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Shardiya Navratri Maa Chandraghanta: मां चंद्रघंटा की पूजा दो दिन क्यों? तृतीया तिथि का शास्त्रीय रहस्य

Shardiya Navratri 2025 Day 3 Maa Chandraghanta puja: नवरात्रि 2025 में तृतीया तिथि दो दिन पड़ रही है. जानें मां चंद्रघंटा की पूजा कब करनी चाहिए, पंचांग नियम और शास्त्रीय प्रमाण क्या कहते हैं.

Shardiya Navratri 2025: शारदीय नवरात्रि वर्ष का सबसे बड़ा धार्मिक उत्सव है. नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है. तीसरे दिन देवी का चंद्रघंटा रूप पूजित होता है. यह स्वरूप शांति, पराक्रम और सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है.

मां चंद्रघंटा के मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित है और हाथ में घंटा है. इनकी पूजा से साधक को साहस, विजय और दांपत्य सुख की प्राप्ति होती है. लेकिन इस वर्ष एक विशेष स्थिति बनी है कि पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि दो दिन तक पड़ रही है. ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि पूजा किस दिन करनी चाहिए?

पंचांग, तिथि दो दिन क्यों पड़ती है?

हिन्दू पंचांग में तिथि का निर्धारण चंद्रमा और सूर्य के आपसी कोण (Elongation) से होता है. हर तिथि लगभग 23 घंटे 37 मिनट की होती है, लेकिन यह हमेशा सूर्योदय से सूर्योदय तक नहीं चलती.

कई बार तिथि का आरंभ एक दिन की मध्यरात्रि में होता है और उसका अंत अगले दिन के दोपहर बाद. इस स्थिति में एक ही तिथि दो अलग-अलग दिनों के सूर्योदय पर प्रभावी हो जाती है. इसे ही आम भाषा में लोग कहते हैं कि एक तिथि का दो दिन पड़ना.

शास्त्रीय नियम: किस दिन पूजा मान्य है?

धर्मग्रंथों में इस भ्रम को दूर करने के लिए स्पष्ट निर्देश हैं. धर्मसिन्धु (नवरात्रि पूजन विधि) और निरण्यसिन्धु में उल्लेख है कि यस्य तिथौ सूर्योदयः, सा तिथि मुख्यत्वेन ग्राह्या. अर्थात् जिस तिथि में सूर्योदय होता है, वही तिथि मुख्य रूप से मान्य होती है.

इसका अर्थ यह है कि यदि किसी तिथि का सूर्योदय लगातार दो दिन होता है, तो दोनों दिन वह तिथि मान्य मानी जाएगी.

तृतीया दो दिन क्यों?

पंचांगों के अनुसार 24 सितंबर 2025 को प्रातः काल से तृतीया तिथि आरंभ हो चुकी होगी. यह तिथि अगले दिन यानी 25 सितंबर की सुबह तक बनी रहेगी. परिणामस्वरूप 24 और 25 दोनों दिन सूर्योदय तृतीया तिथि में होगा. यही कारण है कि मां चंद्रघंटा की पूजा दो दिन तक शास्त्रसम्मत मानी जा रही है.

शास्त्रीय उदाहरण: अक्षय तृतीया

अक्षय तृतीया पर्व इसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है. कई बार अक्षय तृतीया की तिथि दो दिनों तक रहती है. ग्रंथों के अनुसार जब दोनों दिन सूर्योदय तृतीया में हो, तो पर्व दोनों दिन मनाना मान्य होता है.

लेकिन पहला दिन अधिक बलवान माना जाता है. इसी नियम को नवरात्रि की तृतीया पर भी लागू किया जाता है.

मां चंद्रघंटा पूजन विधि (दोनों दिन लागू)

प्रातः स्नान कर घर के मंदिर या पूजन स्थल को शुद्ध करें. कलश की स्थापना करें और मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं. गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें.

मां चंद्रघंटा का विशेष मंत्र जपें: ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः. भोग में दूध से बनी वस्तुएं, खासकर खीर अर्पित करें. अंत में दुर्गा चालीसा और आरती का पाठ करें.

भक्तगण क्या करें?

पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डॉ अनीष व्यास  24 सितंबर 2025: यह नवरात्रि का तीसरा दिन और मां चंद्रघंटा का मुख्य पूजन दिवस होगा. 25 सितंबर 2025: सूर्योदय तृतीया में होने से पूजा इस दिन भी मान्य है. भक्त इसे अतिरिक्त पूजन या पुनरावृत्ति पूजा के रूप में कर सकते हैं. शास्त्रीय दृष्टि से पहला दिन अधिक महत्व रखता है, लेकिन दूसरे दिन पूजन करना वर्जित नहीं है.

क्या होगा फल?

जो साधक 24 सितंबर को पूजन करेंगे, उन्हें मां चंद्रघंटा की कृपा से साहस, शौर्य और समृद्धि प्राप्त होगी. जो लोग 25 सितंबर को भी पूजन करेंगे, उन्हें अतिरिक्त पुण्य और मानसिक शांति का लाभ मिलेगा. शास्त्रों के अनुसार जब किसी तिथि का संयोग दो दिनों तक बनता है, तो दोनों दिन पूजन करना श्रेष्ठ माना गया है.

तृतीयायां पूजिता चन्द्रघंटा रणप्रिया. सिंहवाहिनी शक्तिरूपा सौभाग्यं ददाति च॥ यानी तृतीया तिथि को पूजित मां चंद्रघंटा रणप्रिय, सिंहवाहिनी और शक्तिरूपा हैं. वे साधक को सौभाग्य, विजय और अपार साहस प्रदान करती हैं.

नवरात्रि 2025 में मां चंद्रघंटा की पूजा का अद्भुत संयोग बन रहा है. तृतीया तिथि 24 और 25 सितंबर दोनों दिन पड़ रही है. शास्त्रों के अनुसार जब किसी तिथि का सूर्योदय लगातार दो दिनों तक हो, तो उस तिथि का पूजन दोनों दिन मान्य होता है.

इसलिए इस बार भक्त मां चंद्रघंटा का पूजन 24 और 25 सितंबर दोनों दिन कर सकते हैं. हालांकि शास्त्रों के अनुसार पहला दिन (24 सितंबर) मुख्य रूप से श्रेष्ठ माना जाएगा.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

About the author Hirdesh Kumar Singh

हृदेश कुमार सिंह ,  वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य | मीडिया रणनीतिकार | डिजिटल कंटेंट विशेषज्ञ

हृदेश कुमार सिंह 25 वर्षों से वैदिक ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय एक बहुआयामी विशेषज्ञ हैं. वर्तमान में वे ABP Live में Astro और Religion सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं, जहां वे ग्रहों की चाल को केवल पारंपरिक भविष्यवाणी तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उन्हें आज की जिंदगी, समाज, मीडिया, बाजार और वैश्विक घटनाओं को समझने का एक महत्वपूर्ण संकेत मानते हैं.

हृदेश कुमार सिंह एक सम्मानित और अनुभवी ज्योतिषाचार्य हैं, जिनका काम पारंपरिक विद्या और आज के समय की समझ को जोड़ने के लिए जाना जाता है. उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), New Delhi से पत्रकारिता की शिक्षा प्राप्त की है और Astrosage व Astrotalk जैसे प्रतिष्ठित प्लेटफॉर्म्स के साथ भी ज्योतिष सलाहकार के रूप में कार्य किया है. वे मीडिया रणनीति, कंटेंट लीडरशिप, धार्मिक ब्रांडिंग और डिजिटल पब्लिशिंग के गहरे जानकार हैं.

प्रमुख भविष्यवाणियां

हृदेश कुमार सिंह की कई भविष्यवाणियां समय के साथ चर्चा में रहीं और उल्लेखनीय रूप से सटीक सिद्ध हुईं. इनमें IPL 2025 के विजेता की पूर्व घोषणा, Yo Yo Honey Singh की वापसी और संगीत सफलता, भारत में AI नीति बदलाव के संकेत, Donald Trump की पुनः राष्ट्रपति पद पर वापसी और उसके बाद के निर्णय, Pushpa 2: The Rule की बॉक्स ऑफिस सफलता और Allu Arjun के करियर ग्राफ, Dhurandhar की संभावित बॉक्स ऑफिस सफलता, ईरान-इजराइल तनाव, शेयर बाजार क्रैश 2025, दिल्ली की मुख्यमंत्री को लेकर भविष्यवाणी, पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई का पूर्वानुमान और क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू व लोकप्रियता का संकेत शामिल हैं. ये सभी विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर, दशा-अंतरदशा और मेदिनी ज्योतिष पर आधारित रहे हैं.

विशेषज्ञता के क्षेत्र

हृदेश कुमार सिंह (Astro Guy) वैदिक ज्योतिष, संहिता शास्त्र, होरा शास्त्र, अंक ज्योतिष और वास्तु के अनुभवी शोधकर्ता व विश्लेषक हैं. वे ग्रहों की स्थिति, दशा-गोचर और मनोवैज्ञानिक संकेतों के आधार पर करियर, विवाह, शिक्षा, प्रेम संबंध, बिजनेस और स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर गहराई से मार्गदर्शन देते हैं.

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डिजिटल युग में ज्योतिष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए हृदेश कुमार सिंह उन अग्रणी ज्योतिषाचार्यों में शामिल हैं जिन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे कॉन्सेप्ट को विकसित कर उसे मुख्यधारा में स्थापित किया. उन्होंने राशिफल को केवल पारंपरिक भविष्यवाणी तक सीमित न रखते हुए उसे आज की युवा सोच, करियर कन्फ्यूजन, रिलेशनशिप डायनामिक्स और रियल-लाइफ डिसीजन मेकिंग से जोड़ा.

यही कारण है कि उनका कंटेंट केवल जानकारी नहीं देता, बल्कि यूजर्स को यह महसूस कराता है कि ज्योतिष उनकी लाइफ से सीधे जुड़ा हुआ है,चाहे वह करियर का चुनाव हो, रिश्तों की समझ हो या सही समय पर सही कदम उठाने का फैसला.

उद्देश्य

हृदेश कुमार सिंह के अनुसार, ज्योतिष का मूल उद्देश्य व्यक्ति को सही समय की समझ देकर बेहतर और संतुलित निर्णय लेने में मदद करना है, न कि भय या भाग्यवाद फैलाना. वे ज्योतिष को एक ऐसे बौद्धिक और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के रूप में देखते हैं, जो जीवन की अनिश्चितताओं को समझने, अवसरों को पहचानने और चुनौतियों के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा देता है. यह केवल भविष्य बताने तक सीमित नहीं, बल्कि निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करता है.

उनका दृष्टिकोण विभिन्न आध्यात्मिक परंपराओं की मूल भावना से जुड़ा है, श्रीमद्भगवद्गीता का कर्म सिद्धांत, सूफी संत रूमी की आत्म-खोज, बाइबल और कुरान का विश्वास व धैर्य, तथा भगवान बुद्ध का संतुलन और जागरूकता का मार्ग. ज्योतिष इन मूल्यों को जीवन में Practical रूप से लागू करने की समझ देता है.

उनके अनुसार, चाहे करियर, रिश्ते, व्यापार या जीवन का कोई भी संघर्ष हो, ज्योतिष व्यक्ति को स्थिति समझने और सही दिशा में आगे बढ़ने में मदद करता है. इसका सही उपयोग व्यक्ति को निर्भर नहीं, बल्कि आत्मविश्वासी और निर्णय लेने में सक्षम बनाता है.

अन्य रुचियां

फिल्मों की गहराई को समझना, संगीत की भावनात्मक ताकत, साहित्य, राजनीति और बाजार की समझ, पर्यावरण, कृषि, ग्राम्य विकास साथ ही यात्राओं से मिले अनुभव, ये सभी उनके विचारों और लेखन को एक अलग दृष्टि देते हैं. यही वजह है कि उनका काम केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों को सोचने और समझने के लिए प्रेरित करता है.

 
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