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एकदम सस्ते हो जाएंगे सोलर पैनल, वैज्ञानिकों के हाथ लगी यह बड़ी कामयाबी

Solar Panel Cost: आने वाले वर्षों में सोलर पैनल की कीमत आज की तुलना में काफी कम हो सकती है. इसके लिए वैज्ञानिकों ने एक नई तरह की सोलर सेल बनाई है.

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  • वैज्ञानिकों ने एक नई, उच्च-कुशल सौर सेल बनाई है।
  • यह दुर्लभ इंडियम की जगह सस्ते टिन का उपयोग करती है।
  • लैब परीक्षणों में 31% दक्षता, पैनलों को टिकाऊ बनाती है।
  • यह खोज इंडियम पर निर्भरता की चुनौती दूर करेगी।

Solar Panel Cost: सोलर पैनल लगवाना जल्द ही सस्ता हो सकता है. वैज्ञानिकों ने एक नई तरह की हाई-एफिशिएंसी सोलर सेल तैयार की है. इसमें महंगे और दुर्लभ मेटल माने जाने Indium की जगह tin को यूज किया जा सकता है. इससे सोलर पैनल बनाने की लागत बहुत हद तक कम हो जाएगी. इसका एक और फायदा यह भी है कि इसे बड़े स्तर पर मैन्युफैक्चर किया जा सकता है. साइंस जर्नल में पब्लिश रिसर्च के मुताबिक, यह दुनिया की पहली कमर्शियल साइज की टेंडेम सोलर सेल है, जो बिना इंडियम के भी शानदार परफॉर्मेंस दे सकती है. इसे सोलर टेक्नोलॉजी की दुनिया में सबसे बड़े विकास के तौर पर देखा जा रहा है.

ऐसे कम कीमत में तैयार होंगे सोलर पैनल

नई सोलर सेल में वैज्ञानिकों ने tin oxide का इस्तेमाल किया है. इंडियम के मुकाबले यह एकदम सस्ता है और आसानी से उपलब्ध भी हो जाता है. इससे भविष्य में आने वाले सोलर पैनल को सस्ता बनाने में मदद मिलेगी और यह सेल ज्यादा एफिशिएंट भी होगी. इसका मतलब है कि फ्यूचर के सोलर पैनल कम कीमत भी मिलेंगे और ये ज्यादा बिजली भी जनरेट करेंगे. टेंडेम सेल्स में दो अलग-अलग लाइट-अब्जॉर्बिंग मैटेरियल लगे होते हैं, जो अलग-अलग स्पेक्ट्रम वाली सनलाइट को कैप्चर कर उससे बिजली पैदा करते हैं.

कैसे काम करेगी नई टेक्नोलॉजी?

नई टेक्नोलॉजी में वैज्ञानिकों ने रिएक्टिव प्लाज्मा डिपॉजिशन नाम की तकनीक का यूज किया है. इसमें सोलर सेल के भीतर टिन ऑक्साइड की एक पतली लेयर को एड किया जाता है. इस तरीके से सोलर पैनल की एफिशिएंसी में भी खूब उछाल देखा गया. कमर्शियल साइज के मिनी-मॉड्यूल ने लैब टेस्ट में 31 प्रतिशत की एफिशिएंसी दिखाई है. वैज्ञानिकों ने यह भी पाया है कि नई तरीके से सोलर सेल ज्यादा ड्यूरेबल भी हैं. गर्मी, नमी और लगभग तीन महीनों तक के आउटडोर ऑपरेशन के बाद इनकी परफॉर्मेंस में गिरावट नहीं आई. 

इस चुनौती से निपटने में मिलेगी मदद

अभी तक टेंडेम सोलर सेल्स को बनाने में इंडियम-बेस्ड मैटेरियल का यूज किया जाता था. इंडियम को टचस्क्रीन, फ्लैट-पैनल डिस्प्ले और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस में भी इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि, यह रेयर मेटल है और लगातार इसकी डिमांड बढ़ रही है. दूसरी तरफ सोलर पैनल की डिमांड में भी भारी इजाफा हुआ है. ऐसे में इंडियम पर निर्भरता आगे चलकर मुश्किल खड़ी कर सकती थी. अब नई खोज इस चुनौती से पार पाने में मदद कर सकती है.

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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पढ़ाई पूरी करने के बाद पिछले एक दशक से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय हूं. फिलहाल एबीपी न्यूज के साथ काम कर रहा हूं और यहां टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों, गैजेट्स, ऐप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया और डिजिटल ट्रेंड्स पर लिख रहा हूं. फ्यूचर टेक, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया से जुड़े टॉपिक्स में विशेष रुचि है. पिछले 10 वर्षों में नेशनल, पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, ऑटो, बिजनेस और टेक समेत कई बीट्स पर काम करने का अनुभव रहा है. इस दौरान टाइम्स इंटरनेट, दैनिक जागरण और न्यूजबाइट्स जैसे कई मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. 

विभिन्न बीट्स पर काम करने के अनुभव ने खबरों को अलग-अलग नजरिए से समझने और पेश करने की समझ दी. रिपोर्टिंग और कंटेंट लिखने के दौरान हमेशा कोशिश रही कि खबरों को आसान और भरोसेमंद तरीके से रीडर तक पहुंचाया जाए. 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान ग्राउंड रिपोर्टिंग करने और कई नेताओं के इंटरव्यू लेने का भी अवसर मिला. 

काम के सिलसिले में कई बड़े कार्यक्रमों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और विशेष आयोजनों को कवर करने का मौका मिला, जहां अलग-अलग पहलुओं को समझने का अवसर मिला. डिजिटल मीडिया के लगातार बदलते दौर में नई चीजें सीखने और खुद को अपडेट रखने की कोशिश रहती है, ताकि कंटेंट को बेहतर और रीडर के समझने के लिए आसान बनाया जा सके.

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