Instagram पर मचा बवाल, Meta ने चुपचाप हटा दिया AI इमेज फीचर, जानिए क्या है पूरा मामला
Instagram AI Feature: Meta ने अपने आधिकारिक ब्लॉग में बताया कि कंपनी ने इस फीचर को यूजर्स को एक नया क्रिएटिव टूल देने के मकसद से लॉन्च किया था.

- उपयोगकर्ता विरोध के बाद मेटा ने 'म्यूज' फीचर हटा दिया।
Instagram AI Feature: इंस्टाग्राम देश में काफी ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बन चुका है. कुछ लोग रील्स देखने के लिए तो कुछ पोस्ट या फॉलोअर्स से कनेक्ट करने के लिए इस ऐप का इस्तेमाल करते हैं. इसी बीच मेटा ने कुछ समय पहले ही इस ऐप में एआई जनरेशन टूल Muse को रोलआउट किया था. लेकिन अब इस टूल का काफी विरोध हो रहा है. लोगों में इस टूल को लेकर बढ़ते विरोध को देखते हुए मेटा ने चुपचाप इस फीचर को प्लेटफॉर्म से हटा दिया है. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.
क्या है फीचर हटाने की वजह
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, Meta ने अपने आधिकारिक ब्लॉग में बताया कि कंपनी ने इस फीचर को यूजर्स को एक नया क्रिएटिव टूल देने के मकसद से लॉन्च किया था. इसके अलावा इस टूल के जरिए यूजर ये तय कर सकता था कि उसकी पोस्ट एआई के लिए इस्तेमाल की जा सकती है या नहीं. लेकिन यूजर्स का विरोध बताता है कि ये फीचर उनके उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया है. इसीलिए फिलहाल इस फीचर को प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है. हालांकि, Muse Image का बाकी AI इमेज जनरेशन सिस्टम पहले की तरह उपलब्ध रहेगा.
भारत सरकार ने क्या कहा?
इस मामले पर भारत सरकार ने भी गंभीर रुख अपनाया है. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय यानि MeitY ने कहा कि सरकार इस फीचर की जांच करेगी. उन्होंने कहा कि अगर शिकायतें मिली हैं तो पूरे मामले को भारत के कानूनों के तहत देखा जाएगा.
भारत के लिए यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि सरकार पिछले कुछ समय से डीपफेक और बिना अनुमति AI से बनाई गई तस्वीरों पर सख्ती दिखा रही है. इससे पहले भी AI टूल्स को लेकर सरकार कई कंपनियों से जवाब मांग चुकी है.
दुनिया भर में हुआ विरोध
इस फीचर का विरोध सिर्फ आम लोगों ने ही नहीं किया. अमेरिका की कलाकारों की यूनियन SAG-AFTRA ने अपने सदस्यों को सावधान रहने की सलाह दी. बड़ी टैलेंट एजेंसी CAA ने कहा कि किसी व्यक्ति का चेहरा, नाम, आवाज या तस्वीर उसकी साफ अनुमति के बिना AI मॉडल में इस्तेमाल नहीं होनी चाहिए. प्राइवेसी से जुड़े कई संगठनों ने भी Meta की आलोचना करते हुए कहा कि AI कंपनियां लोगों की निजी तस्वीरों को सिर्फ डेटा की तरह इस्तेमाल कर रही हैं.
इस फैसला का क्या है मतलब
आपको बता दें कि Meta का ये फैसला दिखाता है कि AI से जुड़े नए फीचर्स लॉन्च करते समय केवल टेक्नोलॉजी ही नहीं बल्कि यूजर्स की प्राइवेसी और परमिशन भी उतना ही जरूरी है. बढ़ते विरोध के बाद कंपनी का ये कदम बताता है कि आने वाले समय में कंपनी को एआई फीचर को पहले से ज्यादा सुरक्षित बनाने पर जोर देना चाहिए.
क्यों यूजर्स ने किया इसका विरोध
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर हुआ कि सभी Public Instagram अकाउंट्स को इस फीचर में पहले से ही शामिल (Opt-in) कर दिया गया था. इसका मतलब ये था कि अगर किसी को अपनी पोस्ट को एआई के इस्तेमाल के लिए न देना हो तो उसे सेटिंग में जाकर कुछ बदलाव करने पड़ते थे.
इसके अलावा Meta किसी यूजर को ये भी नहीं बताता था कि उसकी प्रोफाइल का इस्तेमाल करके किसी ने AI इमेज बनाई है. इससे लोगों को डर था कि उनकी तस्वीरों का बिना उनकी परमिशन के गलत इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि कंपनी ने Private अकाउंट्स और 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के अकाउंट्स को इस फीचर से बाहर रखा था.
क्या है Muse Image?
Muse Image Meta का नया AI टूल है जो साधारण भाषा में दिए गए निर्देशों के आधार पर तस्वीरें तैयार करता है. इससे फोटो में बदलाव किए जा सकते हैं किसी चीज़ को हटाया जा सकता है, किसी व्यक्ति को किसी मशहूर जगह के सामने दिखाया जा सकता है, पुरानी तस्वीरें बेहतर बनाई जा सकती हैं और कमरे की फोटो देखकर नया इंटीरियर डिजाइन भी तैयार किया जा सकता है. Meta आने वाले समय में इसे Facebook, Messenger और अपने विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर भी लाने की तैयारी कर रही है.
भारत के लिए क्यों अहम है यह मामला?
यह विवाद सिर्फ Meta तक सीमित नहीं है. बड़ा सवाल यह है कि क्या AI कंपनियां लोगों की तस्वीरों का इस्तेमाल उनकी अनुमति के बिना कर सकती हैं? भारत सरकार अब इस मामले की जांच कर रही है. अगर जांच में नियमों का उल्लंघन मिलता है तो Meta से जवाब भी मांगा जा सकता है. माना जा रहा है कि यह मामला भविष्य में भारत में AI और प्राइवेसी से जुड़े नियम तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है.
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