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इन सावधानियों के साथ करें धान की खेती, अच्छी उपज के साथ होगी दमदार कमाई

धान की नर्सरी तैयार करते समय किसानों को स्वस्थ बीजों की खरीद, बीजोपचार, सिंचाई, निराई-गुड़ाई और खरपतवार नियंत्रण जैसी बातों का खास ख्याल रखना चाहिये. जलवायु और मिट्टी की जांच होना भी बेहद जरूरी है.

भारत में धान (PADDY RICE) की फसल को खरीफ सीजन (Kharif crop) की एक बेहद महत्वपूर्ण के रूप में जाना जाता है. पोषण के नजरिये से धान की फसल महत्वपूर्ण है ही,  साथ ही दुनियाभर में इसकी खपत भी अच्छी मात्रा में की जा रही है. यही कारण है कि भारत (India) समेत ज्यादातर एशियाई देश चावल/धान की खेती बड़े पैमाने पर कर रहे हैं. पिछले कुछ वर्षों में भारत की छवि चावल के एक बड़े निर्यातक के रूप में उभरकर आई है. कोरोना (Corona) महामारी के दौर में भी भारत ने करीब 50 फीसदी तक अधिक चावल उगा कर दूसरे देशों को निर्यात किया है. अकेले भारत की बात करें तो खरीफ सीजन के दौरान उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु और झारखंड में बड़े पैमाने पर धान की खेती की जाती है. इन राज्यों में किसानों को 15 मई से लेकर 15 जून तक के बीच धान की नर्सरी तैयार कर लेनी चाहिये.

जानकारी के लिए बता दें कि कृषि वैज्ञानिक कम पानी वाले इलाकों में धान की सीधी बिजाई करने की सलाह देते हैं. लेकिन,धान की स्वस्थ और गुणवत्तापूर्ण उपज लेने के लिये धान की नर्सरी तैयार करने की सलाह दी जाती है. धान की नर्सरी लगाते समय किसानों को स्वस्थ बीजों की खरीद, बीजोपचार, सिंचाई, निराई-गुड़ाई और खरपतवार नियंत्रण जैसी बातों का खास ख्याल रखना बेहद जरूरी है. विशेषज्ञों की मानें तो धान की नर्सरी के लिये जलवायु और मिट्टी की जांच होना बेहद जरूरी है. मिट्टी की गुणवत्ता के अनुसार ही अच्छे और उन्नत किस्म के बीजों का चुनाव करना चाहिये.

खेत की तैयारी
धान की नर्सरी तैयार करने के लिये सबसे पहले खेत के एक छोटे हिस्से या एक निर्धारित स्थान पर पाटा चलाकर समतल कर लें. जिससे खरपतवार नष्ट हो जायें और तैयार पौध को आसानी से निकाला जा सके. इसके बाद नर्सरी के लिये मेडें बना लें और खेत में 2-3 सेमी. ऊंचाई तक पानी भरें.

बीज शोधन/बीजों की सफाई
किसानों को सलाह दी जाती है कि अच्छी और स्वस्थ उपज के लिये बीजों की बुवाई से पहले बीज शोधन का काम करें, इससे फसल में कीटों और बीमारियों की संभावना कम हो जाती है.
बीजों को शुद्ध करने के लिए कृषि वैज्ञानिकों की सलाह अनुसार बाविस्टीन और थीरम का इस्तेमाल करें. 

पोषण प्रबंधन
नर्सरी में बुवाई से पहले खाद और उर्वरकों के प्रयोग की सलाह दी जाती है. इसके लिये सबसे पहले मिट्टी की जांच करानी चाहिये, जिससे कि मिट्टी को जरूरत के अनुसार उर्वरक दिया जा सके.यदि किसान धान की जैविक खेती कर रहे हैं तो उचित मात्रा में गोबर की सड़ी हुई खाद को खेत में मिला दें. या फिर वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार नत्रजन, फास्फोरस और पोटाश को उचित मात्रा में मिलाकर खेत में फैला दें और बीज बोये.

कीटनाशक का छिड़काव
धान की नर्सरी में बीज बोने के करीब 10-15 दिन के अंतराल पर कीटनाशक और फफूंदी नाशक छिड़काव करें. किसान चाहें तो केमिकल के स्थान पर नीम पत्तियों का घोल बनाकर नर्सरी में छिड़काव कर सकते हैं.

सिंचाई/ पानी का प्रयोग
धान की नर्सरी में यदि पानी ज्यादा हो तो पौधे गलने लगते हैं. पौधों को गलन से बचाने के लिये कड़ी धूप पड़ने पर अतिरिक्त पानी को नर्सरी से निकाल दें. इसके अलावा, पानी की कमी होने पर शाम के समय नर्सरी में हल्की सिंचाई का कार्य करें.

जानकारी के लिए बता दें कि धान की नर्सरी में उपरोक्त सभी काम करने के बाद पौध की अच्छी देखभाल करते रहें. खेत की उपलब्धता के अनुसार बीज, उर्वरक और खाद का मात्रा का प्रयोग करें। ध्यान रखें कि धान की नर्सरी लगाने के 21-25 दिनों में धान की पौध तैयार हो जाती है, जिसके बाद सावधानीपूर्वक इसकी रोपाई खेतों में कर सकते हैं.

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