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आपके फोन में छिपे हैं 'जासूस', तुरंत डिलीट करें डेटा चुरानी वाली ये ऐप्स

Mobile Apps Permission: आपके मोबाइल में इंस्टॉल्ड ऐप्स जरूरत से ज्यादा डेटा कलेक्ट कर रही हैं. परमिशन के कारण ये ऐप्स डेटा कलेक्ट कर थर्ड-पार्टीज को बेचती हैं.

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  • मोबाइल ऐप्स अक्सर अत्यधिक परमिशन मांगकर उपयोगकर्ता का डेटा एकत्र करती हैं।
  • लाइफस्टाइल, नेविगेशन ऐप्स निजी जानकारी बेचकर प्राइवेसी को खतरे में डालती हैं।
  • शॉपिंग ऐप्स भी अनावश्यक डेटा लेकर उपयोगकर्ता की ऑनलाइन गतिविधियों को ट्रैक करती हैं।
  • एंड्रॉइड/आईफोन सेटिंग्स में जाकर उपयोगकर्ता अपनी ऐप्स की परमिशन की समीक्षा करें।

Mobile Apps Permission: आजकल हर काम के लिए ऐप अवेलेबल है. घर बैठे खाना मंगाना हो या कॉन्सर्ट की टिकट बुक करनी हो, आप घर बैठे-बैठे मोबाइल ऐप्स से ये सारे काम कर सकते हैं. इस कारण हमारे फोन में समय के साथ ऐप्स की संख्या बढ़ती जाती है. कई बार हम ऐप इंस्टॉल करते समय परमिशन पर ज्यादा ध्यान नहीं देते और सब कुछ Allow करते जाते हैं. ऐसा करना खतरनाक हो सकता है क्योंकि इस तरीके से ऐप्स आपका डेटा कलेक्ट करती रहती हैं. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि कौन-सी मोबाइल ऐप्स जरूरत से ज्यादा परमिशन मांगती और डेटा कलेक्ट करती हैं.

लाइफस्टाइल एंड हेल्थ ऐप्स

स्लीप एनालिसिस, स्टेप काउंटिंग और कैलोरी ट्रैकिंग जैसी ऐप्स जरूरी लगती हैं, लेकिन ये अकसर जरूरत से ज्यादा परमिशन मांगती हैं. इन ऐप्स को माइक्रोफोन, फोटोज और कॉन्टैक्ट की जरूरत नहीं होती, लेकिन फिर भी कई ऐप्स ये परमिशन मांगती हैं. यूरोपीय कानून के तहत हेल्थ-रिलेटेड डेटा को स्पेशल प्रोटेक्शन की जरूरत होती है. इसके बावजूद कई ऐप्स पर यूजर डेटा को थर्ड-पार्टीज को बेचने का आरोप लगा है.

नेविगेशन ऐप्स

गूगल मैप्स जैसी ऐप्स को डायरेक्शन बताने के लिए लोकेशन की जरूरत पड़ती है, लेकिन इन ऐप्स के साथ दूसरी प्रॉब्लम्स जुड़ी हुई हैं. कई नेविगेशन ऐप्स यूजर की फुल लोकेशन हिस्ट्री स्टोर कर इसे एनालाइज करती हैं. इस डेटा की मदद से यह पता लगाया जा सकता है कि आप घर से कब निकलते हैं, किस डॉक्टर के पास जाते हैं और किस स्टोर से शॉपिंग करते हैं. एडवरटाइजर के लिए यह डेटा बहुत काम का साबित हो सकता है.

शॉपिंग ऐप्स

शॉपिंग ऐप्स पर भी जरूरत से ज्यादा परमिशन लेने के आरोप लगते हैं. कई बार लोग यह शिकायत करते हैं कि वो जिस प्रोडक्ट के बारे में अपने दोस्तों से बात कर रहे थे, वही प्रोडक्ट कुछ देर बाद उन्हें सजेशन में दिखने लगता है. यह महज संयोग नहीं हो सकता. इसलिए अपने मोबाइल में ज्यादा शॉपिंग ऐप्स इंस्टॉल्ड न रखें. अगर आप पहले से इंस्टॉल्ड किसी ऐप को यूज नहीं कर रहे हैं तो इसे डिलीट कर देना बेहतर ऑप्शन है.

कहां से देखें परमिशन?

अगर आप एंड्रॉयड फोन यूज कर रहे हैं तो सेटिंग में जाकर ऐप्स पर टैप करें. लिस्ट में किसी एक ऐप को सेलेक्ट कर इसकी परमिशन रिव्यू की जा सकती है. वहीं आईफोन यूजर्स सेटिंग में जाकर प्राइवेसी एंड सिक्योरिटी सेक्शन को ओपन करें. यहां आपको सारी परमिशन कैटेगरी नजर आ जाएगी. किसी भी कैटेगरी पर ओपन कर यह देखा जा सकता है कि कौन-कौन-सी ऐप इस परमिशन को एक्सेस कर पा रही है.

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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पढ़ाई पूरी करने के बाद पिछले एक दशक से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय हूं. फिलहाल एबीपी न्यूज के साथ काम कर रहा हूं और यहां टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों, गैजेट्स, ऐप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया और डिजिटल ट्रेंड्स पर लिख रहा हूं. फ्यूचर टेक, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया से जुड़े टॉपिक्स में विशेष रुचि है. पिछले 10 वर्षों में नेशनल, पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, ऑटो, बिजनेस और टेक समेत कई बीट्स पर काम करने का अनुभव रहा है. इस दौरान टाइम्स इंटरनेट, दैनिक जागरण और न्यूजबाइट्स जैसे कई मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. 

विभिन्न बीट्स पर काम करने के अनुभव ने खबरों को अलग-अलग नजरिए से समझने और पेश करने की समझ दी. रिपोर्टिंग और कंटेंट लिखने के दौरान हमेशा कोशिश रही कि खबरों को आसान और भरोसेमंद तरीके से रीडर तक पहुंचाया जाए. 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान ग्राउंड रिपोर्टिंग करने और कई नेताओं के इंटरव्यू लेने का भी अवसर मिला. 

काम के सिलसिले में कई बड़े कार्यक्रमों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और विशेष आयोजनों को कवर करने का मौका मिला, जहां अलग-अलग पहलुओं को समझने का अवसर मिला. डिजिटल मीडिया के लगातार बदलते दौर में नई चीजें सीखने और खुद को अपडेट रखने की कोशिश रहती है, ताकि कंटेंट को बेहतर और रीडर के समझने के लिए आसान बनाया जा सके.

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