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कैसे बनाई जाती है फ्रोजन मटर, इसे बेचकर कितना पैसा कमा सकते हैं किसान?

Frozen Peas: फ्रोजन मटर का बिजनेस आज के समय में किसानों के लिए प्रॉफिटेबल कमाई का जरिया बन चुका है. अगर आप ट्रेडिशनल खेती से हटकर कुछ नया और मॉडर्न ट्राई करना चाहते हैं तो ये है बढ़िया ऑप्शन.

Frozen Peas:  फ्रोजन मटर का बिजनेस आजकल के दौर में किसानों के लिए किसी जैकपॉट से कम नहीं है क्योंकि ये सिर्फ खेती नहीं बल्कि स्मार्ट प्रोसेसिंग का खेल है. आज के बिजी लाइफस्टाइल में लोग ताजी मटर छीलने के बजाय पैकेट खोलकर सीधे कुकिंग करना पसंद करते हैं और यहीं से कमाई का असली रास्ता खुलता है. अगर आप सिर्फ मंडी के भरोसे रहते हैं तो अक्सर दाम गिरने का डर रहता है.

लेकिन फ्रोजन मटर आपको साल भर मार्केट का राजा बनाए रखती है. यह एक ऐसा मॉडर्न एग्रो-बिजनेस आइडिया है जो कम रिस्क और हाई रिटर्न की गारंटी देता है. इसमें आपको बस सही समय पर फसल की हार्वेस्टिंग करनी है और उसे मॉडर्न तरीके से प्रिजर्व करना है ताकि उसकी ताजगी और मिठास लॉक हो जाए. जान लें कितना हो सकता है मुनाफा.

फ्रोजन मटर बनाने का प्रोसेस

फ्रोजन मटर तैयार करने की शुरुआत बेहतरीन क्वालिटी की मटर चुनने से होती है. सबसे पहले मटर को छीलकर उनके साइज के हिसाब से ग्रेडिंग की जाती है ताकि पैकेट में एक जैसे दाने दिखें. इसके बाद सबसे जरूरी स्टेप आता है जिसे ब्लांचिंग कहते हैं. इसमें मटर को कुछ मिनट के लिए गरम पानी में उबाला जाता है और तुरंत एकदम ठंडे पानी में डाल दिया जाता है.

  • ब्लांचिंग से मटर का नेचुरल हरा रंग बना रहता है और इसके एंजाइम्स मर जाते हैं जिससे ये खराब नहीं होती.
  • मटर को सुखाने के बाद इसे -18 डिग्री या उससे कम तापमान पर इंडिविजुअल क्विक फ्रीजिंग (IQF) तकनीक से फ्रीज किया जाता है.

यह भी पढ़ें: Kitchen Gardening: किचन गार्डन में कैसे करें काली मिर्च की खेती, पहली फसल में कितनी होगी कमाई?

लागत और जरूरी मशीनरी सेटअप

इस बिजनेस को आप छोटे लेवल से लेकर बड़े स्केल तक शुरू कर सकते हैं. छोटे लेवल पर आपको मटर छीलने वाली मशीन, एक ब्लांचिंग यूनिट और डीप फ्रीजर की जरूरत होगी. अगर आप बड़े लेवल पर जा रहे हैं तो ऑटोमेटिक प्लांट की जरूरत पड़ेगी जिसकी कीमत आपकी कैपेसिटी पर डिपेंड करती है. इसमें रॉ मटेरियल की कॉस्ट सीजन के हिसाब से कम रहती है जो बाद में वैल्यू एडिशन के कारण बढ़ जाती है.

  • शुरुआत में आप 2 से 5 लाख रुपये के इन्वेस्टमेंट के साथ एक डिसेंट प्रोसेसिंग यूनिट लगा सकते हैं.
  • पैकेजिंग के लिए अट्रैक्टिव ब्रांडिंग और फूड लाइसेंस (FSSAI) लेना बेहद जरूरी है ताकि आप इसे मॉल्स और शहरों में सप्लाई कर सकें.

इतनी हो सकती है कमाई

मुनाफे की बात करें तो फ्रोजन मटर में मार्जिन काफी तगड़ा है क्योंकि सीजन में मटर 15-20 रुपये किलो मिल जाती है. जबकि फ्रोजन होने के बाद वही मटर मार्केट में 150 से 200 रुपये प्रति किलो तक बिकती है. एक किसान अगर सीधे प्रोसेसिंग यूनिट डालकर अपना ब्रांड लॉन्च करता है. तो वह बिचौलियों को खत्म करके अपनी इनकम को 3 से 4 गुना तक बढ़ा सकता है.

  • ऑफ-सीजन में जब ताजी मटर मार्केट से गायब होती है, तब फ्रोजन मटर की डिमांड और रेट दोनों पीक पर होते हैं.
  • अगर आप रोज 100 किलो मटर भी प्रोसेस करते हैं, तो महीने के अंत में सारे खर्चे निकालकर लाखों का टर्नओवर आसानी से अचीव किया जा सकता है.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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