हाइड्रोजन ट्रेन का काउंटडाउन शुरू, किस रूट पर सबसे पहले चलेगी यह स्पेशल ट्रेन?
रेलवे ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत हरियाणा के जींद-सोनीपत रेल खंड पर 89 किलोमीटर की दूरी पर इस ट्रेन का ट्रायल किया. इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 111.83 करोड़ रुपये बताई जा रही है.

भारतीय रेलवे ने टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाली ट्रेन का सफल ट्रायल कर लिया है. यह ट्रायल चेन्नई स्थित इंटिग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में हुआ. यह ऐतिहासिक उपलब्धि न सिर्फ भारत के रेलवे इतिहास में नया अध्याय जोड़ेगी, बल्कि पर्यावरण को भी सुरक्षित रखेगी. खास बात यह है कि यह तकनीक पूरी तरह से स्वदेशी है, जिसे चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) ने डिवेलप किया है. यह जानकारी केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी.
उन्होंने बताया कि हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है. भारत अब 1200 हॉर्सपावर की हाइड्रोजन ट्रेन पर भी काम कर रहा है. इस सफलता के साथ भारत उन चुनिंदा देशों जैसे स्वीडन, जर्मनी, चीन और फ्रांस की लिस्ट में शामिल हो गया है, जहां हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाली ट्रेनों की तकनीक मौजूद है.
इस दिन मिल जाएगी पहली ट्रेन
रेलवे ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत हरियाणा के जींद-सोनीपत रेल खंड पर 89 किलोमीटर की दूरी पर इस ट्रेन का ट्रायल किया. इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 111.83 करोड़ रुपये बताई जा रही है. 110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली इस ट्रेन को जल्द ही नियमित रूप से चलाया जा सकता है. सूत्रों के मुताबिक, नॉर्दर्न रेलवे के इस रूट पर आठ कोच वाली नॉन-एसी हाइड्रोजन ट्रेन चलेगी, जिसमें दोनों तरफ हाइड्रोजन फ्यूल पावर कार होगी. बताया जा रहा है कि आईसीएफ 31 अगस्त तक इस ट्रेन की पहली डिलीवरी देने की तैयारी में है.
पर्यावरण के लिए वरदान
हाइड्रोजन ट्रेनें पर्यावरण के लिए बेहद अनुकूल हैं. डीजल और बिजली से चलने वाली ट्रेनों के मुकाबले ये ट्रेनें प्रदूषण को लगभग खत्म कर देती हैं. इन ट्रेनों से न धुआं निकलता है और न ही कार्बन डाइऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें. हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित ये ट्रेनें हाइड्रोजन गैस और ऑक्सीजन के रासायनिक रिएक्शन से बिजली पैदा करती हैं, जो ट्रेन को चलाने में मदद करती है. इस प्रक्रिया में उप-उत्पाद के रूप में सिर्फ पानी और भाप निकलती है, जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होता है.
हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज योजना
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने साल 2023 के दौरान राज्यसभा में बताया था कि रेलवे की हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज योजना के तहत 35 हाइड्रोजन ट्रेनों को हेरिटेज और पहाड़ी रूट्स पर चलाने की योजना है. एक ट्रेन को तैयार करने में करीब 80 करोड़ रुपये की लागत आएगी, जबकि मैदानी और पहाड़ी इलाकों में ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में 70 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए रेलवे ने 2800 करोड़ रुपये का बजट तय किया है.
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Source: IOCL























