'4-5 महीने में सभी दोषियों को...', राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर बोली VHP, चंपत राय को लेकर जानें क्या कहा?
राम मंदिर में लूट को लेकर देशभर में बवाल मचा है. इस पूरे मामले पर विश्व हिंदू परिषद के नेता आलोक कुमार ने अब खुलकर अपनी बात रखी है. चंपत राय को लेकर उन्होंने VHP का स्टैंड क्लीयर किया है.

राम मंदिर में लूट मामले को लेकर देशभर में बवाल मचा है. विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने एक इंटरव्यू में इस विवाद को भक्तों के लिए गहरी भावनात्मक चोट बताया. साथ ही इस बात को भी खारिज कर दिया कि राम मंदिर ट्रस्ट के कामकाज के लिए VHP को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए.
आलोक कुमार ने कहा, "जो कुछ हुआ है, वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे दुनिया भर के हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं. हम दुखी हैं, हर कोई दुखी है और इसके लिए कोई बहाना बनाने या इसका बचाव करने का सवाल ही नहीं उठता." उन्होंने इस पूरे मामले को VHP, RSS और मोदी सरकार से जोड़ने की कोशिशों को भी खारिज कर दिया है.
VHP के अंतर्राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को लेकर कुमार ने कहा कि ट्रस्ट में उनकी भूमिका को VHP का प्रतिनिधित्व करने जैसा नहीं माना जाना चाहिए. VHP प्रमुख ने कहा, "मैं इस बात से इनकार नहीं कर रहा हूं कि चंपत राय जी वरिष्ठ पदाधिकारी रहे हैं और अभी VHP के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं लेकिन हमने उन्हें उस पद के लिए नॉमिनेट नहीं किया था. हमने उनकी सिफारिश नहीं की थी. वह VHP का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं."
चंपत राय से दूरी को लेकर क्या बोले आलोक कुमार
जब उनसे पूछा गया कि इतनी छिछालेदर होने के बाद भी VHP ने चंपत राय से सार्वजनिक रूप से दूरी क्यों नहीं बनाई, तो कुमार ने कहा कि आप चाहते हैं कि मैं जांच के नतीजे आए बिना ही आज उन्हें बर्खास्त कर दूं? उन्होंने आगे कहा कि अभी तक किसी ने भी चंपत राय पर ऐसी लूट में शामिल होने, उकसाने या उसकी योजना बनाने का आरोप नहीं लगाया है.
दोषी लोगों को जेल होनी चाहिए- आलोक कुमार
इंटरव्यू के दौरान आलोक कुमार ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि जांच में किसी को भी नहीं बख्शा जाना चाहिए, चाहे उनका ओहदा कुछ भी हो. उन्होंने कहा, "हमने ही सबसे पहले FIR दर्ज करने, सीनियर अधिकारियों से जांच कराने, फास्ट-ट्रैक कोर्ट और दोषियों को सज़ा दिलाने की मांग की थी." उन्होंने आगे कहा कि दोषियों को सजा मिलनी चाहिए और यह पूरी प्रक्रिया चार से पांच महीनों में पूरी हो जानी चाहिए ताकि दोषी लोगों को जेल जाते देखकर हिंदू समाज को कुछ संतुष्टि मिल सके.
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