमो के लिए इस्तेमाल किया जा चुका था. यानी जिस गाड़ी को बिल्कुल नई बताकर बेचा गया था, वह पहले से इस्तेमाल हो चुकी थी. ग्राहक ने इसे अपने साथ धोखा मानते हुए उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया.
जांच और सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि डीलर ने ग्राहक को नई कार देने की बजाय टेस्ट ड्राइव में इस्तेमाल की गई गाड़ी सौंप दी थी. उपभोक्ता आयोग ने माना कि यह ग्राहकों के साथ अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस का मामला है. आयोग ने कहा कि जब कोई ग्राहक नई कार की पूरी कीमत चुकाता है, तो उसे नई और बिना इस्तेमाल की हुई गाड़ी मिलनी चाहिए. पहले से उपयोग की गई कार को नई बताकर बेचना पूरी तरह गलत है.
अब चुकाने होंगे इतने पैसे
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया. आदेश के मुताबिक अब डीलर को ग्राहक को 9 लाख रुपये से ज्यादा का भुगतान करना होगा. इस रकम में गाड़ी की कीमत से जुड़ी राहत, मुआवजा और दूसरे खर्च शामिल हैं. आयोग ने माना कि डीलर की इस कार्रवाई से ग्राहक को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक परेशानी भी हुई.
अगर आप भी नई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो डिलीवरी लेने से पहले वाहन की अच्छी तरह जांच करना बेहद जरूरी है। कार का ओडोमीटर रीडिंग, मैन्यूफैक्चरिंग ईयर, बॉडी पर किसी तरह के निशान, टायरों की स्थिति और सभी दस्तावेजों का मिलान जरूर करें. जरूरत पड़ने पर प्री-डिलीवरी इंस्पेक्शन (PDI) भी कराएं। इससे किसी भी तरह की गड़बड़ी का पता पहले ही चल सकता है और बाद में होने वाली परेशानी से बचा जा सकता है.
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