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खाली खेतों में बरसेगा पैसा, गर्मी में मॉडर्न तरीके से लगाएं यह फसल, होगा मोटा मुनाफा

Groundnut Cultivation Tips: खाली खेतों में मूंगफली की खेती किसानों के लिए फायदेमेंद साबित हो रही है. बेहद कम दिन में तैयार होने वाली यह मॉडर्न नकदी फसल कम पानी और कम मेहनत में मोटा मुनाफा देती है.

Ground Nut Cultivation Tips: गेहूं और चने की कटाई के बाद जब ज्यादातर किसानों के खेत खाली पड़े रहते हैं. तब मूंगफली की खेती एक समर जैकपॉट साबित हो सकती है. अप्रैल से जून के बीच का यह समय मूंगफली की बुवाई के लिए सबसे सुनहरा मौका है, क्योंकि यह कम समय में तैयार होकर बंपर मुनाफा देने वाली एक दमदार नकदी फसल है. मॉडर्न फार्मिंग के नजरिए से देखें तो जायद सीजन की यह फसल कम पानी और कम देखरेख में भी किसानों की जेब भर देती है. 

इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह महज 75 से 110 दिनों में पककर तैयार हो जाती है, जिससे खरीफ की अगली फसल से पहले ही किसान के हाथ में मोटी कमाई आ जाती है. अगर आप भी अपने खाली खेतों को कमाई का जरिया बनाना चाहते हैं, तो मूंगफली की एडवांस वैरायटीज आपके लिए मुनाफे का नया रास्ता खोल सकती हैं.

क्या है बुवाई का सही तरीका?

एक्सपर्ट्स की मानें तो गर्मियों के इस छोटे से गैप में जेजीएन-3 और जेजीएन-23 जैसी उन्नत किस्में सबसे ज्यादा कामयाब रहती हैं. ये वैरायटी न सिर्फ कम समय में तैयार होती हैं, बल्कि इनकी पैदावार भी 25 से 28 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक मिल सकती है.

  • बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह सफाई करें और एक एकड़ के लिए करीब 7 से 8 किलो बीज का इस्तेमाल करें.
  • हल्की दोमट या रेतीली मिट्टी इस फसल के लिए बेस्ट है क्योंकि इसमें जल निकासी बेहतर होती है और फलियों का विकास अच्छा होता है.

सही समय पर की गई प्लानिंग आपको पारंपरिक फसलों के मुकाबले कहीं ज्यादा रिटर्न दिला सकती है. क्योंकि गर्मी की मूंगफली की क्वालिटी बाजार में बहुत पसंद की जाती है.

यह भी पढ़ें: अब सिर्फ फसलों के भरोसे न रहें किसान, मछली पालन से एक साल में कमाएं 4 लाख

खाद और सिंचाई का ध्यान रखें

मूंगफली की खेती में सिंचाई और पोषण का सही तालमेल ही बंपर पैदावार की असली चाबी है. चूंकि यह गर्मी की फसल है, इसलिए मिट्टी और तापमान के हिसाब से 4 से 5 बार पानी देना जरूरी होता है ताकि नमी बनी रहे.

  • बेहतर रिजल्ट के लिए देसी खाद के साथ डीएपी (DAP) का संतुलित इस्तेमाल करें, जिससे दानों की चमक और वजन दोनों बढ़ते हैं.
  • यह फसल मिट्टी में नाइट्रोजन फिक्स करती है, जिससे आपकी जमीन की उपजाऊ शक्ति अगली फसल के लिए और भी बढ़ जाती है.

स्मार्ट किसान ड्रिप या स्प्रिंकलर सिस्टम का इस्तेमाल करके पानी की बचत के साथ-साथ पौधों को सीधा पोषण दे सकते हैं, जो लागत घटाने और मुनाफा बढ़ाने का एक मॉडर्न तरीका है.

बाजार में तगड़ी डिमांड 

मूंगफली सिर्फ एक फसल नहीं. बल्कि कमाई का एक पूरा पैकेज है क्योंकि इसके दाने, तेल और खली, तीनों की मार्केट में 12 महीने भारी डिमांड रहती है. गर्मियों में ताजी मूंगफली की आवक कम होने से किसानों को मंडी में काफी अच्छे और स्थिर भाव मिल जाते हैं.

  • खरीफ की बुवाई यानी जून-जुलाई से पहले ही यह फसल कट जाती है. जिससे एक ही साल में एक ही जमीन से तीन फसलें लेना मुमकिन हो जाता है.
  • मक्का या अन्य फसलों की तुलना में इसमें रिस्क कम और प्रॉफिट मार्जिन काफी ज्यादा होता है, जो इसे छोटे किसानों के लिए भी सुरक्षित बनाता है.

अपनी लागत और समय का सही इस्तेमाल करके आप खाली पड़े खेतों से न केवल पैसा कमा सकते हैं, बल्कि खेती को एक प्रोफेशनल बिजनेस की तरह आगे बढ़ा सकते हैं.

यह भी पढ़ें: गर्मी के सीजन की ये 5 फसलें बदल देंगी आपकी किस्मत, कम दिनों में मिलेगी तगड़ी पैदावार

About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

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