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AI यूज करने से बढ़ सकता है आपके घर का बिजली बिल, एक्सपर्ट ने दी वॉर्निंग

AI Cost: हर बीतते दिन के साथ एआई का यूज बढ़ता जा रहा है. इस कारण डेटा सेंटर की डिमांड बढ़ रही है और डेटा सेंटर को भारी बिजली की जरूरत होती है. इसलिए एआई का यूज बिजली को महंगा कर सकता है.

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Key points generated by AI, verified by newsroom
  • एआई टूल्स की बढ़ती निर्भरता से बिजली बिल बढ़ने की आशंका है।
  • डेटा सेंटर भारी मात्रा में ऊर्जा खपत करते हैं, जिससे ग्रिड पर दबाव।
  • अनुमान है कि 2030 तक डेटा केंद्रों की खपत जापान से अधिक होगी।
  • बढ़ती ऊर्जा जरूरतों हेतु गाय के गोबर का उपयोग संभव बताया गया है।

AI Cost: एआई टूल्स हमारे जीवन का हिस्सा बन गए हैं. नाश्ते की रेसिपी से लेकर ऑफिस की प्रेजेंटेशन तक हर काम में इन टूल्स की मदद ली जा रही है. कई लोग इन टूल्स पर इतने निर्भर हो गए हैं कि इनके बिना उन्हें हर चीज मुश्किल लगती है. भले ही एआई टूल्स ने हमारे जीवन को आसान बना दिया है, लेकिन इसकी भी अपनी लागत है. एआई रिक्वेस्ट को प्रोसेस करने के लिए डेटा सेंटर की जरूरत पड़ती है और डेटा सेंटर को भारी मात्रा में बिजली चाहिए. अब एक एक्सपर्ट्स ने चेताया है कि एआई टूल्स का बढ़ता यूज आपके बिजली बिल को भी बढ़ा सकता है. 

एआई से कैसे बढ़ सकता है आपकी जेब पर बोझ?

टाइम्सनाऊ के मुताबिक, Penn State's Institute of Energy and Environment में प्रोफेसर Hannah Wiseman का कहना है कि एआई के कारण पावर ग्रिड को बढ़ाने डिमांड भी बढ़ रही है. उन्होंने बताया कि ऑनलाइन शॉपिंग से लेकर वीडियो गेमिंग और एआई के यूज तक हर ऑनलाइन एक्टिविटी के लिए डेटा सेंटर की जरूरत पड़ती है. अब ऐसे डेटा सेंटर बन गए हैं, जो एक मीडियम साइज के शहर के बराबर बिजली की खपत कर रहे हैं. इसलिए जब किसी इलाके में डेटा सेंटर लगता है तो कंपनियों को डिमांड पूरी करने के लिए एक्स्ट्रा ग्रिड का इंतजाम करना पड़ता है. इसकी लागत को पूरा करने के लिए बिजली कंपनियां बाकी यूजर्स के लिए भी बिजली के दाम बढ़ा सकती है. 

डेटा सेंटर के लिए कितनी बिजली की जरूरत?

एआई बूम के बाद डेटा सेंटर की संख्या तेजी से बढ़ रही है. इन्हें ऑपरेट करने के लिए बिजली की जरूरत होती है. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) का अनुमान है कि 2030 तक दुनियाभर के डेटा सेंटर को हर साल लगभग 945 terawatt-hours (TWh) बिजली की जरूरत होगी. यह जापान की कुल बिजली की खपत से ज्यादा है. यानी 4 साल बाद डेटा सेंटर को एक देश से ज्यादा बिजली की जरूरत पड़ेगी.

गाय के गोबर का लिया जा सकता है सहारा

डेटा सेंटर की बढ़ी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए गाय के गोबर का सहारा लिया जा सकता है. अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी के मुताबिक, गाय के गोबर से निकलने वाली मीथेन को कैप्चर कर इससे फ्यूल बनाया जा सकता है. इस गैस को पर्यावरण में मिलने देने की बजाय बिजली बनाने में यूज किया जा सकता है जो घरों, फैक्ट्रियों और डेटा सेंटर तक को पावर दे सकती है.

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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पढ़ाई पूरी करने के बाद पिछले एक दशक से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय हूं. फिलहाल एबीपी न्यूज के साथ काम कर रहा हूं और यहां टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों, गैजेट्स, ऐप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया और डिजिटल ट्रेंड्स पर लिख रहा हूं. फ्यूचर टेक, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया से जुड़े टॉपिक्स में विशेष रुचि है. पिछले 10 वर्षों में नेशनल, पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, ऑटो, बिजनेस और टेक समेत कई बीट्स पर काम करने का अनुभव रहा है. इस दौरान टाइम्स इंटरनेट, दैनिक जागरण और न्यूजबाइट्स जैसे कई मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. 

विभिन्न बीट्स पर काम करने के अनुभव ने खबरों को अलग-अलग नजरिए से समझने और पेश करने की समझ दी. रिपोर्टिंग और कंटेंट लिखने के दौरान हमेशा कोशिश रही कि खबरों को आसान और भरोसेमंद तरीके से रीडर तक पहुंचाया जाए. 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान ग्राउंड रिपोर्टिंग करने और कई नेताओं के इंटरव्यू लेने का भी अवसर मिला. 

काम के सिलसिले में कई बड़े कार्यक्रमों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और विशेष आयोजनों को कवर करने का मौका मिला, जहां अलग-अलग पहलुओं को समझने का अवसर मिला. डिजिटल मीडिया के लगातार बदलते दौर में नई चीजें सीखने और खुद को अपडेट रखने की कोशिश रहती है, ताकि कंटेंट को बेहतर और रीडर के समझने के लिए आसान बनाया जा सके.

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