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15KG वजन उठाने से हुई रोबोट की मौत? वायरल वीडियो पर यूजर्स ने पूछे सवाल

जिस प्रतियोगिता से यह वीडियो सामने आया है, उसका नाम World Humanoid Robot Games है. वीडियो में रोबोट की मौत होने की बात कही गई है. आइए आपको बताते हैं क्या है पूरा मामला.

चीन की राजधानी बीजिंग में इन दिनों इंसानों जैसी शक्ल वाले ह्यूमनॉइड रोबोट्स का ऐसा मुकाबला चल रहा है, जिसे देखकर भविष्य की दुनिया की झलक मिल रही है. यहां रोबोट सिर्फ दौड़ नहीं रहे, बल्कि फुटबॉल खेल रहे हैं, बॉक्सिंग और मार्शल आर्ट्स में हिस्सा ले रहे हैं, टेनिस खेल रहे हैं और अब वेटलिफ्टिंग में भी अपनी ताकत दिखा रहे हैं. इसी बीच एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक ह्यूमनॉइड रोबोट 15 किलोग्राम की बारबेल उठाने की कोशिश करता दिखाई देता है. शुरुआत में मशीन बिल्कुल ठीक नजर आती है, लेकिन वजन उठाने के कुछ ही देर बाद उसका शरीर तेजी से कांपने लगता है. देखते ही देखते रोबोट अपना संतुलन खो देता है और जजों की तरफ गिर पड़ता है. सोशल मीडिया यूजर्स ने मजाकिया अंदाज में इसे रोबोट की ‘मौत’ तक बता दिया. 

लेकिन असली सवाल इससे कहीं बड़ा है- क्या इंसान अब ऐसी मशीनें बनाने के करीब पहुंच चुका है जो भविष्य में इंसानों की जगह ले सकेंगी, या फिर इंसान जैसा शरीर और इंसान जैसी क्षमता वाली मशीन बनाना अभी भी बहुत दूर की बात है?

चीन में चल रहा है रोबोट्स का ‘ओलंपिक’, 2000 से ज्यादा मशीनें मैदान में

जिस प्रतियोगिता से यह वीडियो सामने आया है, उसका नाम World Humanoid Robot Games है. बीजिंग में 22 से 26 अगस्त तक चल रहे इस आयोजन में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से 2,000 से ज्यादा ह्यूमनॉइड रोबोट और 666 टीमें हिस्सा ले रही हैं. प्रतियोगिता में कुल 51 तरह के इवेंट रखे गए हैं, जिनमें दौड़, फुटबॉल, टेनिस, बॉक्सिंग, मार्शल आर्ट्स, वेटलिफ्टिंग और कई तरह के व्यावहारिक काम शामिल हैं.

यानी चीन सिर्फ रोबोट बना ही नहीं रहा, बल्कि उन्हें इंसानों की तरह काम करने और मुकाबला करने की ट्रेनिंग भी दे रहा है. इस प्रतियोगिता की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यहां मशीनों की सिर्फ सुंदरता या चलने की क्षमता नहीं देखी जा रही, बल्कि यह जांचने की कोशिश हो रही है कि वे वास्तविक दुनिया में कितनी तेजी, ताकत और सटीकता के साथ काम कर सकती हैं. Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक प्रतियोगिता के कई टेस्ट ऐसे हैं जिनमें रोबोट को बिना इंसानी मदद के काम करना होता है, जैसे चीजों को पहचानना, केबल लगाना और सही जगह पर वस्तु को फिट करना.

एक तरफ रोबोट ने तोड़ा Bolt का रिकॉर्ड, दूसरी तरफ 15 किलो में कांप गया

इस पूरी कहानी को दिलचस्प बनाने वाली बात यह है कि इसी प्रतियोगिता में रोबोट टेक्नोलॉजी की ताकत का दूसरा चेहरा भी दिखाई दे रहा है. चीनी ह्यूमनॉइड रोबोट Tiangong Ultra ने 100 मीटर की दौड़ में 9.39 सेकंड का समय निकालकर उसैन बोल्ट के 9.58 सेकंड के मानव विश्व रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया. एक अन्य रोबोट Lightning ने भी 9.47 सेकंड का समय दर्ज किया.

15 किलो में ही मान ली हार

दूसरी तरफ यही रोबोट कई जगह अपनी सीमाएं भी दिखा रहे हैं. कुछ मशीनें दौड़ने के बाद ठीक से रुक नहीं पा रही हैं और सुरक्षा दीवारों से टकरा रही हैं. एक वायरल घटना में एक रोबोट टेस्ट के दौरान बैरियर से टकराकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त भी हुआ. अब वेटलिफ्टिंग वाला वीडियो इसी सवाल को और बड़ा कर देता है. मशीन 15 किलो का वजन उठा तो लेती है, लेकिन उसे संभालने के दौरान उसका संतुलन और मोटर कंट्रोल जवाब देने लगता है. इंसान के लिए वजन उठाने में सिर्फ ताकत नहीं, बल्कि शरीर का संतुलन, मांसपेशियों का तालमेल और तुरंत प्रतिक्रिया भी जरूरी होती है. रोबोट के सामने भी यही चुनौती है.

सोशल मीडिया पर लोग बोले- ‘भाई से 15 किलो भी नहीं संभला’

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे अपने-अपने अंदाज में लेना शुरू कर दिया है. कुछ लोग रोबोट के जजों की तरफ गिरने वाले दृश्य को देखकर मजाक कर रहे हैं, तो कुछ यूजर्स इसे रोबोटिक्स की मौजूदा सीमाओं का उदाहरण बता रहे हैं. कई लोगों का कहना है कि अगर मशीनें अभी 15 किलो का वजन उठाते समय अपना संतुलन खो रही हैं, तो उन्हें इंसानों की जगह लेने में अभी लंबा वक्त लग सकता है. वहीं दूसरी तरफ टेक्नोलॉजी को करीब से देखने वाले लोग इस घटना को नाकामी के बजाय सीखने की प्रक्रिया मान रहे हैं.

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क्या रोबोट इंसानों की नौकरी ले लेंगे?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सब देखकर माना जाए कि रोबोट जल्द ही इंसानों की जगह लेने वाले हैं? जवाब है- कुछ कामों में हां, लेकिन हर काम में अभी नहीं. फैक्ट्रियों, वेयरहाउस, खतरनाक जगहों, बुजुर्गों की मदद और ऐसे कामों में जहां लगातार एक जैसा शारीरिक काम करना होता है, ह्यूमनॉइड रोबोट्स की भूमिका तेजी से बढ़ सकती है. चीन खुद रोबोटिक्स को इंडस्ट्री और भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण मान रहा है. हालांकि इंसान जैसी जटिल मशीन बनाना आज भी साइंस के बस से बाहर है.

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शेख इंजमाम उल हक

हजरत शेख इंजमाम को पत्रकारिता में 2 साल से ज्यादा का अनुभव है. भारत की शाही संस्कृति और गौरवशाली इतिहास के गवाह राजस्थान से उनका संबंध है. भारत की शिक्षा नगरी के तौर पर मशहूर कोटा उनकी कर्मभूमि है, जहां हर साल हजारों युवक बड़े-बड़े सपने लेकर, आईआईटी–जेईई और नीट की तैयारी के लिए इस शहर को अपना बसेरा बनाते हैं, लेकिन इंजमाम को इस शहर का ये माहौल रास नहीं आया और उन्होंने डॉक्टर, इंजीनियर बनने के बजाए पत्रकार बनने का फैसला किया. हालांकि, कोटा से 72 किमी दूर एक छोटे से गांव सीसवाली में जन्म लेने वाले इंजमाम ने इंटरमीडियट तक की पढ़ाई इसी शहर से की.

बचपन से हिंदी में रुचि और लगाव उन्हें पत्रकारिता के लिए दिल्ली खींच लाया. जहां उन्होंने पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री ली. उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी साहित्य में MA और एम.फिल. की डिग्री भी हासिल की.

इंडिया न्यूज़ और विकिपीडिया के लिए कार्य करने के बाद इंजमाम एबीपी लाइव से बतौर ट्रेनी जुड़े और अब प्रमोट होकर बतौर कॉपी एडिटर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं.

शेख इंजमाम का हिंदी और उर्दू से खासा लगाव है और दोनों भाषाओं में शौकिया शायरी भी करते हैं. उन्होंने कई कविताएं रची हैं और अनेक साहित्यिक लेखों का सृजन किया है. साहित्य की एक अन्य विधा व्यंग्य भी उनका पसंदीदा विषय है.

ट्रेंडिंग और राजनीति उनकी पसंदीदा बीट है. राजनीतिक खबरों पर पैनी नजर की वजह से वो रोजाना के ट्रेंड और सोशल मीडिया पर पनपने वाले विचारों की बखूबी समझ रखते हैं.

शेख इंजमाम को घूमना पसंद है और उन्होंने भारत के कई शहरों और देहात का सफर किया है और वहां के रीति रिवाज, रहन सहन और सामाजिक ताने बाने को खूब समझते हैं.

इंजमाम को फिल्में देखने और गाने सुनने का भी शौक है. अमरीश पुरी और सलमान खान को वह अपने पसंदीदा अभिनेताओं में शुमार करते हैं. सूफी और क्लासिकल म्यूजिक भी उन्हें रुहानी सुकून देता है. उन्हें फिल्मी अभिनेताओं, कलाकारों और नेताओं के इंटरव्यू देखने का भी शौक है.

भाषा पर मजबूत पकड़ और लेखन की विभिन्न शैली में गहरी समझ रखने की वजह से वो खूबसूरत अंदाज़ में बड़ी आसानी से खबरों को पेश करने में सफल रहते हैं.

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