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किचन गार्डन में लग जाएगी कुंदरू की बेल, एक्सपर्ट के इन तरीकों से घर में होगी छप्परफाड़ पैदावार

Kundru Growing Tips: घर के किचन गार्डन या गमले में कुंदरू की हरी-भरी बेल उगाना बेहद आसान है.इन तरीकों को अपनाकर आप बिना किसी खास मेहनत के घर पर ही कुंदरू की एकदम ताजी पैदावार पा सकते हैं.

Kundru Growing Tips: अगर किचन गार्डन में ऐसी सब्जी लगानी है जो कम देखभाल में लंबे समय तक फल देती रहे तो कुंदरू एक शानदार ऑप्शन हो सकती है. इसकी बेल तेजी से फैलती है और एक बार अच्छी तरह तैयार हो जाए. तो कई महीनों तक लगातार ताजी सब्जियां मिलती रहती हैं. यही वजह है कि अब शहरों में रहने वाले लोग भी छत, आंगन और छोटे बगीचों में इसे उगा रहे हैं. 

सही मिट्टी, धूप और समय पर सिंचाई का ध्यान रखा जाए. तो कुंदरू की बेल तेजी से बढ़ती है और भरपूर फल देती है. बाजार में इसकी मांग भी अच्छी रहती है. इसलिए घरेलू जरूरत पूरी करने के साथ अतिरिक्त उत्पादन से कमाई का मौका भी मिल सकता है. थोड़ी सी योजना और सही देखभाल से आपका किचन गार्डन सालभर हरा-भरा बना रह सकता है.

ऐसे लगाएं कुंदरू की बेल

कुंदरू की बेल लगाने के लिए ऐसी जगह चुननी चाहिए जहां रोजाना कम से कम 6 से 7 घंटे धूप मिलती हो. इसकी अच्छी बढ़वार के लिए दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त रहती है. जिसमें पानी रुकने की समस्या न हो. पौधा लगाने से पहले मिट्टी में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या कंपोस्ट मिला देने से पौधे को जरूरी पोषण मिल जाता है.

तेजी से बढ़ेगी और खूब फल देगी

कुंदरू को बीज से लगाने की बजाय बेल की कटिंग से लगाना ज्यादा आसान और असरदार माना जाता है. क्योंकि इससे पौधा जल्दी तैयार हो जाता है. बेल को फैलने के लिए जाली, रस्सी या लोहे का सहारा जरूर दें. इससे बेल जमीन पर नहीं फैलती, हवा का फ्लो बेहतर रहता है और फल भी सही तरीके से बड़े होते हैं. शुरुआती दिनों में नियमित सिंचाई करें लेकिन मिट्टी में ज्यादा पानी जमा न होने दें.

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इन आसान तरीकों से करें देखभाल 

कुंदरू की बेल लगाने के बाद उसकी देखभाल करना भी उतना ही जरूरी है. पौधे के आसपास उगने वाली घास को समय समय पर हटाते रहें जिससे पोषक तत्वों की पूरी मात्रा बेल को मिल सके. हर 20 से 25 दिन में जैविक खाद या वर्मी कंपोस्ट डालने से नई शाखाएं तेजी से निकलती हैं और फल भी लगातार आते रहते हैं. जब बेल बहुत ज्यादा घनी हो जाए तो सूखी और कमजोर टहनियों की हल्की छंटाई कर दें. इससे पौधे में नई बढ़वार होती है और उत्पादन बेहतर बना रहता है. 

सिंचाई का ध्यान रखें

गर्मियों में मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए जरूरत के अनुसार सिंचाई करें जबकि बारिश के मौसम में एक्सट्रा पानी की निकासी का ध्यान रखें. अगर समय रहते कीट या बीमारी के लक्षण दिख जाएं तो जैविक उपाय अपनाएं. सही देखभाल के साथ एक ही कुंदरू की बेल लंबे समय तक पूरे परिवार के लिए ताजी और पौष्टिक सब्जी देती रहती है.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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