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SIP Tips: सालाना SIP चुन रहे हैं, तो पहले इन बातों का रखें ध्यान, कहीं बिगड़ न जाए गणित

Yearly SIP: अगर आप मंथली निवेश नहीं करना चाहते हैं तो उसके लिए सालान SIP का भी ऑप्शन है. पहले जान लेते हैं कि इसके लिए आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

Yearly SIP Tips: म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले लोगों के बीच SIP यानी सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान काफी पॉपुलर है. आमतौर पर SIP में हर महीने एक तय रकम निवेश की जाती है, लेकिन कुछ निवेशक सालाना SIP का ऑप्शन भी चुनते हैं. इसमें साल में एक बार बड़ी रकम निवेश की जाती है. ये तरीका उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है, जिन्हें सालाना बोनस, इंसेंटिव या किसी अन्य स्रोत से एकमुश्त रकम मिलती है.

हालांकि, सालाना SIP चुनने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए, वरना निवेश का पूरा गणित बिगड़ सकता है. तो आइये यहां आपको बताते हैं कि निवेश के पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए:

निवेश का समय है जरूरी
सालाना SIP में पूरे साल के दौरान बाजार में धीरे-धीरे पैसा लगाने के बजाय एक बार में रकम निवेश होती है. ऐसे में अगर निवेश के समय बाजार हाई लेवल पर है और बाद में गिरावट आती है, तो शुरुआती निवेश पर असर पड़ सकता है. इसके मुकाबले मासिक SIP में पैसा अलग-अलग समय पर निवेश होता है, जिससे बाजार के उतार-चढ़ाव का प्रभाव कुछ हद तक संतुलित हो सकता है.

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सालाना रकम बड़ी न हो जाए
सालाना SIP चुनते समय ये देखना जरूरी है कि एक साथ कितनी रकम निवेश करनी है. उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति की मंथली SIP 5 हजार रुपये है, तो सालाना निवेश करीब 60 हजार रुपये होगा. लेकिन एक ही बार में 60 हजार निकालने से उसके बाकी जरूरी खर्च या इमरजेंसी जरूरतों का बजट प्रभावित नहीं होना चाहिए.

बाजार की चाल देखकर फैसला न लें
सालाना SIP का मतलब ये नहीं है कि हर साल बाजार के सबसे लोएस्ट लेवल का इंतजार किया जाए. बाजार का सही समय बताना मुश्किल होता है. निवेश का फैसला अपने वित्तीय लक्ष्य, जोखिम लेने की क्षमता और निवेश की अवधि के आधार पर करना बेहतर है.

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लक्ष्य और अवधि जरूर तय करें
सालाना SIP शुरू करने से पहले ये तय करें कि पैसा किस लक्ष्य के लिए लगाया जा रहा है जैसे, बच्चों की पढ़ाई, घर खरीदना, रिटायरमेंट या कोई दूसरा लंबी अवधि का लक्ष्य. लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड पर विचार किया जा सकता है, लेकिन इनमें बाजार जोखिम भी रहता है.

इमरजेंसी फंड को न छेड़ें
सालाना निवेश के लिए ऐसी रकम का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जिसकी जरूरत अचानक पड़ सकती है. पहले पर्याप्त इमरजेंसी फंड और जरूरी खर्चों की व्यवस्था करना बेहतर है. इसके बाद बची हुई रकम को निवेश में लगाया जा सकता है.

प्रतीक्षा राणावत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में करीब 12 वर्षों का अनुभव है. इन्होंने भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मल्टीमीडिया (B.Sc - Multimedia) में ग्रेजुएशन किया है और इसके बाद जन संचार (Mass Communication) में पोस्ट ग्रेजुएशन भी किया है. अपने करियर की शुरुआत इन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, लेकिन समय के साथ लेखन में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई. वर्तमान में प्रतीक्षा बिजनेस से जुड़े विषयों के लिए लेखन करती हैं. इसके साथ- साथ ही इन्हें ट्रैवलिंग, नई चीज़ों को एक्सप्लोर करना और किताबें पढ़ने का भी शौक है.

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