Cosmetic Plants Farming Tips : एलोवेरा ही नहीं ये भी हैं कॉस्मेटिक प्लांट, खेती कर कमा सकते हैं लाखों
Cosmetic Plants Farming Tips : इन पौधों का इस्तेमाल ब्यूटी प्रोडक्ट्स, आयुर्वेदिक दवाइयों, हर्बल तेल, फेस पाउडर, लिपस्टिक, हेयर कलर, परफ्यूम और कई तरह के कॉस्मेटिक सामान बनाने में किया जाता है.

Cosmetic Plants Farming Tips : हर्बल और कॉस्मेटिक इंडस्ट्री के तेजी से बढ़ने के बाद औषधीय और ब्यूटी प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल होने वाले पौधों की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा बनती जा रही है. आज बाजार में एलोवेरा ही नहीं बल्कि कई अन्य कॉस्मेटिक प्लांट की मांग भी तेजी से बढ़ रही है. इन पौधों का इस्तेमाल ब्यूटी प्रोडक्ट्स, आयुर्वेदिक दवाइयों, हर्बल तेल, फेस पाउडर, लिपस्टिक, हेयर कलर, परफ्यूम और कई तरह के कॉस्मेटिक सामान बनाने में किया जाता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि हर्बल प्रोडक्ट्स का कारोबार देश में तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले समय में इसकी मांग और ज्यादा बढ़ सकती है. ऐसे में किसान अगर पारंपरिक खेती के साथ इन कॉस्मेटिक और औषधीय पौधों की खेती करें तो अच्छी कमाई कर सकते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं एलोवेरा ही नहीं और कौन से कॉस्मेटिक प्लांट भी हैं, जिनकी खेती कर लाखों कमा सकते हैं.
1. सिंदूर का पौधा - आजकल बाजार में मिलने वाले कई सिंदूर में केमिकल मिलाए जाते हैं, जिससे स्किन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. ऐसे में प्राकृतिक सिंदूर की मांग तेजी से बढ़ रही है. विशेषज्ञों के अनुसार, रक्तबीज या कुमकुम ट्री नाम का पौधा पूरी तरह प्राकृतिक सिंदूर बनाने में इस्तेमाल होता है. इसके बीजों से गहरा लाल रंग निकलता है, जिसका यूज सिंदूर, लिपस्टिक, फेस पाउडर और कपड़ों को रंगने में किया जाता है. यह पौधा एक बार लगाने के बाद कई वर्षों तक प्रोडक्शन देता है. करीब तीन साल में इसमें फल आने लगते हैं और एक पौधे से डेढ़ किलो तक बीज मिल सकते हैं. इसकी खेती कम लागत में आसानी से की जा सकती है.
2. मेहंदी की खेती - भारत में मेहंदी का इस्तेमाल शादी, त्योहार और ब्यूटी प्रोडक्ट्स में बड़े स्तर पर होता है. बालों को रंगने से लेकर हाथों की सजावट तक इसकी मांग हमेशा बनी रहती है. राजस्थान का पाली जिला सोजत की मेहंदी के लिए दुनियाभर में मशहूर है. यहां बड़े स्तर पर मेहंदी की खेती और प्रोसेसिंग की जाती है. मेहंदी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे कम पानी और कम उपजाऊ जमीन में भी उगाया जा सकता है. एक बार पौधा लगाने के बाद यह 20 से 30 साल तक प्रोडक्शन देता रहता है.किसान इसकी सूखी पत्तियों का पाउडर बनाकर भी बेच सकते हैं, जिससे ज्यादा मुनाफा मिलता है.
3. केवड़ा की खेती - केवड़ा एक ऐसा पौधा है जिसका यूज परफ्यूम, साबुन, हेयर ऑयल, लोशन और कई खाद्य पदार्थों में किया जाता है. इसकी खुशबू की वजह से बाजार में इसकी काफी मांग रहती है. केवड़ा की खेती खासतौर पर नदी, तालाब या ज्यादा नमी वाले क्षेत्रों में अच्छी होती है. इसकी खेती में ज्यादा मेहनत नहीं लगती और खरपतवार भी कम उगते हैं. इसके फूलों और पत्तियों से कई तरह के प्रोडक्ट तैयार किए जाते हैं. इतना ही नहीं, इसकी पत्तियों से चटाई और टोकरी भी बनाई जाती है.
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4. लाख की खेती - लाख एक प्राकृतिक रेजिन है जिसका इस्तेमाल पेंट, कॉस्मेटिक, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान और फूड इंडस्ट्री में किया जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, किसान एक एकड़ से लाखों रुपये तक की कमाई कर सकते हैं. लाख की खेती पलाश, बेर और कुसुम जैसे पेड़ों पर की जाती है. इसकी मांग बाजार में लगातार बनी रहती है.
5. अश्वगंधा और तुलसी की खेती - अश्वगंधा को आयुर्वेद में बेहद जरूरी औषधीय पौधा माना जाता है. इसका इस्तेमाल दवाइयों, हेल्थ सप्लीमेंट और हर्बल प्रोडक्ट्स में होता है. यह पौधा कम पानी में भी अच्छी तरह बढ़ता है और लगभग 5 से 6 महीने में तैयार हो जाता है.वहीं तुलसी की मांग भी घरेलू यूज से लेकर आयुर्वेदिक उद्योग तक बनी रहती है. तुलसी से तेल, दवाइयां और हर्बल प्रोडक्ट तैयार किए जाते हैं.
6. सूरजमुखी की खेती - सूरजमुखी का तेल सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है. इसका इस्तेमाल स्किन केयर प्रोडक्ट्स, मसाज ऑयल और साबुन बनाने में भी किया जाता है. इसके बीज पशुओं और पक्षियों के चारे के रूप में भी इस्तेमाल होते हैं. भारत का मौसम सूरजमुखी की खेती के लिए काफी अच्छी मानी जाती है.
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