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एक ही खर्च में डबल कमाई! मछली पालन के साथ बिना मिट्टी के सब्जियां उगाने का ये है जादुई फॉर्मूला

Farming Tips: एक ही खर्च में डबल कमाई का धांसू फॉर्मूला है एक्वापोनिक्स फार्मिंग. इसमें बिना मिट्टी के, पानी में नीचे मछलियां पलती हैं और ऊपर सब्जियां उगती हैं.

Farming Tips: अगर आप खेती में कुछ नया ट्राई करना चाहते हैं और चाहते हैं कि एक ही जगह से दो तरह की कमाई हो तो एक्वापोनिक फार्मिंग आपके लिए बेहतरीन ऑप्शन हो सकती है. यह एक मॉडर्न फार्मिंग तकनीक है. जिसमें मछली पालन और बिना मिट्टी के सब्जियों की खेती साथ साथ की जाती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि दोनों एक दूसरे को सपोर्ट करते हैं. मछलियों से निकलने वाले पोषक तत्व पौधों के लिए नेचुरल न्यूट्रिएंट बन जाते हैं. 

जबकि पौधे उसी पानी को फिल्टर करके दोबारा मछलियों के टैंक में भेज देते हैं. इससे पानी की खपत काफी कम होती है और केमिकल फर्टिलाइजर की जरूरत भी लगभग खत्म हो जाती है. कम जमीन वाले किसान, शहरी गार्डनिंग करने वाले लोग और नई तकनीक अपनाने वाले युवा किसान तेजी से इस मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं. जान लें कैसे की जाती है यह खेती

कैसे होती है एक्वापोनिक फार्मिंग?

इस तरह खेती शुरू करने के लिए आपको  एक बढ़िया फिश टैंक, पौधों को टिकाने के लिए ग्रो-बेड और पानी को सर्कुलेट करने के लिए एक पंप की जरूरत होती है. अब आप सोच रहे होंगे कि बिना मिट्टी के पौधे कैसे बढ़ेंगे? तो आपको बता दें कि टैंक में मौजूद मछलियां जो वेस्ट निकालती हैं वह पौधों के लिए ऑर्गेनिक खाद बन जाता है. इस पानी को पंप के जरिए पौधों तक पहुंचाया जाता है.

जहां पौधे उस कचरे से अपने लिए जरूरी न्यूट्रिएंट्स सोख लेते हैं. बदले में पौधे पानी को पूरी तरह फिल्टर और साफ कर देते हैं. जिसे वापस मछलियों के टैंक में भेज दिया जाता है. आजकल इस सिस्टम में सेंसर और इंटरनेट जैसी हाईटेक चीजें भी जुड़ गई हैं. जिससे आप अपने मोबाइल पर ही पानी का तापमान और ऑक्सीजन लेवल आसानी से ट्रैक कर सकते हैं.

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शुरुआती निवेश थोड़ा ज्यादा

इस तकनीक में शुरुआत में फिश टैंक, वाटर पंप, पाइपलाइन और दूसरे जरूरी इक्विपमेंट लगाने के लिए थोड़ा ज्यादा निवेश करना पड़ता है. हालांकि एक बार सिस्टम तैयार हो जाए तो ऑपरेटिंग कॉस्ट काफी कम हो जाती है. केमिकल खाद और ज्यादा पानी की जरूरत नहीं पड़ती जिससे खर्च लगातार कंट्रोल में रहता है. 

रिटर्न मिलता है शानदार

इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि किसान एक ही सेटअप से मछलियां और ताजी सब्जियां दोनों बेच सकते हैं. यानी एक साथ दो कमाई के तरीके तैयार हो जाते हैं. यह तरीका पारंपरिक खेती के मुकाबले ज्यादा प्रॉफिट दे सकता है. यही वजह है कि देश के कई किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर इस तकनीक को अपना रहे हैं.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा एबीपी न्यूज़ में कार्यरत हैं और फिलहाल टेक बीट संभाल रहे हैं. इससे पहले वह स्पोर्ट्ज़विकी और क्रिकएडिक्टर में सब एडिटर, इनशॉर्ट्स में हिंदी कंटेट स्पेशलिस्ट और ज़ी हिंदुस्तान और ज़ी राजस्थान में काम कर चुके हैं. पत्रकारिता के दौरान उन्होंने कई क्रिकेट मैच कवर किए हैं और क्रिकेट लाइव स्ट्रीमिंग भी होस्ट की है.

न्यूज़ और खेल के साथ नीलेश की दिलचस्पी गीत लेखन में भी है. पिछले साल उनके लिखे एक गीत को बॉलीवुड सिंगर अर्नब दत्ता की आवाज़ में रिलीज़ किया गया. पढ़ाई की बात करें तो उन्होंने मुरैना के अंबाह पीजी कॉलेज से बीए की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से डिजिटल जर्नलिज़्म में पीजी डिप्लोमा किया है.

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