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घर पर ऐसे तैयार करें ऑर्गेनिक लिक्विड फर्टीलाइजर, जान लें आसान तरीका

Organic Liquid Fertilizer: घर पर वर्मीवॉश ऑर्गेनिक लिक्विड फर्टीलाइजर बनाना बेहद आसान है. सिंपल तरीके से तैयार यह नेचुरल लिक्विड पौधों की ग्रोथ बढ़ाकर उन्हें बीमारियों से दूर रखता है.

Organic Liquid Fertilizer:  अगर आप होम गार्डनिंग के शौकीन हैं या अपने खेत में केमिकल-फ्री खेती करना चाहते हैं. तो यह कमाल का ऑर्गेनिक लिक्विड फर्टीलाइजर आपके बहुत काम आने वाला है. इसे वर्मीवॉश कहते हैं जो केंचुओं और ऑर्गेनिक वेस्ट के मेल से तैयार होने वाला एक बेहद असरदार न्यूट्रिएंट-रिच लिक्विड है. 

आजकल लोग पौधों की अच्छी सेहत के लिए बाजार के महंगे और केमिकल वाले प्रोडक्ट्स की जगह घर पर बने नेचुरल ऑप्शंस को ज्यादा पसंद कर रहे हैं. इस लिक्विड खाद को बनाने का तरीका बेहद आसान है और इसके लिए आपको किसी तामझाम की जरूरत नहीं पड़ती है. यह लिक्विड आपके घर के पौधों को एकदम फ्रेश और बीमारियों से पूरी तरह सुरक्षित रखता है.

वर्मीवॉश लिक्विड बनाने का सबसे सिंपल तरीका

इस बेहतरीन लिक्विड फर्टीलाइजर को घर पर तैयार करने के लिए आपको एक प्लास्टिक की बड़ी बाल्टी या ड्रम की जरूरत होगी. जिसके नीचे एक छोटी टोंटी या टैप लगा हो. सबसे पहले बाल्टी के निचले हिस्से में थोड़ी गिट्टी या ईंट के टुकड़ों की एक लेयर बिछाएं फिर उसके ऊपर थोड़ी मोटी रेत डालें. इसके बाद इसमें केंचुओं का पसंदीदा खाना जैसे आधा सड़ा हुआ पुराना गोबर, सूखी पत्तियां और किचन का वेस्ट डाल दें. 

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अब इसमें करीब एक से डेढ़ हजार केंचुए छोड़ दें और हल्का पानी छिड़क कर इसे नमी दें. इसके ठीक ऊपर एक छोटा बर्तन टांग दें जिसमें छोटा छेद हो जिससे पानी बूंद-बूंद करके नीचे गिरता रहे. केंचुए जब इस वेस्ट को खाएंगे. तो पानी छनकर नीचे आएगा और टोंटी से जो लिक्विड निकलेगा वही आपका शुद्ध वर्मीवॉश है.

पौधों के लिए वरदान है यह खाद

यह नेचुरल लिक्विड न्यूट्रिएंट्स, एंजाइम्स और अच्छे बैक्टीरिया का खजाना है. जो पौधों की ग्रोथ को एकदम बूस्ट कर देता है. इसे सीधे पौधों में डालने के बजाय हमेशा पानी में मिलाकर इस्तेमाल करना चाहिए, जिसके लिए एक भाग वर्मीवॉश में दस भाग पानी मिलाना एकदम परफेक्ट रहता है. इस मिक्सचर को आप सुबह या शाम के वक्त पौधों की पत्तियों पर स्प्रे कर सकते हैं या सीधे जड़ों में डाल सकते हैं, जिससे पौधों में कीड़े नहीं लगते और फूल-फल भी बहुत अच्छे आते हैं. 

इस्तेमाल करते वक्त रखें ये सावधानियां

इसे बनाते समय बस यह ध्यान रखें कि बाल्टी में कभी भी ताजा या गर्म गोबर न डालें और न ही कोई प्लास्टिक या केमिकल वाली चीज जाने दें. इसे हमेशा किसी ठंडी और छायादार जगह पर ही रखें जिससे केंचुए सुरक्षित रहें और आपको रेगुलर बेहतरीन खाद मिलती रहे.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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