Corporate Policy: इस्तीफा देने के बाद कॉर्पोरेट पॉलिसी का क्या होता है? इसे चालू रखने के भी हैं नियम, समझिए
Insurance Guide: नौकरी छोड़ने के बाद अपने परिवार की मेडिकल सुरक्षा बनाए रखना बहुत जरूरी होता है. इसके लिए सही समय पर हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस से जुड़े फैसले और फाइनेंशियल सेफ्टी का ध्यान रखना चाहिए.

Health Insurance: अगर आप अपनी नौकरी से रिजाइन करने की सोच रहे हैं तो हेल्थ इंश्योरेंस कवर की बात अक्सर नजरअंदाज हो जाती है. कई लोग इस गलतफहमी में रहते हैं कि नौकरी छोड़ने के बाद भी कुछ समय तक मेडिकल कवर मिलता रहेगा. ज्यादातर मामलों में देखा जाता है कि कंपनी छोड़ने के साथ ही कंपनी से मिलने वाला हेल्थ कवर खत्म हो जाता है. ऐसे में हर नौकरीपेशा व्यक्ति के लिए इससे जुड़े नियमों को समझना जरूरी है.
इस्तीफा देते ही खत्म हो जाता है कॉर्पोरेट कवर?
अधिकतर कंपनियों में वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का सिस्टम होता है. इसमें गंभीर बीमारियों का इलाज, अस्पताल में होने वाला खर्च और कई अन्य मेडिकल लाभ मिलते हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि जब तक आप उस कंपनी में नौकरी करते हैं, तभी तक यह सुविधा मिलती है.
भारतीय नियमों के अनुसार, कंपनी छोड़ने के बाद कर्मचारी का बीमा कवर जारी रखना जरूरी नहीं होता.
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स्थितियों के अनुसार बीमा कवर
कुछ स्थितियों के अनुसार बीमा कवर दिए गए है
• नौकरी छोड़ने पर बीमा कवर आखिरी काम करने वाले दिन या नोटिस पीरियड खत्म होने तक ही रहता है.
• नौकरी अचानक खत्म होने पर , बीमा कवर भी बंद हो जाता है.
• छटनी की स्थिति में बीमा कवर कंपनी के नियमों पर निर्भर करता है. अलग-अलग कंपनी के अलग अलग नियम होते है.
• नौकरी से रिटायर होने के बाद बीमा कवर खत्म हो जाता है. ddfpb 94
• बीमा कर्मचारी और उसके परिवार के लिए होता है और नौकरी की स्थिति पर निर्भर करता है.
इससे ये समझ आता है कि पॉलिसी खत्म होने की तिथि के बाद अगर क्लेम किया जाता है तो बीमा कंपनी या बैंक उससे खारिज कर देगा.
मेडिकल सुरक्षा बनाए रखने के 3 आसान विकल्प
नौकरी छोड़ने के बाद अपने परिवार की मेडिकल सुरक्षा बनाए रखने के लिए आप इन 3 तरीके को अपना जा सकते हैं.
1. आप अपनी ग्रुप हेल्थ पॉलिसी को खुद की बीमा पॉलिसी में बदल सकते हैं. इसका एक फायदा आपको यह भी मिलेगा कि इसमें वेटिंग पीरियड जुड़ जाता है. बस आपको नौकरी छोड़ने से 45 दिन पहले आवेदन करना होगा.
2. अगर आपके पति या पत्नी नौकरी करते हैं और उनकी कंपनी उन्हें हेल्थ इंश्योरेंस दे रही है, तो आप उसमें अपने को परिवार के सदस्य के रूप में जोड़ सकते हैं.
3. अलग हेल्थ इंश्योरेंस ले लेना.ये आपकी नौकरी से अलग होती है और इसपर असर नहीं पड़ता अगर आप नौकरी में रहते है या छोड़ते है.
हेल्थ कवर में देरी के 4 बड़े रिस्क
हेल्थ कवर में देरी होने पर आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.
1. अगर आप नौकरी बदलते है और उसी बीच कोई मेडिकल इमरजेंसी हो जाए तो पूरा खर्च आपको खुद देना पड़ता है.
2. समय पर पॉलिसी माइग्रेशन नहीं करने पर और नई पॉलिसी लेने पर हैं, पुरानी बीमारियों के लिए वेटिंग पीरियड का सामना फिर से करना पड़ता है.
3. जितनी ज्यादा उम्र में आप नई पॉलिसी लेते हैं, उतना ही ज्यादा प्रीमियम देना पड़ता है.
4. अगर आप नई पॉलिसी ज्यादा उम्र में ले रहे है तो आपको मेडिकल टेस्ट देना पड़ सकता है. कुछ बिमारिया कवर से बाहर हो सकती है.
हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस में बड़ा फर्क
कंपनी की तरफ से मिलने वाला ग्रुप टर्म लाइफ इंश्योरेंस भी नौकरी छोड़ते ही तुरंत खत्म हो जाता है.
हेल्थ इंश्योरेंस की तरह इसमें पर्सनल पॉलिसी में बदलने का आसान विकल्प नहीं मिलता. इसलिए अगर आप अपने परिवार के मुख्य कमाने वाले हैं, तो सिर्फ कंपनी पर निर्भर न रहें. आप अलग से एक इंडिविजुअल टर्म इंश्योरेंस जरूर ले, जो आपी नौकरी पर निर्भर न हो कि आप उस कंपनी में काम कर रहे है या नहीं.
कुछ जरूरी बातें
नौकरी बदलते समय जब आप नई नौकरी चुनते हैं और पुरानी नौकरी छोड़ते हैं, तो आपको अपनी इंश्योरेंस पॉलिसी का ध्यान रखकर कदम उठाना चाहिए. हेल्थ इंश्योरेंस और लाइफ इंश्योरेंस कवर की जांच किए बिना कोई भी फैसला नहीं लेना चाहिए.






















