कार का कलर चेंज कराने से पहले जान लें नियम, वरना इतने मोटे चालान से आपको कोई नहीं बचा सकता
Car Color Modification: आपकी गाड़ी का रंग इसकी पहचान का एक अहम हिस्सा होता है, जो आपकी RC में दर्ज रहता है. जब भी आप कार का रंग बदलने का सोचते हैं, तो सबसे पहले आपको RTO से परमिशन लेनी होती है.

अक्सर लोग कार को अपनी पर्सनेलिटी और स्टाइल का हिस्सा मानते हैं. यही वजह है कि कई लोग अपनी गाड़ी को यूनिक दिखाने के लिए उसका रंग ही बदल देते हैं. नई कार जैसा लुक पाने या अपनी पसंद के हिसाब से कलर चुनने का यह एक अच्छा तरीका है. लेकिन भारत में कार का रंग बदलना सिर्फ शौक का मामला नहीं है. इसके साथ कुछ जरूरी कानूनी नियम भी जुड़े हुए हैं, जिनका पालन करना आपके लिए काफी जरूरी है. अगर आप इन नियमों का पालन नहीं करते हैं, तो आपको चालान, जुर्माना या इंश्योरेंस से जुड़ी कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.
दरअसल, आपकी गाड़ी का रंग इसकी पहचान का एक अहम हिस्सा होता है, जो आपकी RC यानी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट में दर्ज रहता है. इसलिए जब भी आप कार का रंग बदलने का सोचते हैं, तो सबसे पहले आपको RTO से परमिशन लेनी होती है. इसके लिए एक फॉर्म भरना होता है, जिसमें गाड़ी की डिटेल्स और नया रंग बताया जाता है. इसके साथ ही RC, इंश्योरेंस, PUC और आइडेंटिटी कार्ड जैसे जरूरी डॉक्यूमेंट्स जमा करने होते हैं. जब RTO आपकी आपकी डिटेल्स को वेरिफाई करता है, तभी आप अपनी गाड़ी का रंग बदलवा सकते हैं.
आरटीओ की परमिशन के बाद कर सकते हैं ये काम
RTO की इजाजत के बाद आप किसी अच्छे वर्कशॉप या पेंट शॉप से गाड़ी का रंग बदलवा सकते हैं. आजकल पेंटिंग के अलावा रैपिंग का भी चलन है, जिसमें गाड़ी पर एक खास फिल्म चढ़ाई जाती है. लेकिन चाहे आप पेंट करवाएं या रैपिंग, दोनों ही कंडीशन में नियम एक जैसे रहते हैं और आपको इसकी जानकारी RTO को देनी जरूरी होती है. अगर आप बिना RTO की जानकारी के कार का रंग बदलवा देते हैं तो आपको 5 हजार से 10 हजार रुपये का जुर्माना या गाड़ी भी जब्त की जा सकती है.
इन बातों का ध्यान रखना जरूरी
रंग बदलने के बाद भी प्रोसेस पूरी नहीं हो जाता. आपको अपनी गाड़ी को दोबारा RTO में दिखाना पड़ता है, जहां अधिकारी यह जांचते हैं कि आपने वही रंग करवाया है जिसकी इजाजत ली गई थी. जांच पूरी होने के बाद आपकी RC में नया रंग अपडेट कर दिया जाता है. यह स्टेप बेहद जरूरी है, क्योंकि बिना RC अपडेट के आपकी गाड़ी कानूनी रूप से मान्य नहीं होती.
इसके अलावा आपको कुछ और बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है, जैसे आप ऐसा रंग नहीं चुन सकते जो पुलिस, एंबुलेंस या अन्य सरकारी वाहनों से मिलता-जुलता हो. इसके साथ ही रंग बदलने के बाद अपनी इंश्योरेंस कंपनी को इसकी जानकारी देना भी जरूरी होता है, ताकि आने वाले समय में क्लेम लेने में कोई परेशानी न हो.
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Source: IOCL


























