घटिया फर्नीचर बेचा तो अब दुकानदार से होगी दोगुनी वसूली, कोर्ट का फैसला
ऑनलाइन खरीदारी कर मंगवई रॉकिंग चेयर में दरारें आ जाने के बाद महिला ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करवाई. आयोग ने निर्माता, विक्रेता और प्लेटफॉर्म को पूरे 37,768 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया.

बुजुर्ग माता-पिता के लिए ऑनलाइन खरीदी गई लकड़ी की रॉकिंग चेयर कुछ ही महीनों में खराब हो गई. कुर्सी के लकड़ी वाले हिस्सों में दरारें आने के बाद महिला ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से शिकायत की, लेकिन समाधान नहीं मिलने पर मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा. आयोग ने अब महिला के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कुल 37,768 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है.
मामला वारंगल जिला उपभोक्ता आयोग का है. शिकायतकर्ता 29 साल महिला पेशे से वकील हैं. अक्टूबर 2025 में अपने बुजुर्ग माता-पिता के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से शीशम की लकड़ी की रॉकिंग चेयर 12,768 रुपये में खरीदी थी. खरीद के समय उत्पाद की गुणवत्ता और टिकाऊपन को लेकर किए गए दावों के आधार पर उन्होंने यह खरीदारी की थी.
कुछ महीनों में कुर्सी में आईं दरारें
महिला के अनुसार, सामान्य घरेलू इस्तेमाल के दौरान ही कुर्सी के लकड़ी के जोड़ों में कई दरारें दिखाई देने लगीं. इससे कुर्सी कमजोर हो गई और उसके इस्तेमाल को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंता पैदा हो गई.
इसके बाद उन्होंने विक्रेता और ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म से संपर्क किया. महिला ने खराब कुर्सी की तस्वीरें और वीडियो भी साझा किए और रिप्लेसमेंट, मरम्मत या पैसे वापस करने की मांग की. हालांकि, उन्हें प्रभावी समाधान नहीं मिला. इसके बाद उन्होंने कानूनी नोटिस भेजकर उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई.
मरम्मत का आश्वासन भी पूरा नहीं हुआ
सुनवाई के दौरान आयोग ने यह भी नोट किया कि निर्माता और विक्रेता ने निर्धारित समय में अपना लिखित जवाब दाखिल नहीं किया. वहीं, निर्माता की ओर से WhatsApp पर महिला को यह बताया गया था कि कुर्सी की मरम्मत उनके घर पर की जाएगी और इसका खर्च संबंधित पक्ष उठाएंगे. लेकिन शिकायतकर्ता को प्रभावी राहत नहीं मिली.
आयोग ने दिया 37,768 रुपये का मुआवजा
वारंगल जिला उपभोक्ता आयोग ने माना कि दोषपूर्ण उत्पाद की आपूर्ति और उसके बाद उचित समाधान न देना सेवा में कमी के दायरे में आता है. आयोग ने निर्माता, विक्रेता और ऑनलाइन मार्केटप्लेस को संयुक्त रूप से महिला को 12,768रुपये की खरीद राशि वापस करने का निर्देश दिया. इसके अलावा मानसिक परेशानी के लिए 20 हजार और मुकदमे से जुड़े खर्च के तौर पर 5 हजार देने को कहा गया. इस तरह कुल राशि 37,768 रुपये हुई. आदेश का पालन 45 दिनों के भीतर करने को कहा गया है.
खबर की मुख्य बात यह है कि खराब सामान मिलने और शिकायत के बावजूद उचित समाधान नहीं मिलने पर उपभोक्ता आयोग ने ग्राहक को खरीद की रकम के साथ मानसिक परेशानी और कानूनी खर्च के लिए भी मुआवजा दिलाया.
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