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गाय के गोबर से मिलेगी एआई डेटा सेंटर को पावर, अमेरिका में चल रही तैयारी

Data Centre Power Problem: एआई डेटा सेंटर पानी के साथ-साथ बिजली की भी खूब खपत कर रहे हैं. इस खपत को पूरा करने के लिए अब गाय के गोबर को समाधान के तौर पर देखा जा रहा है.

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  • AI बूम से डेटा सेंटरों की बिजली मांग बढ़ रही है।
  • गाय का गोबर इस बढ़ती ऊर्जा जरूरत का समाधान बन सकता है।
  • मीथेन को कैप्चर कर नवीकरणीय प्राकृतिक गैस (RNG) बनेगी।
  • यह RNG डेटा सेंटरों को सतत बिजली प्रदान कर सकेगी।

Data Centre Power Problem: एआई बूम के बाद डेटा सेंटर की डिमांड बढ़ गई है और कंपनियां इस पर भारी निवेश कर रही हैं. पानी के साथ-साथ डेटा सेंटर को बड़ी मात्रा में बिजली की भी जरूरत पड़ती है. इसके कारण ग्रिड पर लोड लगातार बढ़ रहा है और इससे बचने के लिए कंपनियां अब दूसरे पावर सोर्सेस की तरफ नजर डाल रही हैं. यह सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन कंपनियों को गाय के गोबर में बिजली की लगातार बढ़ती जरूरत का समाधान नजर आ रहा है. आइए जानते हैं कि कैसे गाय के गोबर से डेटा सेंटर की एनर्जी नीड्स पूरी हो सकती हैं.

डेटा सेंटर को कितनी बिजली की जरूरत?

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) का अनुमान है कि 2030 तक डेटा सेंटर को हर साल लगभग 945 terawatt-hours (TWh) बिजली की जरूरत होगी. यह जापान की कुल बिजली की खपत से ज्यादा है. यह खपत आज की तुलना में दोगुनी होगी और इसके पीछे सबसे बड़ी जिम्मेदार एआई होगी.

कैसे गाय के गोबर से बनी बिजली से डेटा सेंटर को मिलेगी पावर?

इसका जवाब renewable natural gas (RNG) में छिपा हुआ है. TOI की रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी के मुताबिक, गाय के गोबर से निकलने वाली मीथेन को कैप्चर कर इससे फ्यूल बनाया जा सकता है. इस गैस को पर्यावरण में मिलने देने की बजाय बिजली बनाई जा सकती है, जो घरों, फैक्ट्रियों और डेटा सेंटर तक को पावर दे सकती है. कहा जा रहा है कि इससे मीथेन एमिशन में भी कमी आएगी और एआई के दौर में डेटा सेंटर की बढ़जी ऊर्जा जरूरतें भी पूरी हो पाएंगी.

गाय का गोबर कैसे पूरी करेगा यह जरूरत?

जब गाय का गोबर डिकम्पोज होता है तो इससे मीथेन गैस रिलीज होती है. इसे ग्रीनहाउस गैस माना जाता है और यह कार्बन डाइऑक्साइड से भी खतरनाक होती है. इंटरगवर्नमेंट पैनल ऑफ क्लाइमेट चेंज (IPCC) का कहना है कि 100 साल के पीरियड में मीथेन कॉर्बन डाइऑक्साइड की तुलना में ग्लोबल वॉर्मिंग को 28 गुना तक बढ़ा सकती है. अब इस मीथेन को हवा में घुलने देने की बजाय इससे बिजली बनाने पर विचार हो रहा है. गाय के गोबर से पैदा हुई मीथेन को साफ करने के बाद यह एक तरीके से renewable natural gas बन जाती है. इसे पाइपलाइन के जरिए पावर स्टेशन तक पहुंचाया जा सकता है. इसके लिए किसी नए इंफ्रास्ट्रक्चर की भी जरूरत नहीं पड़ेगी. पावर स्टेशन से बिजली डेटा सेंटर तक पहुंच जाएगी. सोलर और विंड एनर्जी सिस्टम मौसम पर निर्भर होते हैं, लेकिन यह तरीका बिना रुके लगातार बिजली सप्लाई कर पाएगा.

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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पढ़ाई पूरी करने के बाद पिछले एक दशक से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय हूं. फिलहाल एबीपी न्यूज के साथ काम कर रहा हूं और यहां टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों, गैजेट्स, ऐप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया और डिजिटल ट्रेंड्स पर लिख रहा हूं. फ्यूचर टेक, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया से जुड़े टॉपिक्स में विशेष रुचि है. पिछले 10 वर्षों में नेशनल, पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, ऑटो, बिजनेस और टेक समेत कई बीट्स पर काम करने का अनुभव रहा है. इस दौरान टाइम्स इंटरनेट, दैनिक जागरण और न्यूजबाइट्स जैसे कई मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. 

विभिन्न बीट्स पर काम करने के अनुभव ने खबरों को अलग-अलग नजरिए से समझने और पेश करने की समझ दी. रिपोर्टिंग और कंटेंट लिखने के दौरान हमेशा कोशिश रही कि खबरों को आसान और भरोसेमंद तरीके से रीडर तक पहुंचाया जाए. 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान ग्राउंड रिपोर्टिंग करने और कई नेताओं के इंटरव्यू लेने का भी अवसर मिला. 

काम के सिलसिले में कई बड़े कार्यक्रमों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और विशेष आयोजनों को कवर करने का मौका मिला, जहां अलग-अलग पहलुओं को समझने का अवसर मिला. डिजिटल मीडिया के लगातार बदलते दौर में नई चीजें सीखने और खुद को अपडेट रखने की कोशिश रहती है, ताकि कंटेंट को बेहतर और रीडर के समझने के लिए आसान बनाया जा सके.

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