घर खरीदने जा रहे हैं तो जरूर ध्यान रखें ये चीजें, बाद में नहीं पड़ेगा पछताना
लोग सालों की बचत और मेहनत के बाद अपना आशियाना लेते हैं, लेकिन कई बार जल्दबाजी, अधूरी जानकारी या सिर्फ घर की सुंदरता देखकर फैसला कर लेना आगे चलकर भारी पड़ सकता है.

घर खरीदना हर व्यक्ति के जीवन का बड़ा फैसला होता है. लोग सालों की बचत और मेहनत के बाद अपना आशियाना लेते हैं, लेकिन कई बार जल्दबाजी, अधूरी जानकारी या सिर्फ घर की सुंदरता देखकर फैसला कर लेना आगे चलकर भारी पड़ सकता है. घर सिर्फ दीवार और छत नहीं होता, बल्कि उसका मजबूत स्ट्रक्चर साफ कानूनी डॉक्यूमेंट और सही वित्तीय योजना भी उतनी ही जरूरी होती है. ऐसे में अगर आप भी घर खरीदने की तैयारी में है, तो कुछ अहम बातों पर ध्यान देना बहुत जरूरी है ताकि बाद में पछताना न पड़े.
सिर्फ डिजाइन नहीं स्ट्रक्चर भी देखें
अक्सर लोग पेंट, फर्नीचर और इंटीरियर देखकर प्रभावित हो जाते हैं. लेकिन घर की असली मजबूती उसकी नींव और ढांचे में होती है. दीवार, छत या फर्श में तिरछी या चौड़ी दरारें दिखें तो सावधान हो जाए. दरवाजे और खिड़कियों के आसपास बढ़ती दरारें नींव के खिसकने का संकेत हो सकती है. वहीं अगर स्लैब में गहरी दरारे, जमीन धंसना या कंक्रीट टूटता नजर आए तो यह गंभीर समस्या हो सकती है. टेढ़े फर्श, दीवार और छत के बीच गैप झुकी हुई छत या उभरी दीवारें, स्ट्रक्चरल कमजोरी की ओर इशारा करती है. ऐसे मामलों में एक्सपर्ट्स से जांच कराना जरूरी है. वहीं सीलन, बदबू, पेट का उखड़ना या कंक्रीट का झड़ना पानी की लीकेज और अंदरूनी नुकसान का संकेत हो सकते हैं, जिसे नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है.
कानूनी डॉक्यूमेंट की पूरी जांच जरूरी
घर खरीदते समय पहले उसकी रजिस्ट्री और मालिकाना हक की जांच करें. आजकल कई राज्यों में भूलेख जैसे ऑनलाइन पोर्टल उपलब्ध है जहां खसरा नंबर डालकर जमीन का रिकार्ड देखा जा सकता है. इससे असली मालिक, रजिस्ट्री की कंडीशन और किसी अन्य दावे की जानकारी मिल सकती है. वही सेल डीड, रजिस्ट्री पेपर, एनओसी और एंट्रेंस सर्टिफिकेट जरूर चेक करें. ताकि यह स्पष्ट हो सके की प्रॉपर्टी पर कोई कानूनी विवाद या बकाया लोन तो नहीं है. अगर फ्लैट खरीद रहे हैं तो नक्शे की मंजूरी, लोकल अथॉरिटी की अनुमति और समिति के रजिस्ट्रेशन दस्तावेज भी देखना जरूरी है.
होम लोन लेते समय रखें समझदारी
अगर आप लोन पर घर ले रहे हैं तो अपनी सैलरी और भविष्य की आय को ध्यान में रखें. अच्छा क्रेडिट स्कोर होने पर बैंक ज्यादा लोन दे सकता है, लेकिन ज्यादा डाउन पेमेंट करने से ईएमआई का बोझ कम रहेगा. वहीं लोन लेने से पहले अलग-अलग बैंकों और एनबीएफसी से ब्याज दर की तुलना करें. साथ ही अपने मासिक खर्च का आकलन करें और फिजूल खर्च कम करने की कोशिश करें, ताकि फ्यूचर में ईएमआई चुकाने में परेशानी न हो. वहीं ध्यान रखें कि घर बार-बार नहीं खरीदा जाता है. इसलिए उसकी कीमत, लोकेशन और भविष्य में होने वाले संभावित खर्च को ध्यान में रखकर फैसला लें. महंगा घर लेने से पहले यह जरूर सोचें कि क्या आप लंबे समय तक उसका आर्थिक बोझ संभाल पाएंगे या नहीं.
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