Meta on CSEAM: सरकार की सख्ती के बाद Meta की सफाई, बताया- बच्चों के यौन शोषण कंटेंट पर क्या की कार्रवाई?
भारत सरकार के नोटिस के बाद Meta ने बच्चों के यौन शोषण (CSEAM) कंटेंट पर अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट जारी की है. जानें इंस्टाग्राम विवाद पर कंपनी ने क्या कहा?

मेटा ने मंगलवार (7 जुलाई) को एक विस्तृत ब्लॉग जारी करके बताया कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण और उत्पीड़न से जुड़े कंटेंट के खिलाफ क्या कार्रवाई कर रही है? कंपनी का यह ब्लॉग ऐसे समय आया है, जब केंद्र सरकार ने इंस्टाग्राम पर चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लॉयटेटिव एंड एब्यूज मटेरियल (CSEAM) से जुड़े विज्ञापनों की खबरों के बाद मेटा को नोटिस भेजा.
मेटा ने ब्लॉग में कहा कि बच्चों का यौन शोषण बेहद गंभीर अपराध है और कंपनी हर दिन अपने प्लेटफॉर्म पर ऐसे कंटेंट के खिलाफ कार्रवाई करती है. कंपनी ने कहा कि उसे भारत में इंस्टाग्राम विज्ञापनों को लेकर आई हालिया खबरों की जानकारी है. अगर कोई विज्ञापन या कंटेंट उसकी नीतियों का उल्लंघन करता है तो उसे प्लेटफॉर्म पर जगह नहीं दी जाती.
आंकड़ों में मेटा की कार्रवाई
मेटा ने दावा किया कि पिछले एक साल में उसने दुनिया भर में फेसबुक और इंस्टाग्राम से 40 लाख से ज्यादा संदिग्ध अकाउंट हटाए. इसके अलावा बच्चों के यौन शोषण से जुड़े 3.60 करोड़ से ज्यादा कंटेंट भी हटाए गए. भारत के बारे में कंपनी ने कहा कि पिछले छह महीने में एआई टूल्स की मदद से 1.60 लाख ऐसे अकाउंट हटाए गए, जो बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों वाले लिंक शेयर कर रहे थे.
कंपनी के मुताबिक अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच फेसबुक और इंस्टाग्राम से बच्चों के यौन शोषण से जुड़े 1 करोड़ 30 लाख कंटेंट हटाए गए. इनमें से 96 फीसदी से ज्यादा कंटेंट को किसी यूजर की शिकायत आने से पहले ही कंपनी ने खुद पहचानकर हटा दिया.
आरोपों को किया खारिज
मेटा ने उन आरोपों को भी गलत बताया, जिनमें कहा गया था कि कंपनी जानबूझकर बच्चों से जुड़े विज्ञापन ऐसे लोगों को दिखाती है जिनकी बच्चों में गलत रुचि हो. कंपनी ने कहा कि उसका सिस्टम ऐसे संदिग्ध अकाउंट की पहचान करने और उन पर कार्रवाई करने के लिए बनाया गया है.
कंपनी का कहना है कि उसके सिस्टम ने कई नियम तोड़ने वाले विज्ञापनों और उनसे जुड़े अकाउंट्स को पहले ही पकड़ लिया था. बाद में जांच के दौरान और विज्ञापन हटाए गए कई अकाउंट बंद किए गए और आपत्तिजनक कंटेंट से जुड़े यूआरएल भी ब्लॉक किए गए.
कानूनी एजेंसियों को भी भेजी जाती है जानकारी
मेटा ने कहा कि जब भी उसे बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा मामला मिलता है तो वह इसकी जानकारी अमेरिका की संस्था NCMEC को देती है. भारत में यह जानकारी NCMEC के जरिए राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल तक पहुंचती है. कंपनी का दावा है कि वह इस तरह के मामलों की रिपोर्ट किसी भी दूसरी टेक कंपनी से ज्यादा करती है.
मेटा ने यह भी बताया कि वह टेक कोएलिशन के लैंटर्न प्रोग्राम की संस्थापक सदस्य है. इस प्रोग्राम के तहत टेक कंपनियां संदिग्ध अकाउंट्स की जानकारी एक-दूसरे के साथ साझा करती हैं. कंपनी के मुताबिक, 2025 के अंत तक इस प्रोग्राम के जरिए 20 लाख से ज्यादा सिग्नल साझा किए गए, जिनसे 3 लाख 50 हजार से ज्यादा कार्रवाई हुई.
क्या है पूरा मामला?
पूरा विवाद एक मीडिया रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ. रिपोर्ट में दावा किया गया था कि इंस्टाग्राम पर ऐसे पेड विज्ञापन चल रहे थे, जो बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को बढ़ावा दे रहे थे और यूजर्स को दूसरे प्लेटफॉर्म पर भेज रहे थे.
इसके बाद केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों को मेटा को तलब करने का निर्देश दिया. मंत्रालय ने 4 जुलाई को मेटा को नोटिस जारी कर CSEAM से जुड़े सभी विज्ञापन और कंटेंट तुरंत हटाने का आदेश दिया था. साथ ही, कंपनी से 7 दिन के भीतर विस्तृत जवाब भी मांगा गया.
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस नोटिस पर मेटा का औपचारिक जवाब अभी नहीं आया है. ऐसे में मंगलवार को जारी किया गया यह ब्लॉग कंपनी का सार्वजनिक पक्ष माना जा रहा है, जबकि मंत्रालय को दिया जाने वाला आधिकारिक जवाब अभी आना बाकी है.
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