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Onion Storage Tips: प्याज को ऐसे स्टोर करें किसान, नहीं पड़ेगी कोल्ड स्टोरेज की जरूरत

प्याज को स्टोर करने से पहले उसे अच्छी तरह सुखना सबसे जरूरी काम है. फसल निकलने के बाद प्याज को 2 से 3 दिन तक शानदार और हवादार जगह पर फैला कर रखना चाहिए, इससे इसकी बाहरी परत सूख जाती है.

Onion Storage Tips: हमारे देश के कई इलाकों में प्याज की खेती किसानों के लिए अच्छी कमाई का जरिया बन रही है. लेकिन फसल तैयार होने के बाद सबसे बड़ी समस्या उसे लंबे समय तक सुरक्षित रखने की होती है. कई बार सही तरीके से स्टोरेज न होने के कारण प्याज जल्दी सड़ने लगते हैं. अंकुरण निकल जाते हैं या वजन कम हो जाता है, इससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे में जानकारी के अनुसार अगर किसान कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें तो बिना महंगे कोल्ड स्टोरेज के भी प्याज को कई महीनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि प्याज को किसान बिना कोल्ड स्टोरेज के भी कैसे स्टोर कर सकते हैं. 

ऐसे प्याज स्टोर कर सकते हैं किसान 

जानकारी के अनुसार प्याज को स्टोर करने से पहले उसे अच्छी तरह सुखना सबसे जरूरी काम है. फसल निकलने के बाद प्याज को 2 से 3 दिन तक शानदार और हवादार जगह पर फैला कर रखना चाहिए, इससे इसकी बाहरी परत सूख जाती है और एक्स्ट्रा नमी निकल जाती है. अगर बिना सुखाए प्याज को स्टोर कर दिया जाए तो उसमें फफूंद लगने और सड़ने का खतरा काफी बढ़ जाता है. पहाड़ी इलाकों में किसान अक्सर बरामदे, टिन शेड या खुले छायादार स्थान पर प्याज सुखाते हैं. 

प्याज को नमी से बचाना सबसे जरूरी 

एक्सपर्ट्स के अनुसार प्याज खराब होने की सबसे बड़ी वजह नमी होती है. उत्तराखंड जैसे पहाड़ी इलाकों में बारिश और कोहरे की वजह से हवा में सीलन ज्यादा रहती है, इसलिए स्टोर करने की जगह सुखी और साफ होनी चाहिए. किसान प्याज को सीधे जमीन पर रखने के बजाय लकड़ी के तख्तों, बांस के मचान या जालीदार प्लेटफार्म पर रखें, ताकि नीचे से हवा आती रहे और नमी  न जमे. प्याज को कभी भी प्लास्टिक बंद थेली में नहीं रखना चाहिए, इससे अंदर गर्मी और नमी बढ़ती है और प्याज जल्दी सड़ने लगते हैं. इसके बजाय बांस की टोकरियां, जूट की बोरियां, लकड़ी के क्रेट या जालीदार बैग ज्यादा फायदेमंद माने जाते हैं, क्योंकि इनमें हवा का प्रभाव बना रहता है. 

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प्याज स्टोर करने का पारंपरिक तरीका आज भी कारगर 

पहाड़ों में प्याज को सुरक्षित रखने का एक पुराना तरीका आज भी काफी लोकप्रिय है. किसान प्याज की पत्तियों को छोटी की तरह गूंथ कर गुच्छे बना देते हैं और उन्हें छत, बरामदे या हवादार कमरे में लटका देते हैं. इससे प्याज चारों तरफ से हवा में रहता है और जमीन के कांटेक्ट में नहीं आता जिससे सड़न का खतरा बहुत कम हो जाता है. जरूरत पड़ने पर आसानी से प्याज निकाला भी जा सकता है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि स्टोर रूम में हवा का आना जाना बहुत जरूरी है. बंद और घुटन वाले कमरे में प्याज जल्दी खराब हो जाता है, इसलिए खिड़की वाले कमरे, खुले बरामदे या बांस के मचान प्याज के लिए सबसे बेहतर माने जाते हैं. अच्छी वेंटिलेशन होने से प्याज के आसपास नमी जमा नहीं होती और उसका वजन और क्वालिटी लंबे समय तक बनी रहती है.

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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