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पावर और नॉर्मल पेट्रोल में क्या है फर्क? पुरानी कार मालिक जरूर जान लें ये बात

Difference Between Power and Normal Petrol: पावर और नॉर्मल पेट्रोल में आखिर क्या अंतर होता है? जानिए क्या प्रीमियम तेल डलवाने से आपकी पुरानी कार का माइलेज और परफॉर्मेंस सच में बढ़ जाएगी या यह सिर्फ पैसों की बर्बादी है.

Difference Between Power and Normal Petrol: भारत में अब फ्यूल को लेकर लोग काफी जागरूक हो गए हैं और अब सोच समझकर अपनी गाड़ी में फ्यूल भरवाते हैं. अब जब भी लोग पेट्रोल पंप पर अपनी गाड़ी लेकर जाते हैं तो वहां दो तरह के पेट्रोल के विकल्प दिखते हैं. एक नॉर्मल और दूसरा पावर या प्रीमियम पेट्रोल. अक्सर देखा जाता है कि, पंप पर मौजूद कर्मचारी हमसे पूछते हैं कि सर, पावर वाला डाल दूं?

उस वक्त हम सोच में पड़ जाते हैं कि क्या सच में पावर पेट्रोल डलवाने से हमारी कार रॉकेट बन जाएगी या फिर यह सिर्फ जेब ढीली करने का यह एक तरीका है. खासकर अगर आप भी कोई पुरानी कार है. तो यह कन्फ्यूजन और ज्यादा बढ़ जाता है. आइए समझते हैं कि इन दोनों फ्यूल में तकनीकी रूप से क्या अंतर है और आपकी पुरानी गाड़ी के लिए कौन सा बेहतर है.

ऑक्टेन रेटिंग से पड़ता है फर्क 

बता दें कि, नॉर्मल और पावर पेट्रोल में सबसे बड़ा और मुख्य अंतर होता है ऑक्टेन रेटिंग का. हमारे देश में मिलने वाले साधारण पेट्रोल की ऑक्टेन रेटिंग आमतौर पर 91 होती है. वहीं दूसरी तरफ प्रीमियम या पावर पेट्रोल की ऑक्टेन रेटिंग 95 या उससे ज्यादा होती है. ऑक्टेन रेटिंग का सीधा मतलब यह है कि फ्यूल इंजन के अंदर बिना किसी समय के कितना दबाव झेल सकता है. 

हाई-ऑक्टेन वाले पावर पेट्रोल का इस्तेमाल करने से इंजन के अंदर फ्यूल का कंबशन यानी जलने की प्रक्रिया बहुत स्मूथ और सही समय पर होती है. जिससे इंजन बिना किसी झटके के पूरी ताकत से काम करता है.

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एडिटिव्स है इंजन के लिए बढ़िया 

जानकारी दें कि, पावर पेट्रोल में सिर्फ ऑक्टेन ही ज्यादा नहीं होता बल्कि कंपनियां इसमें कुछ खास तरह के केमिकल्स और क्लीनिंग एजेंट्स मिलाती हैं, जिन्हें एडिटिव्स कहा जाता है. जब कोई गाड़ी सालों साल चलती है तो उसके इंजन के फ्यूल इंजेक्टर्स, वाल्व और कंबशन चैंबर में काले रंग का कार्बन जमा हो जाता है. 

यह कार्बन धीरे-धीरे इंजन की परफॉर्मेंस को कम कर देता है. जब आप गाड़ी में पावर पेट्रोल डालते हैं, तो इसमें मौजूद एडिटिव्स इंजन के अंदरूनी हिस्सों में जमा उस जिद्दी कार्बन को धीरे-धीरे साफ करने का काम करते हैं. जिससे इंजन अंदर से बिल्कुल साफ और नया जैसा महसूस करने लगता है. हालांकि, आपको बता दें कि, नार्मल और पावर पेट्रोल से गाड़ी के माइलेज पर कोई फर्क नहीं पड़ता है.

पुरानी कारों के मालिकों के लिए सलाह

अब आखिर में बात करते हैं सबसे जरूरी सवाल की क्या पुरानी कार में पावर पेट्रोल डालना चाहिए? इसका सीधा जवाब है कि अगर आपकी कार का इंजन नॉर्मल है, तो हमेशा महंगा पावर पेट्रोल डलवाने का कोई खास फायदा नहीं होगा. पुरानी गाड़ियों के मैनुअल में साफ लिखा होता है कि उन्हें 91 ऑक्टेन यानी नॉर्मल पेट्रोल की जरूरत है. 

हां, अगर आपकी गाड़ी बहुत पुरानी है और इंजन से खटखट की आवाज आ रही है या पिकअप गिर गया है, तो आप हर 3-4 टंकी के बाद एक बार पावर पेट्रोल डलवा सकते हैं. इससे इंजन के कार्बन साफ हो जाएंगे, लेकिन इसे रोज डलवाना पैसों की सरासर बर्बादी है.

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हिमांशु सिंह पिछले साढ़े तीन साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. फिलहाल वह ABP News में ऑटो बीट पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्टर में उन्हें नई कारों और बाइक्स के लॉन्च, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, फीचर्स, माइलेज, टेक्नोलॉजी और ऑटो मार्केट से जुड़ी खबरों की अच्छी जानकारी है. वह ऑटो से जुड़ी हर जरूरी और नई जानकारी आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं, ताकि लोग बिना किसी परेशानी के खबरों को समझ सकें.

ABP News से पहले हिमांशु DNP India, Sports Wiki और Hawk E Commerce के साथ काम कर चुके हैं. इस दौरान उन्होंने स्पोर्ट्स, राजनीति और वायरल खबरों पर भी काम किया. अलग-अलग बीट्स पर काम करने की वजह से उन्हें कई तरह की खबरों को समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने का अनुभव मिला.

हिमांशु की कोशिश रहती है कि उनकी खबरें सरल, भरोसेमंद और सीधे लोगों से जुड़ी हों. उन्हें ऐसी खबरों पर काम करना पसंद है, जिनका असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है. डिजिटल मीडिया की अच्छी समझ होने की वजह से वह ट्रेंडिंग और जरूरी खबरों को तेजी से पाठकों तक पहुंचाते हैं.

काम के अलावा हिमांशु को क्रिकेट खेलना, स्टैंडअप कॉमेडी करना और नई जगहों पर घूमना पसंद है. उनका मानना है कि नई जगहों को देखना और नए लोगों से मिलना सोच को बेहतर बनाता है, जिसका फायदा उनके काम में भी मिलता है.

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