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नौकरी छोड़िए, फूलों की खेती अपनाइए, जरबेरा से हर महीने जेब में आएंगे 30 हजार

Gerbera Farming Tips: नौकरी के छोड़ खुद कुछ अलग करना है जरबेरा फूलों की खेती एक बेहतरीन और मुनाफेदार जरिया है. इसकी सालभर रहने वाली भारी डिमांड के चलते कमाई की पूरी गारंटी रहती है.

Gerbera Farming Tips: आजकल के दौर में नौकरी के पीछे भागने के बजाय खुद का कोई नया बिजनेस शुरू करना एक बेहतरीन फैसला साबित हो सकता है. अगर आप भी कम लागत में किसी ऐसे काम की तलाश में हैं जो हर महीने आपको पक्की कमाई दे सके. तो फूलों की खेती आपके लिए एक बढ़िया ऑप्शन है. पारंपरिक खेती को छोड़कर अब लोग नए तरीके से फूलों की खेती अपना रहे हैं और इसमें जरबेरा के फूलों की डिमांड मार्केट में सबसे ज्यादा है.

शादियों का सीजन हो, कोई बड़ा इवेंट या फिर घरों की सजावट, जरबेरा के खूबसूरत फूलों की मांग सालभर बनी रहती है. सबसे अच्छी बात यह है कि इस बिजनेस को शुरू करने के लिए सरकार भी आपकी पूरी मदद कर रही है. अगर आप इस नई तकनीक के साथ जरबेरा की खेती शुरू करते हैं. तो बिना किसी रिस्क के हर महीने आराम से 30 हजार की कमाई कर सकते हैं.

सरकारी मदद से ऐसे लगाएं मुफ्त में ग्रीन नेट हाउस

जरबेरा के फूलों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें बहुत ज्यादा कड़क धूप या खुले आसमान के नीचे नहीं उगाया जाता. इसके लिए एक कंट्रोल्ड माहौल की जरूरत होती है.  जो ग्रीन नेट हाउस के जरिए तैयार किया जाता है. इस सेटअप को लगाने में आने वाले खर्च को लेकर आपको बिल्कुल भी परेशान होने की जरूरत नहीं है. सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के तहत किसानों और युवाओं को ग्रीन नेट हाउस लगाने के लिए 100% तक की सब्सिडी दी जा रही है. 

इसका मतलब है कि आपको इस पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अपनी जेब से एक भी पैसा नहीं खर्च करना पड़ेगा. इस योजना का लाभ उठाने के लिए आप अपने नजदीकी जिला उद्यान विभाग में जाकर आवेदन कर सकते हैं. वहां से मंजूरी मिलते ही आपके खेत या जमीन पर सरकारी खर्चे पर ग्रीन नेट हाउस का पूरा सेटअप मुफ्त में तैयार कर दिया जाता है.

यह भी पढ़ें: क्या फार्म हाउस में कर सकते हैं मखाने की खेती, 1 एकड़ में कितना होगा मुनाफा?

पौधों की देखरेख के टिप्स

ग्रीन नेट हाउस तैयार होने के बाद अगला कदम आता है जरबेरा के पौधे लगाना और उनकी सही तरीके से देखभाल करना. इस प्रोटेक्टेड स्ट्रक्चर के अंदर पौधों को जरूरत के हिसाब से पानी देने के लिए ड्रिप इरिगेशन यानी टपक सिंचाई सिस्टम लगाया जाता है, जिससे पानी की काफी बचत होती है. जरबेरा के पौधों में नियमित रूप से खाद और कीटनाशकों का छिड़काव करना बेहद जरूरी है ताकि फूलों की क्वालिटी एकदम टॉप-क्लास रहे.

हर महीने कमाएं 30 हजार

एक बार जब पौधे पूरी तरह तैयार हो जाते हैं, तो उनमें से लगातार खूबसूरत और रंग-बिरंगे फूल निकलने लगते हैं. इन फूलों को कली की हालत में ही काटकर सीधे लोकल मार्केट या बड़े शहरों की मंडियों में सप्लाई किया जा सकता है. मांग तेज होने की वजह से ये फूल हाथों-हाथ बिक जाते हैं. जिससे सारे खर्चे निकालने के बाद भी आप हर महीने 30 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा आसानी से कमा सकते हैं.

यह भी पढ़ें: मानसून के सीजन में घर की छत पर ही उगा सकते हैं ये सब्जियां, दो से तीन में ही हो जाएंगी तैयार

About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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