क्या होता है Bluetooth Jammer? जानें भारत में इस्तेमाल करने के क्या हैं नियम
Bluetooth Jammer क्या है और यह कैसे वायरलेस सिग्नल में रुकावट पैदा करता है? आइए जानते हैं भारत में जैमर के इस्तेमाल से जुड़े नियम.

आज के समय में Bluetooth का इस्तेमाल स्मार्टफोन, वायरलेस ईयरफोन, स्पीकर, स्मार्टवॉच और कार इंफोटेनमेंट सिस्टम जैसे कई डिवाइस में होता है. ऐसे में आपने कभी न कभी Bluetooth Jammer के बारे में जरूर सुना होगा. ये एक ऐसा डिवाइस है जो वायरलेस कम्युनिकेशन में रुकावट डालने के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी सिग्नल का इस्तेमाल करता है. लेकिन सवाल ये है कि क्या कोई आम व्यक्ति इसे खरीदकर इस्तेमाल कर सकता है? आइए समझते हैं.
क्या होता है Bluetooth Jammer?
दरअसल, Bluetooth Jammer एक ऐसा डिवाइस होता है जो Bluetooth जैसे वायरलेस कम्यूनिकेशन में रुकावट डालने की कोशिश करता है. Bluetooth डिवाइस रेडियो तरंगों के जरिए आपस में कम्युनिकेशन करते हैं. Jammer इन सिग्नलों के आसपास रूकावट पैदा करता है जिससे कनेक्शन कमजोर या अस्थायी रूप से बाधित हो जाए.
हालांकि, किसी डिवाइस को प्रभावित करने की क्षमता jammer की टेक्नोलॉजी, पावर और डिजाइन पर निर्भर करती है. इसलिए हर jammer का असर एक जैसा नहीं होता है.
Bluetooth Jammer का इस्तेमाल क्यों किया जाता है?
Jamming टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कुछ स्पेशल कंडिशन में रजिस्टर्ड संस्थाओं या सुरक्षा संबंधी जरूरतों के लिए किया जा सकता है. जैसे ज्यादातर इनका इस्तेमाल संवेदनशील क्षेत्रों में वायरलेस संचार को कंट्रोल करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों द्वारा किया जाता है.
लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि कोई व्यक्ति बाजार से jammer खरीदकर अपनी सुविधा के लिए उसे कहीं भी चला सकता है. बिना परमिशन रेडियो कम्यूनिकेशन में रुकावट डालना दूसरे लोगों के कम्यूनिकेशन को भी प्रभावित कर सकता है.
भारत में क्या है नियम?
भारत में वायरलेस स्पेक्ट्रम और रेडियो डिवाइसों का नियमन सरकार के Department of Telecommunications (DoT) और उसके Wireless Planning & Coordination (WPC) Wing के दायरे में आता है. DoT के ऑफिशियल पोर्टल पर जामिंग डिवाइस को नॉर्मल वायरलेस प्रोडक्ट्स से अलग कैटेगरी में रखा गया है. इसके Equipment Type Approval (ETA) नियमों में भी jamming devices को उन प्रोडक्ट में शामिल किया गया है जिन पर नॉर्मल self-declaration प्रोसेस लागू नहीं होती है.
यह भी पढ़ें: कितने टाइप के होते हैं Bluetooth? जानें कौन-सा वाला किस काम आता है
इसका सीधा मतलब है कि Bluetooth या किसी दूसरे वायरलेस कम्युनिकेशन में रूकावट डालने वाले डिवाइस को नॉर्मल इलेक्ट्रॉनिक गैजेट समझकर इस्तेमाल करना उचित नहीं है. ऐसे डिवाइसों के निर्माण, इंपोर्ट, बिक्री और इस्तेमाल से जुड़े मामलों में संबंधित सरकारी परमिशन और नियम जरूरी होते हैं.
ऑनलाइन बिकने वाले Jammer से रहें सावधान
इंटरनेट पर कई तरह के signal jammer दिखाई देते हैं लेकिन ऑनलाइन मौजूद कोई भी प्रोडक्ट् उसे बिना परमिशन के इस्तेमाल करने की आजादी नहीं देता है. DoT के अनुसार jamming devices नॉर्मली ETA self-declaration के दायरे से बाहर हैं.
इसलिए केवल इसलिए कि कोई Bluetooth jammer किसी वेबसाइट या मार्केटप्लेस पर उपलब्ध है, उसे खरीदना या इस्तेमाल करना कानूनी रूप से सही नहीं माना जाता है.
आम यूजर्स के लिए क्या करना चाहिए?
अगर किसी जगह Bluetooth डिवाइस बार-बार डिस्कनेक्ट हो रहा है तो तुरंत jammer के इस्तेमाल के बजाय Bluetooth को दोबारा कनेक्ट करना, डिवाइस रीस्टार्ट करना, दूरी कम करना और आसपास के दूसरे वायरलेस डिवाइस को चेक करना चाहिए. कई बार रिस्टार्ट करने से भी ब्लूटूथ डिवाइस अपने आप ठीक से काम करने लगता है.
यह भी पढ़ें:
Web Cookies कितने समय तक रहती हैं? जानें लॉगआउट के बाद भी क्यों बना रहता है खतरा
























