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खेत में दवा के छिड़काव के लिए कैसे खरीद सकते हैं ड्रोन, जान लें पूरा प्रोसीजर

Drone For Farming: खेतों में कीटनाशक और खाद का छिड़काव करने के लिए ड्रोन खरीदने की पूरी ऑनलाइन प्रोसेस. सरकार से मिलने वाली बंपर सब्सिडी के नियम और जरूरी दस्तावेज के बारे में जान लीजिए.

Drone For Farming: खेती-किसानी को स्मार्ट और आसान बनाने के लिए ड्रोन टेक्नोलॉजी का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है. खेत में खाद और कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करने के लिए ड्रोन खरीदना अब कोई बहुत मुश्किल काम नहीं रह गया है. भारत सरकार किसानों को डिजिटल और हाई-टेक बनाने के लिए एग्रीकल्चर ड्रोन की खरीद पर बंपर सब्सिडी दे रही है. जिससे इसकी लागत काफी कम हो जाती है. 

अगर आप भी मैनुअल लेबर और पैसों की बचत करना चाहते हैं. तो जान लीजिए कैसे आप ड्रोन खरीदने और सरकारी वित्तीय मदद ले सकते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि इस मॉडर्न गैजेट को अपने खेत तक लाने के लिए आपको क्या-क्या करना होगा और इसका पूरा ऑनलाइन प्रोसेस क्या है.

एग्रीकल्चर ड्रोन ऑनलाइन अप्लाई करने प्रोसेस

खेती के लिए ड्रोन खरीदने और उस पर सरकारी सब्सिडी पाने के लिए आपको एक तय प्रोसेस को फॉलो करना होता है. सबसे पहले आपको कृषि यंत्रीकरण के ऑफिशियल पोर्टल agrimachinery.nic.in पर जाना होगा. वहां आपको फार्मर रजिस्ट्रेशन या अपनी कैटेगरी (जैसे FPO या SHG) के हिसाब से नया अकाउंट बनाना होगा. रजिस्ट्रेशन के बाद आपको अपनी पर्सनल और जमीन से जुड़ी डिटेल्स भरनी होंगी. 

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इसके बाद आपको आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक की कॉपी, जमीन के कागज और किसी भी डीजीसीए (DGCA) अप्रूव्ड वेंडर से मिला हुआ ड्रोन का कोटेशन अपलोड करना होगा. फॉर्म सबमिट करने के बाद जिला कृषि अधिकारी आपके दस्तावेजों की जांच करेंगे. मंजूरी मिलने का मैसेज आते ही आप वेंडर से ड्रोन खरीद सकते हैं जिसके बाद बिल अपलोड करते ही सब्सिडी सीधे आपके खाते में आ जाएगी.

ड्रोन खरीदने के नियम

ड्रोन खरीदने से पहले कुछ जरूरी नियमों और फायदों को जानना बेहद जरूरी है. सरकार व्यक्तिगत छोटे, सीमांत, महिला और एससी-एसटी किसानों को ड्रोन की कीमत पर 40 से 50% (अधिकतम 5 लाख रुपये तक) की सब्सिडी दे रही है, जबकि FPO और किसान कॉपरेटिव्स को 75% तक की छूट मिल सकती है. 

पात्रता और इसके बेहतरीन फायदे

ध्यान रखें कि सब्सिडी का फायदा केवल डीजीसीए (DGCA) से प्रमाणित ड्रोन मॉडल्स पर ही मिलता है और इसे उड़ाने के लिए आपके पास रिमोट पायलट सर्टिफिकेट (RPC) होना जरूरी है. इसके फायदों की बात करें तो ड्रोन से खेतों में छिड़काव करने पर पानी और दवाओं की भारी बचत होती है. तो साथ ही घंटों का काम महज कुछ ही मिनटों में पूरा हो जाता है. इससे किसान दवाओं के सीधे संपर्क में आने से बच जाते हैं जिससे उनकी सेहत भी सुरक्षित रहती है.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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