अब देश में सोशल मीडिया यूज करना नहीं होगा आसान! सरकार लगाने वाली है ये नया नियम, डेटिंग और गेमिंग Apps पर लगेगा ताला
Social Media in India: भारत में सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के इस्तेमाल का तरीका आने वाले समय में काफी बदल सकता है.

Social Media in India: भारत में सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के इस्तेमाल का तरीका आने वाले समय में काफी बदल सकता है. एक संसदीय समिति ने सुझाव दिया है कि यूजर्स के अकाउंट को KYC यानी पहचान सत्यापन से जोड़ा जाए और उम्र की सख्त जांच लागू की जाए. खासतौर पर सोशल मीडिया, डेटिंग और गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर यह नियम लागू करने की बात कही गई है, जहां गलत इस्तेमाल की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं.
रिपोर्ट में क्या-क्या शामिल है?
यह सिफारिश महिला सशक्तिकरण से जुड़ी संसदीय समिति की चौथी रिपोर्ट (2025-26) का हिस्सा है जिसे हाल ही में संसद में पेश किया गया. इस रिपोर्ट में सिर्फ KYC ही नहीं, बल्कि डीपफेक कंटेंट पर रोक, डिजिटल फॉरेंसिक सिस्टम को मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने और पीड़ितों की मदद जैसे कई मुद्दों को भी शामिल किया गया है.
फिर भी, KYC को अनिवार्य बनाने का सुझाव सबसे ज्यादा चर्चा में है, क्योंकि इसका असर करोड़ों यूजर्स पर पड़ सकता है.
क्यों जरूरी मानी जा रही है KYC?
आज के समय में फर्जी अकाउंट, पहचान की चोरी, ऑनलाइन उत्पीड़न और गलत कंटेंट फैलाना आम होता जा रहा है. कई मामलों में असली व्यक्ति तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में अगर हर अकाउंट को असली पहचान से जोड़ा जाए, तो गलत काम करने वालों पर लगाम लग सकती है.
साथ ही, शिकायतों के समाधान में भी तेजी आ सकती है, जो अभी अक्सर काफी धीमी प्रक्रिया होती है.
सिर्फ एक बार नहीं, बार-बार होगी जांच
समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि सिर्फ एक बार KYC करने से काम नहीं चलेगा. समय-समय पर दोबारा वेरिफिकेशन किया जाए और जिन अकाउंट्स पर बार-बार शिकायत आती है, उन्हें चिन्हित किया जाए. इससे बार-बार नियम तोड़ने वाले यूजर्स को नए अकाउंट बनाकर वापस आने से रोका जा सकेगा.
प्राइवेसी और पहुंच को लेकर चिंता
हालांकि इस प्रस्ताव का मकसद सुरक्षा बढ़ाना है, लेकिन इसके साथ कुछ चिंताएं भी जुड़ी हुई हैं. ज्यादा डेटा कलेक्शन का मतलब है प्राइवेसी को खतरा, डेटा लीक या गलत इस्तेमाल का डर भी बढ़ सकता है.
इसके अलावा, हर किसी के पास जरूरी दस्तावेज नहीं होते जिससे कुछ लोग इन प्लेटफॉर्म्स से बाहर भी हो सकते हैं.
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल ये सिर्फ सुझाव हैं, इन्हें अभी लागू नहीं किया गया है. लेकिन अगर सरकार इन पर आगे बढ़ती है, तो भारत में ऑनलाइन दुनिया का अनुभव पूरी तरह बदल सकता है.
यह कदम सुरक्षा और जिम्मेदारी बढ़ाने की दिशा में अहम हो सकता है, लेकिन इसके साथ संतुलन बनाना भी उतना ही जरूरी होगा, ताकि यूजर्स की प्राइवेसी और पहुंच दोनों सुरक्षित रह सकें.
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Source: IOCL



























