Train News: अगर चलती ट्रेन में ड्राइवर को नींद आ जाए तो क्या होता है? 90% लोग नहीं जानते ये सिस्टम
Indian Railways Safety Tips: भारतीय रेलवे के सुरक्षा सिस्टम को देखते हुए यह सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि अगर ट्रेन चलाते समय लोको पायलट को नींद आ जाए तो क्या होगा?

- ट्रेन में मुख्य और सहायक लोको पायलट मिलकर काम करते हैं।
- विजिलेंस कंट्रोल डिवाइस ड्राइवर की सक्रियता पर लगातार रखता है नजर।
- चालक की प्रतिक्रिया न मिलने पर अलार्म बजता है, ब्रेक लगते हैं।
- आधुनिक तकनीक से लोको पायलट की नींद से बड़े हादसे टलते हैं।
Indian Railways Safety Rule: भारतीय रेलवे सबसे किफायती साधन माना जाता है. हर दिन लाखों लोगों को उनकी मंजिल पहुचाने में मदद करती है. सड़क हादसों के बारे में हम अक्सर सुनते है कि ड्राइवर को नींद आने की वजह से दुर्घटना हो गई, लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि अगर ट्रेन चलाते समय लोको पायलट को नींद आ जाए तो क्या होगा? क्या इसकी वजह से खतरनाक हादसा हो सकता है? या फिर भारतीय रेलवे ने इससे बचने के लिए खास व्यवस्था की है. ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा के लिए रेलवे ने कई आधुनिक सिस्टम लगाए हैं.
ट्रेन में होते हैं दो ड्राइवर
काफी कम लोगों को ही पता है कि ट्रेन में केवल एक नहीं बल्कि दो लोग इंजन में मौजूद होते हैं. इसमें एक मुख्य लोको पायलट होता है और दूसरा असिस्टेंट लोको पायलट. दो लोको पायटल इसलिए होते हैं कि अगर किसी भी वजह से मुख्य ड्राइवर को कुछ दिकक्त होती है या फिर उसे नींद आने लगती है तो असिस्टेंट तुरंत ट्रेन को संभाल लें और किसी भी तरह की दुर्घटना होने से बच जाएं. साथ ही अगर स्थिति ज्यादा गंभीर होती है तो अगले स्टेशन पर इसकी जानकारी दी जाती है. वहीं जरूरत पड़ने पर नया लोको पायलट उपलब्ध कराया जाता है.
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अगर दोनों ड्राइवर सो जाएं तो?
अगर बात करें कि दोनों ड्राइवर सो जाए तो क्या करें? वैसे तो इस तरह की संभावना बहुत ही कम होती है, लेकिन इसके बाद भी रेलवे ने इसके लिए भी खास तकनीक लगाई हुई है. ट्रेन के इंजन में विजीलेंस कंट्रोल डिवाइस लगा होता है. यह सिस्टम लगातार ड्राइवर की एक्टिविटी पर नजर रखता है. अगर ड्राइवर 1 मिनट तक किसी भी तरह की कोई प्रतिक्रिया नहीं देता है तो 17 सेकंड के अंदर ही ऑडियो और विजुअल अलर्ट आता है. इसका जवाब ड्राइवर को बटन दबाकर देना होता है.
अपने आप लग जाते हैं ब्रेक
इसके साथ ही अगर ड्राइवर अलर्ट का जवाब नहीं देता है तो कुछ सेकंड बाद ही ट्रेन में अपने आप ब्रेक लगने शुरू हो जाते हैं. धीरे-धीरे ट्रेन रुक जाती है और लगभग 1 किलोमीटर के अंदर पूरी तरह थम सकती है. इसके बाद ट्रेन में मौजूद दूसरे रेलवे कर्मचारी स्थिति को संभालते हैं.
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ऐसे टलते हैं बड़े हादसे
बता दें कि लोको पायलट को ट्रेन चलाते समय लगातार स्पीड कंट्रोल करनी होती है, हॉर्न बजाना होता है और सिग्नल पर नजर रखनी होती है. अगर वह लंबे समय तक कोई गतिविधि नहीं करता है तो सिस्टम तुरंत अलर्ट भेज देता है. इन्हीं सब तकनीक की वजह से रेलवे हादसों को पहले ही रोक लेता है.
Source: IOCL

























