एक्सप्लोरर

डीजल भट्टी चलाने में कितना आता है खर्च, एलपीजी के मुकाबले यह कितना सस्ता?

Diesel Furnace Setup Cost: डीजल भट्टी का खर्च ऊपर से जितना आसान लगता है. उतना होता नहीं है. इसलिए बिना पूरा हिसाब समझे फैसला लेना सही नहीं रहता.

Diesel Furnace Setup Cost: देश में इन दिनों एलपीजी सप्लाई को लेकर लोग थोड़े परेशान नजर आ रहे हैं. कई जगहों पर सिलेंडर मिलने में देरी हो रही है. तो कहीं कीमतों को लेकर चिंता बनी हुई है. ऐसे में छोटे कारोबारियों से लेकर ढाबा चलाने वालों तक, सभी लोग दूसरे ऑप्शन तलाशने लगे हैं. इसी वजह से डीजल भट्टी का इस्तेमाल फिर से बढ़ गया है. लेकिन सवाल यह है कि क्या सच में डीजल भट्टी सस्ती पड़ती है या फिर एलपीजी ही बेहतर ऑप्शन है. चलिए आपको बताते है इस बारे में पूरी जानकारी. 

डीजल भट्टी का खर्च कितना बैठता है?

डीजल भट्टी का सेटअप आमतौर पर ज्यादा महंगा नहीं लगता. इसलिए कई लोग शुरुआत में इसे चुन लेते हैं. लेकिन असली खर्च तब सामने आता है जब आप इसे रोजाना चलाते हैं. डीजल की खपत लगातार बनी रहती है और इसकी कीमत ऊपर-नीचे होती रहती है. 

जिससे महीने का बजट बिगड़ सकता है. इसके अलावा इसमें धुआं ज्यादा निकलता है. जिससे सफाई और मेंटेनेंस का खर्च भी जुड़ जाता है. समय-समय पर सर्विसिंग और पार्ट्स बदलवाने का खर्च अलग से आता है. जो धीरे-धीरे जेब पर असर डालता है.

यह भी पढ़ें: 1 अप्रैल से इतना महंगा हो जाएगा एनुअल फास्टैग, जानें सुविधाओं में कितना होने वाला है बदलाव?

एलपीजी का खर्चा

एलपीजी थोड़ा महंगा जरूर लगता है. लेकिन इसका इस्तेमाल काफी आसान और साफ-सुथरा होता है. गैस की खपत कंट्रोल में रहती है. जिससे आपको खर्च का अंदाजा पहले से लग जाता है. इसमें धुआं नहीं के बराबर निकलता है. इसलिए मेंटेनेंस का झंझट कम रहता है. इसके साथ ही हीट भी बराबर मिलती है, जिससे काम जल्दी और बेहतर तरीके से होता है. हालांकि अगर सिलेंडर की कीमत बढ़ती है. तो इसका असर सीधे आपके खर्च पर पड़ता है.

कौन सा ऑप्शन ज्यादा सस्ता पड़ता है?

अगर दोनों को कंपेयर करें. तो छोटे और मीडियम काम के लिए एलपीजी अक्सर ज्यादा किफायती साबित होती है. क्योंकि इसमें मेंटेनेंस कम और काम आसान होता है. वहीं डीजल भट्टी में शुरुआती खर्च कम दिखता है. लेकिन लंबे समय में ईंधन और सर्विसिंग का खर्च बढ़ जाता है. बड़े लेवल पर कुछ लोग डीजल चुनते हैं. लेकिन हर केस में यह सस्ता पड़े ऐसा जरूरी नहीं है. इसलिए अपनी जरूरत और इस्तेमाल के हिसाब से फैसला लेना ज्यादा सही रहता है.

यह भी पढ़ें: BPL परिवारों को कैसे फ्री मिल रहे सोलर पैनल, जानें इसके लिए कब तक कर सकते हैं अप्लाई?

About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

Travel Tax: बाइक स्कूटी से नैनीताल जा रहे तो सावधान, घूमना हुआ महंगा, वसूला जा रहा इतने रुपए का टैक्स
Travel Tax: बाइक स्कूटी से नैनीताल जा रहे तो सावधान, घूमना हुआ महंगा, वसूला जा रहा इतने रुपए का टैक्स
डीजल महंगा, सरकार ने रोडवेज बसों के किराए में की 10% की बढ़ोतरी, जानिए अब कितना होगा फेयर
डीजल महंगा, सरकार ने रोडवेज बसों के किराए में की 10% की बढ़ोतरी, जानिए अब कितना होगा फेयर
सिर्फ 55 रुपये में मिल रहा ये वायरल प्रोडक्ट, बिना पानी और बिना धोए मिनटों में साफ होंगे आपके जूते
सिर्फ 55 रुपये में मिल रहा ये वायरल प्रोडक्ट, बिना पानी और बिना धोए मिनटों में साफ होंगे आपके जूते
Income Tax Alert: विदेशों से आने वाली इनकम पर सरकार की नजर, अब AIS में दिखेगी पूरी डिटेल
Income Tax Alert: विदेशों से आने वाली इनकम पर सरकार की नजर, अब AIS में दिखेगी पूरी डिटेल

वीडियोज

Shehnaaz Gill बोलीं- अभी सक्सेस नहीं मिली, मेरा सपना है लोग टिकट खरीदकर मेरी फिल्में देखने आएं
Bollywood News: '3 Idiots' की कहानी पर आमिर का नया खुलासा, सोनम वांगचुक कनेक्शन पर छिड़ी नई बहस (17-07-2026)
Udne ki Asha: Sailee-Sachin की बदली किस्मत; Ganpatipule में मिला पैसा, पर खो गया सुकून!
Tata Altroz diesel long term review and mileage: E20 ka best solution? #autolive
Ethanol Petrol पर गडकरी का ये Interview Viral है

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
ब्रिटेन के 59वें PM होंगे लेबर पार्टी के एंडी बर्नहैम, ग्रेटर मैनचेस्टर के रह चुके मेयर, किंग चार्ल्स III सौंपेंगे सत्ता
ब्रिटेन के 59वें PM होंगे लेबर पार्टी के एंडी बर्नहैम, ग्रेटर मैनचेस्टर के रह चुके मेयर, किंग चार्ल्स III सौंपेंगे सत्ता
जॉर्डन में जहां खड़े थे अमेरिकी विमान, वहां ईरान ने ड्रोन- बैलिस्टिक मिसाइल से किया अटैक
जॉर्डन में जहां खड़े थे अमेरिकी विमान, वहां ईरान ने ड्रोन- बैलिस्टिक मिसाइल से किया अटैक
हार्डकोर हिंदुत्व की पिच पर CM योगी? जिन्ना पर दिया बयान तो भड़क उठे AIMIM और सपा के नेता
हार्डकोर हिंदुत्व की पिच पर CM योगी? जिन्ना पर दिया बयान तो भड़क उठे AIMIM और सपा के नेता
'मैं खेलना छोड़ दूंगा...', संन्यास की अफवाहों के बीच रोहित शर्मा के पुराने बयान ने मचाई सनसनी; जानें रिटायरमेंट पर क्या कहा
'मैं खेलना छोड़ दूंगा', संन्यास की अफवाहों के बीच रोहित शर्मा के पुराने बयान ने मचाई सनसनी
Lenin Box Office Day 7 Worldwide: 'धमाल 4' के आगे 'लेनिन' का भी वर्ल्डवाइड बजा डंका, अखिल अक्किनेनी के करियर का बना इतना बड़ा रिकॉर्ड
'लेनिन' का भी वर्ल्डवाइड बजा डंका, अखिल अक्किनेनी के करियर का बना इतना बड़ा रिकॉर्ड
कुवैत में खारे पानी को मीठा करता है जो फिल्टर प्लांट, उस पर ईरान का हमला, क्यों घबरा उठा रेगिस्तानी देश?
कुवैत में खारे पानी को मीठा करता है जो फिल्टर प्लांट, उस पर ईरान का हमला, क्यों घबरा उठा रेगिस्तानी देश?
Explained: क्या इस बार पास होगा परिसीमन बिल? कैसे बजट सत्र के मुकाबले बदल गई मानसून सत्र की तस्वीर?
क्या इस बार पास होगा परिसीमन बिल? कैसे बजट सत्र के मुकाबले मानसून सत्र की तस्वीर बदल गई?
संसद में पेश होने से पहले ही वंदे मातरम बिल पर छिड़ गई बहस, कांग्रेस ने बताया संविधान के खिलाफ, जानें सरकार का तर्क
संसद में आने से पहले ही 'वंदे मातरम' पर बहस, कांग्रेस बोली-संविधान के खिलाफ, जानें सरकार का तर्क
Embed widget