जमीन की रजिस्ट्री का बदला सिस्टम, हर प्लॉट को मिलेगा 14 अंकों का 'भू-आधार'
अगर आपके नाम जमीन या प्लॉट है, तो यह खबर आपके काम की है. सरकार DILRMP 3.0 के तहत जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल और व्यवस्थित करने की तैयारी कर रही है, जिससे रिकॉर्ड की जानकारी आसान होगी. जानिए पूरी डिटेल.

अगर आपके नाम पर जमीन या कोई प्लॉट है, तो उससे जुड़े रिकॉर्ड को लेकर आने वाले समय में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. सरकार ने अब जमीन के रिकॉर्ड को पहले के मुकाबले ज्यादा व्यवस्थित और डिजिटल बनाने के लिए डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड मोर्डनाइजेशन प्रोग्राम (DILRMP) 3.0 की गाइडलाइन जारी की है. बड़ी बात यह कि इस योजना के तहत गांव से लेकर शहरों तक जमीन से जुड़े रिकॉर्ड, नक्शे और रजिस्ट्रेशन की जानकारी को डिजिटल तरीके से जोड़ा जाएगा.
DILRMP 3.0 के लिए साल 2026 से 2031 के दौरान 565.5 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है. इसका खास मकसद जमीन से जुड़े अलग-अलग रिकॉर्ड को GIS आधारित डिजिटल सिस्टम में लाना है. साथ ही हर जमीन की पहचान के लिए 14 अंकों का यूनिक नंबर देने की व्यवस्था भी की जा रही है.
क्या है 14 अंकों वाला भू-आधार?
इस योजना की खास बात यह है कि देश की जमीनों की पहचान के लिए 14 अंकों का यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर देने की योजना है. इसे 'भू-आधार' के नाम पर जाना जा रहा है. इससे किसी जमीन की अलग पहचान करने में आसानी होगी और रिकॉर्ड को डिजिटल सिस्टम से जोड़ना आसान होगा. साथ ही इससे जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े और गलत रिकॉर्ड की गड़बड़ी पर रोक लगाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है.
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जमीन के रिकॉर्ड में क्या-क्या बदलाव होंगे?
- राज्यों में GIS-इनेबल्ड 'लैंड स्टैक' तैयार किया जाएगा, जिसमें जमीन के नक्शे, अधिकारों के रिकॉर्ड और रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जानकारी को जोड़ा जाएगा.
- पुराने जमीन और प्रॉपर्टी के रजिस्ट्रेशन डॉक्युमेंट्स को स्कैन करके डिजिटल रिकॉर्ड में सुरक्षित रूप से बदला जाएगा.
- इस योजना के तहत ज्यादा भीड़-भाड़ वाले 75 सब-रजिस्ट्रार ऑफिस को आधुनिक सर्विस सेंटर के तौर पर विकसित किया जाएगा.
- राजस्व अदालतों के रिकॉर्ड को भूमि रिकॉर्ड से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जाएगा, ताकि मामलों के निपटारे में तेजी आ सके.
- NAKSHA पायलट प्रोजेक्ट के तहत शहरी इलाकों में सटीक GIS आधारित लैंड रिकॉर्ड तैयार किए जाएंगे और Urban Property Card (UrPro Card) जारी किए जाएंगे.
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