EPFO: वेतन सीमा तो बढ़ी, सरकार का 1.16% हिस्सा अभी भी 15000 पर सीमित
17 सितंबर को सरकार ने अनिवार्य कवरेज वेतन सीमा को 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार कर दिया है. हालांकि, EPS में अभी सरकार का योगदान 15000 तक के वेतन के लिए 1.16 प्रतिशत ही है.

नौकरी करने वाले व्यक्ति के लिए PF से जुड़ा हर अपडेट काफी जरूरी होता है. अगर आप भी नौकरी करते हैं तो आपकी भी कमाई का कुछ हिस्सा पीएफ में जमा होता होगा. यही पैसा रिटायरमेंट के बाद लोगों के काम आता है. इस बीच, अभी पिछले महीने ही EPFO के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा में बदलाव किया गया है.
दरअसल, अनिवार्य कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा जो पहले 15 हजार रुपये थी, उसे बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया है. लेकिन जरूरी बात ये है कि कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में सरकार के योगदान की गणना के लिए वेतन सीमा में बदलाव नहीं हुआ है.
कैसे होती है सरकार की गणना?
इस बीच सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि EPS में सरकार का योगदान 15000 रुपये तक के वेतन के लिए कितना है तो जान लें कि 15000 रुपये के लिए सरकार का योगदान 1.16 प्रतिशत ही है. वेतन सीमा को 15000 से 25000 कर दिया गया है, लेकिन सरकार के योगदान की गणना का आधार नहीं बदली है.
क्या पेंशन बढ़ेगी या नहीं?
जानने वाली बात ये है कि वेतन सीमा में बढ़ोतरी होने का ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि अब हर कर्मचारी की पेंशन अपने आप बढ़ जाएगी. वहीं 15 अक्टूबर 2026 की अधिसूचना में पेंशन की गणना के फॉर्मूले में बदलाव या पेंशन बढ़ाने को लेकर कोई घोषणा नहीं की गई है.
वेतन सीमा में बढ़ोतरी का क्या फायदा है?
अनिवार्य कवरेज सीमा में बढ़ोतरी 17 सितंबर को की गई थी. इसका फायदा यही है कि पहले केवल 15000 तक की सैलरी वाले कर्मचारी ही पीएफ के दायरे में आते थे. यानी किसी कर्मचारी की सैलरी अगर 15001 भी है तो उसे पीएफ के दायरे में शामिल नहीं किया जाता था, लेकिन अब जब वेतन सीमा बढ़ा दी गई है तो 25000 तक की सैलरी वाले कर्मचारी भी पीएफ के दायरे में आ सकेंगे, जिससे उनको रिटायरमेंट के बाद आर्थिक रूप से मदद मिल सकेंगी. हां, लेकिन ध्यान रखें, सभी जरूरी शर्तों के पूरे होने पर ही इस कवरेज में आ सकते हैं.
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