Explained: 380 दिन के किसान और 103 के एंटी CAA से बड़ा छात्र आंदोलन! इन दोनों से ज्यादा CJP को जन समर्थन क्यों?
CJP Protest: यह आंदोलन उस पीढ़ी का आंदोलन है, जिसके पास खोने के लिए सब कुछ है, लेकिन जीतने के लिए और भी ज्यादा. CJP आंदोलन CAA और किसान आंदोलन से ज्यादा गहरा है. यह इतनी आसानी से खत्म नहीं होगा.

भारत ने पिछले 7 सालों में कई बड़े आंदोलन देखे हैं. 2019-20 का CAA विरोध, 2020-21 का किसान आंदोलन और 2026 का CJP आंदोलन. तीनों ने दिल्ली की सड़कों को अपना गवाह बनाया, तीनों ने सरकार के खिलाफ आवाज उठाई, लेकिन तीनों के स्वर, स्वरूप और प्रभाव में एक बुनियादी फर्क है. एक ऐसा फर्क जो CJP आंदोलन को पिछले सभी आंदलनों से अलग और गहरा बनाता है. तो आइए तीनों आंदोलनों की तुलना 6 बड़े मापदंडों पर करेंगे. फिर समझ आएगा कि CJP आंदोलन क्यों एक पूरी पीढ़ी का विद्रोह बन गया है...
पहला मापदंड: व्यवस्था बदलो बनाम कानून बदलो मांग
CAA विरोध और किसान आंदोलन कानूनों के खिलाफ थे. CAA विरोध में मांग थी कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और NRC को वापस लिया जाए. किसान आंदोलन में मांग थी कि तीन कृषि कानूनों को निरस्त किया जाए और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी दी जाए. दोनों ही आंदोलन किसी खास कानूनों को टारगेट कर रहे थे.
CJP आंदोलन की मांग सिर्फ शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं है, बल्कि यह पूरी शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और जवाबदेही के तंत्र पर सवाल है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बार-बार पेपर लीक की घटनाओं ने जनता का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा खत्म कर दिया है. यह किसी एक कानून के खिलाफ नहीं, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था के खिलाफ है जो बार-बार नाकाम हो रही है. इसका खामियाजा देश के युवाओं को भुगतना पड़ रहा है.
दूसरा मापदंड: समुदाय बनाम पूरी पीढ़ी की लड़ाई
CAA विरोध में एक विशेष समुदाय (मुस्लिम) की चिंता थी. शाहीन बाग में मुख्य रूप से मुस्लिम महिलाओं ने 15 दिसंबर 2019 से 24 मार्च 2020 तक धरना दिया. किसान आंदोलन में एक विशेष पेशा (किसान) की चिंता थी. 26 नवंबर 2020 से 380 दिनों तक चले इस आंदोलन में पंजाब, हरियाणा, पश्चिम उत्तर प्रदेश के किसान शामिल थे.
CJP आंदोलन हर उस परिवार की चिंता है, जिसका कोई बच्चा NEET, JEE या किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा है. NEET-UG 2026 के पेपर लीक ने 22 लाख से ज्यादा छात्रों को प्रभावित किया. परीक्षा रद्द होने से मानसिक तनाव, एडमिशन में देरी और परिवारों पर वित्तीय बोझ पड़ा. फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) की एंट्रेंस एग्जाम का पेपर भी लीक हुआ. यह आंदोलन किसी एक समुदाय या पेशे तक सीमित नहीं है. यह हर उस भारतीय परिवार तक जाता है, जिसने अपने बच्चे का भविष्य शिक्षा व्यवस्था को सौंपा है.
तीसरा मापदंड:गुस्सा बनाम निराशा और भरोसा टूटने का दर्द
CAA विरोध में एक कानून के खिलाफ गुस्सा था, जिसे भेदभावपूर्ण माना गया. किसान आंदोलन में आक्रोश था. अपनी आजीविका छिनने के खिलाफ, इस डर से कि नए कानून MSP को खत्म कर देंगे.
CJP आंदोलन में एक ऐसी व्यवस्था से निराशा है, जो बार-बार विफल हो रही है. प्रदर्शनकारियों का कहना है, 'जो लोग जिम्मेदारी के पद पर हैं, उन्हें अपनी गलतियां माननी चाहिए और बताना चाहिए कि वे उन्हें दोबारा होने से कैसे रोकेंगे.' एक प्रतिभागी के मुताबिक, 'अगर कोई बार-बार अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहता है, तो जवाबदेही होनी चाहिए.' यह निराशा उन युवाओं की है, जिन्होंने अभी-अभी अपना भविष्य बनाना शुरू किया है. उन्हें लगता है कि उनका भविष्य किसी और के हाथों में बंधक बना लिया गया है.
चौथा मापदंड: एक चेहरा बनाम कई लीडर्स वाला आंदोलन
CAA विरोध में शाहीन बाग की महिलाओं और जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों के स्पष्ट चेहरे थे. किसान आंदोलन में राकेश टिकैत, दर्शन पाल और गुरनाम सिंह चढ़ूनी जैसे स्पष्ट नेता थे.
CJP आंदोलन में सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके जैसे चेहरे हैं, लेकिन यह आंदोलन लीडरशिप से परे है. 28 जून 2026 को सोनम वांगचुक ने जंतर-मंतर पर आमरण अनशन शुरू किया. लेकिन इसके साथ देशभर के छात्र, पेशेवर, सेवानिवृत्त लोग और युवा जुड़े.
चंडीगढ़, हैदराबाद, बेंगलुरु, शिलांग, मेघालय में छात्रों ने प्रदर्शन किए. NALSAR यूनिवर्सिटी के छात्रों ने एक समय का उपवास रखा. FTII के छात्रों ने समर्थन दिया. यह खुद युवाओं का आंदोलन है, जहां हर छात्र, हर अभिभावक, हर शिक्षक अपने आप में एक नेता है.
पांचवां मापदंड: बातचीत बनाम मौन और बल पर सरकार की प्रतिक्रिया
CAA विरोध के दौरान सरकार ने कई दौर की बातचीत की, हालांकि वह नाकाम रही. किसान आंदोलन में सरकार ने 11 दौर की वार्ता की और आखिरकार 19 नवंबर 2021 को प्रधानमंत्री ने तीनों कानून वापस लेने की घोषणा की. 29 नवंबर 2021 को संसद ने फार्म लॉ रिपील बिल 2021 पास किया.
CJP आंदोलन में सरकार ने बातचीत से साफ इनकार कर दिया. FTII छात्र संघ के मुताबिक, 'हम केंद्र सरकार की उस कमजोरी की निंदा करते हैं, जिसने छात्रों से बातचीत करने की भी कोशिश नहीं की.' 18 जुलाई 2026 को सोनम वांगचुक को 21वें दिन जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया. 20 जुलाई 2026 को 'चलो संसद' मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया. 118 पुलिसकर्मी घायल हुए. FTII छात्र संघ ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस के अत्याचार की निंदा की.
छठा मापदंड : नेशनल बनाम डिजिटल मीडिया कवरेज
CAA विरोध और किसान आंदोलन को मुख्यधारा मीडिया ने बड़े पैमाने पर कवर किया. CJP आंदोलन की शुरुआत सोशल मीडिया से हुई. CJP के इंस्टाग्राम पेज पर 22 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. 6.3 लाख से ज्यादा X पोस्ट और 8.3 मिलियन से ज्यादा इंटरैक्शन हुए. लेकिन CJP आंदोलन की डिजिटल पहुंच CAA और किसान आंदोलन से कहीं ज्यादा व्यापक है, क्योंकि यह सीधे युवाओं तक पहुंच रहा है. युवा ही आज डिजिटल स्पेस के सबसे बड़े उपभोक्ता हैं. मीडिया ने भी इस आंदोलन को देर से कवर किया, लेकिन जब कवर किया, तो चंडीगढ़, हैदराबाद, बेंगलुरु और शिलांग जैसे शहरों से रिपोर्ट्स आईं.
इसके अलावा CAA विरोध 15 दिसंबर 2019 से 24 मार्च 2020 तक चला यानी 101 दिन. किसान आंदोलन 26 नवंबर 2020 से 9 दिसंबर 2021 तक चला यानी 380 दिन. वहीं, CJP आंदोलन 28 जून 2026 से शुरू हुआ. 22 जुलाई 2026 तक 25 दिन हो चुके हैं. लेकिन यह आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा. सोनम वांगचुक अभी भी अस्पताल में अनशन पर हैं. देशभर के छात्र जुट रहे हैं.























