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PM Modi in Israel: महाशक्ति बनने की राह पर भारत! पीएम मोदी की इज़राइल यात्रा और ग्रहों का वो संयोग जो दुश्मनों के होश उड़ा देगा

क्या मोदी की इजराइल यात्रा केवल कूटनीति थी या सोची-समझी रणनीतिक समय-चयन? 4:24 PM की कुंडली के ग्रहों और अष्टकवर्ग के 41 अंकों के आधार पर भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' का एक विस्तृत और गंभीर विश्लेषण.

कल बुधवार की दोपहर, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष विमान तेल अवीव के बेन गुरियन हवाई अड्डे पर उतरा, तो वह केवल एक औपचारिक राजकीय यात्रा की शुरुआत नहीं थी. ठीक 16:24:45 बजे (IST) जब उन्होंने इजराइली धरती पर कदम रखा, तो दुनिया ने देखा कि भारत अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) को लेकर कितना गंभीर है. एक तरफ अमेरिका-ईरान का तनाव चरम पर है, तो दूसरी तरफ मोदी और नेतन्याहू का यह 'गर्मजोशी' भरा मिलना कूटनीति के गलियारों में बहुत बड़ा संदेश दे गया.

यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया एक बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ा है. लाल सागर में व्यापारिक सुरक्षा की चुनौतियां हों या नई तकनीकी शीत युद्ध, भारत ने इजराइल के साथ अपने संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का फैसला किया है.

रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विमान से उतरते हैं. इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू स्वयं प्रोटोकॉल से परे जाकर उनका स्वागत करते हैं. यह केवल दो देशों के बीच की औपचारिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि यह वह क्षण था जब भारत ने अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) को एक नए और अत्यंत प्रभावशाली चरण में प्रवेश कराया.

4:24 PM का वह क्षण: मात्र एक यात्रा या सोची-समझी कूटनीति?

जब हम उस विशिष्ट पल की कुंडली (25 फरवरी, 16:24:45) का विश्लेषण करते हैं, तो कई ऐसी सूक्ष्म परतें उभरती हैं जो सामान्य समाचारों की सुर्खियों में ओझल रह जाती हैं. कूटनीति में समय का चयन (Timing) कभी भी यादृच्छिक (Random) नहीं होता. यह 'इवेंट चार्ट' न केवल इस यात्रा की सफलता का संकेत देता है, बल्कि आने वाले दशकों के भारत-इज़राइल रक्षा संबंधों का एक ऐसा खाका खींचता है जो 'मूक लेकिन मजबूत' है.

कर्क लग्न: सुरक्षा और संरक्षण का अभेद्य कवच

उस समय 'कर्क लग्न' (2°47') उदित था. ज्योतिष और सामरिक विज्ञान के संगम पर देखें तो कर्क राशि जल तत्व की है, जिसका मूल स्वभाव 'संरक्षण' और 'सुरक्षा' है.

यह आक्रामक विस्तारवाद की कुंडली नहीं है, बल्कि यह 'संरक्षित शक्ति' (Consolidated Power) की कुंडली है. लग्न का प्रारंभिक अंशों में होना यह दर्शाता है कि यह यात्रा तात्कालिक प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि एक गहरी और स्थायी राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना खड़ी करने के लिए है. भारत यहां अपनी सीमाओं को 'अभेद्य' बनाने के उद्देश्य से खड़ा है.

लग्नेश चंद्रमा: भारत की 'प्रासंगिक और व्यावहारिक' नीति

कर्क लग्न का स्वामी चंद्रमा है, जो इस समय वृषभ राशि में 'उच्च' का होकर लाभ (11वें) भाव में स्थित है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जब लग्नेश लाभ भाव में उच्च का होता है, तो यह 'समान स्तर की साझेदारी' को दर्शाता है.

यह स्थिति स्पष्ट करती है कि भारत इस वार्ता में किसी 'आश्रित' की तरह नहीं, बल्कि एक 'मजबूत और व्यावहारिक' (Pragmatic) साझेदार के रूप में उतरा है. उच्च का चंद्र नेतृत्व को वह स्थिरता देता है जिससे वे वैश्विक दबावों के बीच अपने राष्ट्रीय हितों (National Interests) को सर्वोपरि रख सकें.

अष्टम भाव की सक्रियता: 'डीप-स्टेट' और रणनीतिक गहराई

इस कुंडली की सबसे बारीक और गंभीर राज इसके 7वें और 8वें भाव के समीकरण में छिपे हैं. कूटनीति में सप्तम भाव 'खुली साझेदारी' का होता है, लेकिन इस समय सप्तम भाव शांत है और पूरी ऊर्जा अष्टम भाव में केंद्रित है.

पांच ग्रहों का समागम: एक दुर्लभ रणनीतिक स्थिति

कुंभ राशि में सूर्य, मंगल, राहु, बुध और शुक्र का जमावड़ा अष्टम भाव में स्थित है. यह कोई साधारण ग्रह स्थिति नहीं है. अष्टम भाव परिवर्तन, गुप्त रणनीति, रक्षा पुनर्गठन और 'डीप-टेक' से जुड़ा होता है.

इतने प्रभावशाली ग्रहों का यहां होना यह संकेत देता है कि जो चर्चा सार्वजनिक घोषणाओं (Press Releases) में हो रही है, असली काम उससे कहीं अधिक गहराई में खुफिया तंत्र, परमाणु सुरक्षा और रक्षा संरचना के स्तर पर हो रहा है.

रक्षा सहयोग का नया मॉडल: हथियारों से आगे की सोच

कुंभ राशि नवाचार और भविष्योन्मुखी तकनीकी सोच की राशि है. यहां मंगल (सैन्य शक्ति) और राहु (आधुनिक तकनीक) का होना भारत के रक्षा प्रतिमान (Defense Paradigm) में एक युगांतरकारी बदलाव की ओर इशारा करता है.

लेजर डिफेंस और भविष्य के युद्ध

इस यात्रा का सबसे बड़ा हासिल 'सह-उत्पादन' (Co-development) है. इज़राइल की उन्नत 'एंटी-ड्रोन' प्रणालियां और विशेष रूप से 'आयरन बीम' (लेजर मिसाइल डिफेंस) तकनीक अब भारत के रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा बनने वाली है. यह भारत को उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर देगा जिनके पास 'Directed Energy Weapons' की शक्ति होगी.

साइबर संप्रभुता और डिजिटल सुरक्षा

अष्टम भाव में बुध (डेटा) और राहु (साइबर क्षेत्र) का होना यह सुनिश्चित करता है कि भारत और इज़राइल मिलकर भविष्य के 'अदृश्य युद्धों' (Invisible Wars) के लिए एक सुरक्षा कवच तैयार कर रहे हैं. आज के युग में युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि बैंकिंग सर्वर, पावर ग्रिड की कोडिंग और सैटेलाइट लिंक पर लड़ा जाता है.

शनि का संतुलन: 'मल्टी-एलाइनमेंट' की मास्टरक्लास

इस कुंडली में शनि मीन राशि (9वें भाव की ओर झुकाव) में है. नवम भाव विदेश नीति, उच्च सिद्धांतों और वैश्विक दृष्टिकोण का होता है.

रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy)
शनि का यह स्थान भारत को 'धैर्य और अनुशासन' प्रदान करता है. यह दर्शाता है कि भारत किसी एक ध्रुव (जैसे अमेरिका या रूस) के दबाव में आए बिना अपनी स्वतंत्र विदेश नीति बनाए रखेगा. पश्चिम एशिया के वर्तमान तनाव के बीच, भारत ने इजराइल के साथ खड़े होकर भी अपनी तटस्थता को बखूबी संभाला है.

आर्थिक और तकनीकी विस्तार: केवल हथियारों तक सीमित नहीं
अक्सर इजराइल यात्रा को केवल रक्षा सौदों के चश्मे से देखा जाता है, लेकिन 11वें भाव में बैठा चंद्रमा और अष्टम का शुक्र एक अलग कहानी कह रहे हैं.

  1. एग्रो-टेक क्रांति: इज़राइल की 'प्रेसिजन फार्मिंग' तकनीक भारत के कृषि संकट के लिए स्थाई समाधान की नींव रख रही है.
  2. इनोवेशन और स्टार्टअप इकोसिस्टम: अष्टम भाव में शुक्र की उपस्थिति स्टार्टअप्स और 'क्वांटम कंप्यूटिंग' में बड़े निवेश और साझा अनुसंधान की ओर इशारा करती है.

जोखिम और चुनौतियां: राहु की उपस्थिति और नैरेटिव वॉर

अष्टम भाव में राहु की स्थिति 'सूचना युद्ध' (Information Warfare) की ओर संकेत करती है. वैश्विक स्तर पर इस यात्रा की गलत व्याख्या करने के प्रयास होंगे. भारत को अपनी 'पब्लिक डिप्लोमेसी' के जरिए यह संदेश देना होगा कि यह साझेदारी किसी के 'खिलाफ' नहीं, बल्कि 'वैश्विक सुरक्षा और समृद्धि' के लिए है.

शत्रुहंता योग: अष्टकवर्ग की सामरिक गारंटी
जब हम कुंडली के सूक्ष्म हिस्सों में जाते हैं, तो अष्टकवर्ग विश्लेषण में छठे भाव (शत्रु और बाधाओं का घर) में 41 अंक दिखाई देते हैं. इसका सीधा सामरिक अर्थ यह है कि भारत की सुरक्षा दीवार इतनी मजबूत हो चुकी है कि क्षेत्रीय विरोधियों का कोई भी छद्म युद्ध या प्रोपेगेंडा भारत की इस बढ़त को डिगा नहीं पाएगी.

शोर से अधिक संरचना की ओर बढ़ता भारत

25 फरवरी 2026, शाम 4:24 PM की कुंडली यह नहीं कहती कि परिणाम उसी क्षण मिल जाएंगे. यह कहती है कि भारत की सामरिक दिशा हमेशा के लिए बदल चुकी है. यह यात्रा एक ऐसी 'साइलेंट स्ट्रक्चरिंग' है जो आने वाले 20 सालों तक भारत के रक्षा और तकनीकी हितों को सुरक्षित रखेगी.

  • कर्क लग्न ने सुरक्षा की गारंटी दी.
  • उच्च के चंद्र ने व्यावहारिक लाभ को मजबूत किया.
  • अष्टम के पांच ग्रहों ने तकनीकी पुनर्गठन का आधार तैयार किया.
  • नवम के शनि ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में संतुलन बनाए रखा.

अंततः, सबसे बड़े परिवर्तन बड़ी घोषणाओं से नहीं, बल्कि शांत और गहरी संरचनात्मक प्रक्रियाओं (Structural Processes) से आते हैं. भारत अब वैश्विक मंच पर केवल एक दर्शक नहीं है, वह भविष्य की युद्ध तकनीक का एक 'निर्णायक वास्तुकार' (Strategic Architect) बनकर उभरा है.

FAQ: मुख्य सामरिक प्रश्न

1. क्या इस यात्रा से क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों में कोई बड़ा बदलाव आएगा?
हां. भारत की बढ़ती 'डीप-टेक' और खुफिया साझेदारी विरोधियों के लिए एक बड़ी तकनीकी चुनौती पेश करेगी.

2. इजराइल से मुख्य तकनीकी लाभ क्या है?
मुख्य लाभ 'सह-उत्पादन' में है. इसमें एन्क्रिप्शन, स्पेस-आधारित सर्विलांस और अगली पीढ़ी के मिसाइल डिफेंस सिस्टम शामिल हैं.

3. क्या भारत की 'स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी' पर कोई आंच आएगी?
नहीं. कुंडली का 9वां शनि दर्शाता है कि भारत अपने निर्णय स्वतंत्र रूप से लेने की क्षमता को और विस्तार दे रहा है.

4. इस यात्रा का आम भारतीय नागरिक पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
यह आपकी डिजिटल संपत्ति की सुरक्षा (Cyber Security) और एग्रो-टेक के जरिए बेहतर खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करेगा.

यह भी पढ़ें- PM Modi Israel Visit Live Updates: PM मोदी और नेतन्याहू के बीच होगी द्विपक्षीय मुलाकात, कई अहम समझौतों पर लगेगी मुहर, जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में देंगे साझा बयान

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About the author Hirdesh Kumar Singh

हृदेश कुमार सिंह ,  वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य | मीडिया रणनीतिकार | डिजिटल कंटेंट विशेषज्ञ

हृदेश कुमार सिंह 25 वर्षों से वैदिक ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय एक बहुआयामी विशेषज्ञ हैं. वर्तमान में वे ABP Live में Astro और Religion सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं, जहां वे ग्रहों की चाल को केवल पारंपरिक भविष्यवाणी तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उन्हें आज की जिंदगी, समाज, मीडिया, बाजार और वैश्विक घटनाओं को समझने का एक महत्वपूर्ण संकेत मानते हैं.

हृदेश कुमार सिंह एक सम्मानित और अनुभवी ज्योतिषाचार्य हैं, जिनका काम पारंपरिक विद्या और आज के समय की समझ को जोड़ने के लिए जाना जाता है. उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), New Delhi से पत्रकारिता की शिक्षा प्राप्त की है और Astrosage व Astrotalk जैसे प्रतिष्ठित प्लेटफॉर्म्स के साथ भी ज्योतिष सलाहकार के रूप में कार्य किया है. वे मीडिया रणनीति, कंटेंट लीडरशिप, धार्मिक ब्रांडिंग और डिजिटल पब्लिशिंग के गहरे जानकार हैं.

प्रमुख भविष्यवाणियां

हृदेश कुमार सिंह की कई भविष्यवाणियां समय के साथ चर्चा में रहीं और बाद में सही साबित हुईं. IPL 2025 के विजेता को लेकर पहले ही दिए गए संकेत हों, Yo Yo Honey Singh की वापसी हो या भारत में AI नीति में बदलाव की दिशा, इन विषयों पर उनके विश्लेषण पहले ही ध्यान खींच चुके थे.

इसी तरह Donald Trump की वापसी के संकेत, Pushpa 2 की सफलता, Allu Arjun के करियर का उभार, Dhurandhar/ Dhurandhar The Revenge फिल्म को लेकर अनुमान और US-Iran Islamabad शांति वार्ता के सफल न होने के संकेत भी बाद की घटनाओं से मेल खाते दिखे.

ईरान-इजराइल तनाव, 2025 के शेयर बाजार की गिरावट, दिल्ली की राजनीति, पहलगाम हमले के बाद भारत की प्रतिक्रिया और क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) के उभरने जैसे कई मुद्दों पर भी उनके आकलन चर्चा में रहे.

ये सभी विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर और मेदिनी ज्योतिष के आधार पर किए गए, जिन्हें समय के साथ अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर गंभीरता से लिया गया.

विशेषज्ञता के क्षेत्र

हृदेश कुमार सिंह (Astro Guy) वैदिक ज्योतिष, संहिता शास्त्र, होरा शास्त्र, अंक ज्योतिष और वास्तु के अनुभवी शोधकर्ता व विश्लेषक हैं. वे ग्रहों की स्थिति, दशा-गोचर और मनोवैज्ञानिक संकेतों के आधार पर करियर, विवाह, शिक्षा, प्रेम संबंध, बिजनेस और स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर गहराई से मार्गदर्शन देते हैं.

ज्योतिष के पारंपरिक ज्ञान को आज के समय से जोड़ते हुए वे शेयर मार्केट ट्रेंड, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कॉर्पोरेट रणनीति, ब्रांड पोजिशनिंग और वैश्विक घटनाओं को समझने का प्रयास करते हैं. डिजिटल युग में धर्म और ज्योतिष को प्रामाणिक तरीके से प्रस्तुत करने के लिए वे SEO-अनुकूल राशिफल, पंचांग आधारित भविष्यवाणी और गूगल रैंकिंग के अनुसार कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञ माने जाते हैं.

डिजिटल युग में ज्योतिष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए हृदेश कुमार सिंह उन अग्रणी ज्योतिषाचार्यों में शामिल हैं जिन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे कॉन्सेप्ट को विकसित कर उसे मुख्यधारा में स्थापित किया. उन्होंने राशिफल को केवल पारंपरिक भविष्यवाणी तक सीमित न रखते हुए उसे आज की युवा सोच, करियर कन्फ्यूजन, रिलेशनशिप डायनामिक्स और रियल-लाइफ डिसीजन मेकिंग से जोड़ा.

यही कारण है कि उनका कंटेंट केवल जानकारी नहीं देता, बल्कि यूजर्स को यह महसूस कराता है कि ज्योतिष उनकी लाइफ से सीधे जुड़ा हुआ है,चाहे वह करियर का चुनाव हो, रिश्तों की समझ हो या सही समय पर सही कदम उठाने का फैसला.

उद्देश्य

हृदेश कुमार सिंह के अनुसार, ज्योतिष का मूल उद्देश्य व्यक्ति को सही समय की समझ देकर बेहतर और संतुलित निर्णय लेने में मदद करना है, न कि भय या भाग्यवाद फैलाना. वे ज्योतिष को एक ऐसे बौद्धिक और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के रूप में देखते हैं, जो जीवन की अनिश्चितताओं को समझने, अवसरों को पहचानने और चुनौतियों के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा देता है. यह केवल भविष्य बताने तक सीमित नहीं, बल्कि निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करता है.

उनका दृष्टिकोण विभिन्न आध्यात्मिक परंपराओं की मूल भावना से जुड़ा है, श्रीमद्भगवद्गीता का कर्म सिद्धांत, सूफी संत रूमी की आत्म-खोज, बाइबल और कुरान का विश्वास व धैर्य, तथा भगवान बुद्ध का संतुलन और जागरूकता का मार्ग. ज्योतिष इन मूल्यों को जीवन में Practical रूप से लागू करने की समझ देता है.

उनके अनुसार, चाहे करियर, रिश्ते, व्यापार या जीवन का कोई भी संघर्ष हो, ज्योतिष व्यक्ति को स्थिति समझने और सही दिशा में आगे बढ़ने में मदद करता है. इसका सही उपयोग व्यक्ति को निर्भर नहीं, बल्कि आत्मविश्वासी और निर्णय लेने में सक्षम बनाता है.

अन्य रुचियां

फिल्मों की गहराई को समझना, संगीत की भावनात्मक ताकत, साहित्य, राजनीति और बाजार की समझ, पर्यावरण, कृषि, ग्राम्य विकास साथ ही यात्राओं से मिले अनुभव, ये सभी उनके विचारों और लेखन को एक अलग दृष्टि देते हैं. यही वजह है कि उनका काम केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों को सोचने और समझने के लिए प्रेरित करता है.

 
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