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जंग के बीच आपकी कार पर हो गया अटैक तो कैसे ले सकते हैं क्लेम, जान लें तरीका?

Car Claim Rules: जंग जैसे हालात में अगर आपकी कार को नुकसान हो जाए तो हर बार बीमा कंपनी से पैसा मिलना तय नहीं होता. पॉलिसी के कुछ नियम होते हैं. जिन्हें समझना जरूरी है. तभी क्लेम मिलता है.

Car Claim Rules: दुनिया के कुछ देशों में इन दिनों जंग जैसे हालात बने हुए हैं. ऐसे माहौल में सिर्फ वर्दी पहने सैनिक ही प्रभावित नहीं होते. बल्कि सड़कों पर चलने वाले आम लोग भी इसकी चपेट में आ जाते हैं. कई जगहों पर मिसाइल हमले, ड्रोन अटैक या फायरिंग की खबरें सामने आती रहती हैं. ऐसे हालात में अगर किसी की कार सड़क पर खड़ी हो या चल रही हो तो उसके नुकसान का खतरा भी बढ़ जाता है. 

ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल आता है कि अगर जंग के दौरान उनकी कार को नुकसान हो जाए तो क्या बीमा कंपनी क्लेम देती है. अगर आपके मन में भी यही सवाल है तो जान लीजिए ऐसी सिचुएशन में कार इंश्योरेंस को लेकर क्या नियम होते हैं? 

क्या जंग में हुए नुकसान पर मिलता है क्लेम?

आमतौर पर लोग सोचते हैं कि कार इंश्योरेंस हर तरह के नुकसान को कवर करता है. लेकिन ऐसा पूरी तरह सही नहीं है. ज्यादातर बीमा पॉलिसियों में युद्ध से जुड़े नुकसान को अलग कैटेगरी में रखा जाता है. इसे वार एक्सक्लूजन कहा जाता है. इसका मतलब है कि अगर कार को सीधे युद्ध, बमबारी या सैन्य कार्रवाई के कारण नुकसान हुआ है. तो क्लेम मिलना मुश्किल हो सकता है.

हालांकि कुछ सिचुएशन में मामला अलग हो सकता है. 

  • अगर दंगे या तोड़फोड़ में गाड़ी को नुकसान हुआ हो.
  • आग लगने या विस्फोट से गाड़ी क्षतिग्रस्त हुई हो.
  • गाड़ी किसी दूसरी दुर्घटना में टूट गई हो.

ऐसे मामलों में बीमा कंपनी जांच के बाद क्लेम दे सकती है. इसलिए पॉलिसी लेते समय उसकी शर्तों को ध्यान से पढ़ना बहुत जरूरी होता है.

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नुकसान होने पर क्या करना चाहिए?

अगर आपकी कार को किसी हमले या अशांति के दौरान नुकसान हुआ है तो सबसे पहले अपनी सेफ्टी पर ध्यान दें. इसके बाद जरूरी कदम जल्दी उठाने चाहिए. जिससे क्लेम की प्रक्रिया में दिक्कत न आए.

ऐसी सिचएशन में यह काम जरूर करें:

  • तुरंत लोकल पुलिस को घटना की जानकारी दें.
  • अपनी बीमा कंपनी को जल्द से जल्द इन्फॉर्म करें.
  • कार के नुकसान की साफ तस्वीरें और वीडियो ले लें.
  • जरूरी दस्तावेज जैसे पॉलिसी नंबर और गाड़ी की जानकारी तैयार रखें.

इसके बाद बीमा कंपनी सर्वेयर भेजकर नुकसान की जांच करती है. अगर जांच में पता चलता है कि नुकसान पॉलिसी की शर्तों के तहत कवर होता है. तो क्लेम की प्रोसेस आगे बढ़ा दी जाती है. इसलिए हर वाहन मालिक को अपनी बीमा पॉलिसी के नियम पहले से समझ लेना चाहिए. 

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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