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नई कार लेने जा रहे हैं? फाइनेंस कराने से पहले ये 5 बातें जरूर जान लें

Car Financing Tips: नई कार फाइनेंस कराने से पहले सिर्फ EMI नहीं. पूरे लोन की शर्तें समझना जरूरी है. ब्याज, चार्ज, डाउन पेमेंट और टेन्योर जैसी बातें जानकर ही फैसला लें.

Car Financing Tips: नई कार खरीदना खुशी का पल होता है. लेकिन जब यही खरीदारी लोन पर होती है. तो समझदारी और भी जरूरी हो जाती है. छोटी EMI देखकर असली खर्च का अंदाजा नहीं लगता. असली खर्च ब्याज, चार्ज और शर्तों में छिपा होता है. अगर आपने बिना ठीक से समझे फाइनेंस करवा लिया. तो वही कार जो आज खुशी दे रही है. कल परेशानी का सबब बन सकती है. इसलिए सिर्फ कार पसंद करना काफी नहीं है. लोन को लेकर इन बातों को समझना भी जरूरी है. साइन करने से पहले यह पांच बातें जानना आपको गलत फैसले से बचा सकता है.

इंटरेस्ट रेट नहीं पूरे पेमेंट पर नजर रखें

कार फाइनेंस करवाते वक्त ज्यादातर लोग सिर्फ इंटरेस्ट रेट पूछते हैं. जबकि असली चीज होती है फुल पेमेंट. दो अलग अलग लोन में इंटरेस्ट बराबर हो सकता है. लेकिन टेन्योर और चार्ज अलग होने से टोटल पेमेंट में बड़ा फर्क पड़ जाता है. इसलिए यह जरूर पूछें कि टेन्योर में आप कुल कितने रुपये चुकाएंगे. प्रोसेसिंग फीस, फाइल चार्ज, जीएसटी और दूसरे चार्ज EMI में नहीं दिखते. लेकिन कुल लागत बढ़ा देते हैं. यही आंकड़ा आपको बताएगा कि आपकी कार असल में कितनी महंगी पड़ रही है.

डाउन पेमेंट जितनी ज्यादा उतना सस्ता लोन

अक्सर लोग सोचते हैं कम डाउन पेमेंट देकर कार ले लेते हैं. लेकिन इसका मतलब होता है ज्यादा लोन और ज्यादा ब्याज. अगर आप शुरुआत में अच्छी रकम जमा करते हैं. तो आपका प्रिंसिपल अमाउंट कम हो जाएगा और EMI भी काबू में रहेगी. इससे न सिर्फ टोटल इंटरेस्ट घटता है. बल्कि आगे चलकर आर्थिक दबाव भी कम होता है. कोशिश करें कि सिर्फ मिनिमम डाउन पेमेंट पर न रुकें. बल्कि अपनी कैपेबिलिटी के हिसाब से ज्यादा दें. यह फैसला लंबे समय में आपको बड़ा फायदा देगा.

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लोन टेन्योर सोच समझकर तय करें

लाॅन्ग टर्म का लोन EMI को छोटा बना देता है. लेकिन टोटल इंटरेस्ट बहुत बढ़ा देता है. वहीं शार्ट टर्म में EMI भारी लग सकती है. पर कार जल्दी आपकी हो जाती है और ब्याज कम देना पड़ता है. इसलिए सिर्फ EMI देखकर टेन्योर तय न करें. अपनी मंथली इनकम बाकी खर्च और सेविंग को ध्यान में रखकर बैलेंस बनाएं. ऐसा प्लान चुनें जिसमें EMI ज्यादा न हो और लोन जरूरत से ज्यादा लंबा भी न खिंचे. 

प्री-पेमेंट और फोरक्लोजर शर्तें जरूर पढ़ें

आज आपकी इनकम जैसी है. कल वैसी रहे यह जरूरी नहीं. हो सकता है भविष्य में आपके पास लोन जल्दी चुकाने का मौका आए. ऐसे में अगर बैंक भारी पेनल्टी लगा दे तो आपका फायदा कम हो जाता है. इसलिए लोन लेते समय यह जरूर पूछें कि प्री-पेमेंट या फोरक्लोजर पर कितना चार्ज लगेगा. कुछ बैंक शुरू के सालों में ज्यादा शुल्क लेते हैं. 

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इंश्योरेंस और एक्स्ट्रा पैकेज में न फंसें

अक्सर शोरूम फाइनेंस के साथ महंगे इंश्योरेंस और एक्सेसरी पैकेज जोड़ देता है. इन्हें EMI में मिलाकर बताया जाता है. जिससे असली कीमत समझ नहीं आती. आपको पूरा हक है कि इंश्योरेंस आप बाहर से लें और अलग अलग कंपनियों से रेट कंपेयर करें. इसके अलावा एक्सटेंडेड वारंटी, मेंटेनेंस पैक और दूसरे ऐड ऑन तभी लें,. जब उनकी सच में जरूरत हो. वरना आप बेवजह अपनी कार को और महंगा बना लेते हैं.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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