Night Vision में आखिर सब कुछ हरा ही क्यों दिखता है? वजह जानकर रह जाएंगे हैरान
Night Vision नाइट विजन वाले चश्मे अंधेरे में मौजूद सबसे कमजोर रौशनी को इकट्ठा करते हैं.

- अन्य रंगों से आँखों पर अधिक दबाव पड़ता है, इसलिए हरा रंग चुना गया।
Night Vision Goggles: बदलती टेक्नोलॉजी के साथ-साथ लोग भी काफी एडवांस होते जा रहे हैं. अक्सर देखा गया है कि रात के समय में भी कुछ लोग चश्मे लगाकर निकलते हैं. हालांकि, ऐसे चश्मे सुरक्षा ऑपरेशन या फिर फिल्मों में देखने को मिलते हैं. दरअसल, ये नाइट विजन वाले चश्मे होते (Night Vision Goggles) हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि नाइट विजन वाले चश्मों में हमेशा हरा रंग ही क्यों दिखाई देता है. आइए जानते हैं इसके पीछे क्या है टेक्नोलॉजी.
कैसे काम करते हैं Night Vision Goggles?
जानकारी के अनुसार, नाइट विजन वाले चश्मे अंधेरे में मौजूद सबसे कमजोर रौशनी को इकट्ठा करते हैं. इसके बाद ये डिवाइस उस रौशनी को कई गुना बढ़ा देते हैं. बता दें कि बहुत दूर जैसे चांद या तारों से आने वाली रौशनी इस चश्मे के अंदर जाती है. इसके बाद एक स्पेशल इमेज इंटेंसिफायर ट्यूब उस लाइट को इलेक्ट्रॉनों में बदलती है और उनकी संख्या को काफी ज्यादा बढ़ा देती है. इसके बाद इन्हीं इलेक्ट्रॉनों को स्क्रीन पर दिखा जाता है जिससे इंसानों को अंधेरे में भी चीजें साफ दिखाई देने लगती हैं.
हरा रंग ही क्यों चुना गया?
लेकिन सवाल ये है कि हमें केवल हरा रंग ही क्यों दिखाई देता है. दरअसल, बता दें कि वैज्ञानिकों के अनुसार, हमारी आंखों की बनावट ऐसी है कि हमें बाकी रंगों के मुकाबले हरा रंग ज्यादा आसानी से दिखाई देता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इंसान की आंखें हरे रंग को ज्यादा अच्छे से पहचान लेती हैं. इसीलिए लोगों को हरे रंग वाली फोटो ज्यादा क्लियर दिखाई पड़ती है.
आंखों पर पड़ता है कम दबाव
अब अगर नाइट विजन सिस्टम में सफेद या किसी दूसरे रंग का इस्तेमाल किया जाता है तो वह आपकी आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि अन्य रंगों को देखने के लिए आपकी आंखों को ज्यादा लोड लगाना पड़ेगा जिससे लंबे समय तक ऐसा करने से आंखें खराब भी हो सकती है. इसीलिए हरे रंग से आंखों पर भी कम दवाब पड़ता है.
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