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Japan E-Fuel Technology: हवा से पेट्रोल जैसा फ्यूल बना रहा जापान, किस तकनीक से किया ऐसा?

Japan E-Fuel Technology: क्रूड ऑयल की टेंशन होगी खत्म, जापान ने खोजा हवा से सिंथेटिक पेट्रोल बनाने का फॉर्मूला. डायरेक्ट एयर कैप्चर और वॉटर इलेक्ट्रोलाइसिस तकनीक से पानी और Co2 को ईंधन में बदला.

Japan E-Fuel Technology: विज्ञान की दुनिया में अक्सर ऐसे चमत्कार होते हैं जो इंसान की सोच को ही बदल कर रख देते हैं. ऐसा ही एक बड़ा कारनामा कर दिखाया है जापान ने. दरअसल, इस देश ने एक ऐसी क्रांतिकारी तकनीक विकसित कर ली है, जिसकी मदद से अब हवा और पानी की मदद से पेट्रेल और डीजल जैसा लिक्विड सिंथेटिक ईंधन तैयार किया जा रहा है.

दुनिया के कई देश जहां आज भी कच्चे तेल के आयात पर निर्भर हैं, वहीं जापान की इस खोज ने पूरी दुनिया के ऑटोमोबाइल और एनर्जी सेक्टर में तहलका मचा दिया है. आइए जानते हैं आखिर क्या है यह पूरी तकनीक और जापान ने इसे कैसे मुमकिन बनाया.

क्या है जापान का नया कमाल?

जापान एक ऐसा देश है जिसके पास अपने प्राकृतिक संसाधन जैसे कच्चा तेल या गैस लगभग न के बराबर हैं. यही वजह है कि जापान लंबे समय से ईंधन के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता खत्म करने की रिसर्च कर रहा था. हाल ही में जापान की सबसे बड़ी एनर्जी कंपनियों में से एक ENEOS ने योकोहामा में एक विशेष डिमॉन्स्ट्रेशन प्लांट चालू किया है. इस प्लांट में किसी जमीन या तेल के कुएं से नहीं, बल्कि हमारे आस-पास मौजूद कुली हवा और सामान्य पानी से सिंथेटिक पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल का उत्पादन किया जा रहा है. यह ईंधन रासायनिक रूप से पूरी तरह से पारंपरिक पेट्रोल जैसा ही है.

किस तकनीक से हवा बन रही पेट्रोल?

हवा से ईंधन बनाने की यह प्रक्रिया मुख्य रूप से तीन बड़े वैज्ञानिक चरणों पर टिकी है. सबसे पहले डायरेक्ट एयर कैप्चर मशीनों के जरिए वायुमंडल की खुली हवा से कार्बन डाइऑक्साइड को सीधे सोखकर अलग किया जाता है. इसके बाद सोलर या विंड एनर्जी जैसी रिन्यूएबल बिजली का उपयोग करके पानी के अणुओं को इलेक्ट्रोलाइजर की मदद से तोड़ा जाता है, जिससे ग्रीन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन बिल्कुल अलग हो जाते हैं.

इसके बाद आखिरी चरण में हवा से निकाली गई कार्बन डाइऑक्साइड और पानी से अलग की गई हाइड्रोजन को एक विशेष रिएक्टर के भीतर एडवांस कैटलिस्ट की मौजूदगी में फिशर-ट्रॉप्स सिंथेसिस प्रक्रिया से गुजारा जाता है. रासायनिक प्रक्रिया के बाद ये दोनों तत्व मिलकर लिक्विड हाइड्रोकार्बन में बदल जाते हैं, जो बिल्कुल पेट्रोल और डीजल की तरह काम करता है. 

मौजूदा इंजनों में सीधे इस्तेमाल की खूबी

जापान द्वारा तैयार किए गए इस ई-फ्यूल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह ड्रॉप-इन रेडी है. यानी इस पेट्रोल या डीजल का इस्तेमाल करने के लिए आपको गाड़ियों के मौजूदा इंजन में किसी भी तरह का बदलाव करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इसे सामान्य पेट्रोल की तरह ही आज की कारों, भारी ट्रकों, जहाजों और हवाई जहाजों में सीधे भरा जा सकता है. जापान ने इसका जमीनी परीक्षण भी शुरू कर दिया है, जहां इस सिंथेटिक ईंधन का इस्तेमाल शटल बसों को चलाने के लिए किया जा रहा है.

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पर्यावरण और भविष्य के लिए क्यों है वरदान?

ग्लोबल वॉर्मिंग के इस दौर में यह तकनीक पर्यावरण के लिए गेम-चेंजर मानी जा रही है. जब यह सिंथेटिक पेट्रोल कार में जलता है, तो इससे हानिकारक उत्सर्जन बहुत कम होता है. चूंकि इसे बनाने के लिए पहले ही हवा से कार्बन डाइऑक्साइड को सोखा गया था, इसलिए यह वायुमंडल में कोई भी नई कार्बन डाइऑक्साइड नहीं जोड़ता.

यह पूरी तरह से एक रीसाइक्लिंग कार्बन लूप की तरह काम करता है. हालांकि, अभी इस तकनीक से बड़े पैमाने पर ईंधन बनाना काफी खर्चीला और जटिल है, लेकिन आने वाले समय में जैसे ही इसका उत्पादन व्यावसायिक स्तर पर बढ़ेगा, यह कच्चे तेल की वैश्विक राजनीति और कीमतों को पूरी तरह बदल कर रख देगा.

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हिमांशु सिंह एबीपी लाइव में ऑटो सेक्शन में कार्यरत हैं. जहां वह ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों, नए मॉडल्स, कार-बाइक लॉन्च, ऑफर्स और ऑटो इंडस्ट्री से जुड़े विभिन्न विषयों पर खबरें लिखने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका सफर वर्ष 2022 में डीएनपी इंडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने राजनीति, खेल और शिक्षा से जुड़ी खबरों पर काम किया. इसके साथ ही उन्होंने स्पोर्ट्स से संबंधित वीडियो भी तैयार किए.

इसके बाद उन्होंने Sportzwiki के साथ काम किया जहां उन्होंने मुख्य रूप से खेल जगत की खबरें लिखीं और सोशल मीडिया के लिए स्पोर्ट्स वीडियो बनाये. इसके बाद उन्होंने Hawk Martech में अपनी सेवाएं दीं. वर्तमान में वह एबीपी लाइव के साथ जुड़े हुए हैं और ऑटो बीट पर काम कर रहे हैं।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने रामा यूनिवर्सिटी, कानपुर से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के दौरान उन्होंने न्यूज राइटिंग, डिजिटल कंटेंट, स्पोर्ट्स कवरेज, वीडियो कंटेंट और सोशल मीडिया के लिए कंटेंट तैयार करने का अनुभव हासिल किया है.

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