संकरी गलियों में पहुंचेगी मदद, DRDO ने बनाई खास Bike Ambulance
रांची में DRDO की तकनीक से बनी आठ बाइक एंबुलेंस मिली हैं. जानें इनमें कौन-सी मेडिकल सुविधाएं हैं और संकरी गलियों में मरीजों तक मदद पहुंचाने में ये कैसे उपयोगी हो सकती हैं

आपातकाल में मरीज तक समय पर पहुंचना बेहद जरूरी होता है, लेकिन कई बार संकरी गलियों, भीड़भाड़ और खराब रास्तों के कारण बड़ी एंबुलेंस मौके तक नहीं पहुंच पाती. ऐसी स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाने और शुरुआती चिकित्सा सहायता देने में देरी हो सकती है. इसी समस्या को कम करने के लिए झारखंड की राजधानी रांची में खास बाइक एंबुलेंस सेवा शुरू करने की पहल की गई है.
इस सेवा का नाम नमो जीवन रक्षक रखा गया है और इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO की तकनीक से तैयार किया गया है. 10 अक्टूबर 2026 को रक्षा राज्य मंत्री और रांची के सांसद संजय सेठ ने सदर अस्पताल परिसर में इस सेवा का उद्घाटन किया. पहले चरण में रांची को कुल आठ बाइक एंबुलेंस मिली हैं. इनका उद्देश्य उन इलाकों तक चिकित्सा सहायता पहुंचाना है, जहां सामान्य एंबुलेंस को पहुंचने में परेशानी होती है.
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रांची में तैनात होंगी 8 Bike Ambulances
इस योजना के पहले चरण में सात बाइक एंबुलेंस सदर अस्पताल और एक नगर मोदी सेवा सदन को दी जाएगी. इनका इस्तेमाल शहर की संकरी गलियों, भीड़भाड़ वाले इलाकों और दूरदराज के गांवों में आपातकालीन मदद पहुंचाने के लिए किया जाएगा. रिपोर्ट के अनुसार, दुर्गा पूजा से पहले इन्हें चालू करने के लिए जरूरी प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश की जा रही थी. इसका मतलब है कि उद्घाटन हो जाने के बावजूद सेवा का पूरी तरह चालू होना अलग प्रक्रिया है. बाइक एंबुलेंस का फायदा उन स्थितियों में हो सकता है, जब सड़क पर जाम लगा हो या किसी इलाके में बड़ी गाड़ी ले जाना मुश्किल हो. झारखंड के कुछ दुर्गम क्षेत्रों में भी इनका इस्तेमाल उपयोगी हो सकता है, जहां घायल लोगों तक जल्दी पहुंचना चुनौतीपूर्ण होता है.
Oxygen से लेकर Patient Monitor तक सुविधाएं
DRDO की तकनीक से तैयार इन बाइक एंबुलेंस में मरीज को ले जाने के लिए खास सीट और सुरक्षा के लिए हार्नेस की व्यवस्था दी गई है. इनमें ऑक्सीजन सिलेंडर, प्राथमिक उपचार किट, IV स्टैंड और मल्टी-पैरामीटर पेशेंट मॉनिटर जैसे उपकरण मौजूद हैं. मॉनिटर की मदद से मरीज के ऑक्सीजन स्तर, हृदय गति और अन्य जरूरी संकेतों पर नजर रखने में सहायता मिल सकती है. इसके अलावा, सिर को स्थिर रखने वाले उपकरण और एयर स्प्लिंट भी दिए गए हैं. एयर स्प्लिंट का इस्तेमाल चोटिल हाथ या पैर को सहारा देने के लिए किया जा सकता है. बाइक में बीकन लाइट और सायरन भी दिए गए हैं. इन सुविधाओं का उद्देश्य अस्पताल पहुंचने से पहले मरीज की स्थिति पर नजर रखने और जरूरत के अनुसार शुरुआती चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में मदद करना है.
Emergency में कैसे मददगार होगी यह सेवा?
बाइक एंबुलेंस का मुख्य फायदा यह है कि दोपहिया वाहन कई ऐसी जगहों से गुजर सकता है, जहां बड़ी एंबुलेंस को पहुंचने में अधिक समय लगता है. इससे चिकित्सा टीम को मरीज तक जल्दी पहुंचने और उसकी शुरुआती स्थिति का आकलन करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, बाइक एंबुलेंस हर गंभीर मरीज को अस्पताल ले जाने वाली बड़ी एंबुलेंस का विकल्प नहीं है. इसकी भूमिका शुरुआती सहायता और जरूरत के अनुसार मरीज को चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाने में मदद करना है. गंभीर चोट या ऐसी स्थिति में जहां अधिक उपकरणों की जरूरत हो, वहां नियमित एंबुलेंस और अस्पताल की सुविधाएं जरूरी रहेंगी. रांची में इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सेवा कितनी जल्दी पूरी तरह चालू होती है और जरूरत पड़ने पर कितनी तेजी से मरीजों तक पहुंच पाती है.
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