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Satellite Internet: कैसे काम करता है सैटेलाइट इंटरनेट, आसमान से आपके घर तक कैसे पहुंचता है नेटवर्क?

Satellite Internet: जिस तरह से सामान्य ब्रॉडबैंड या फाइबर इंटरनेट के जरिए केबल के माध्यम से इंटरनेट आपके घर तक पहुंचता है. उसी तरह सैटेलाइट इंटरनेट भी इंटरनेट सेवा ही है.

Satellite Internet: आज के समय में इंटरनेट सबसे ज्यादा जरूरी हो गया है. चाहे ऑफिस का काम हो, कॉलेज का असाइनमेंट करना हो या दूसरे काम हो इंटरनेट आज के समय में इंसान की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है. जिस तरह से पारंपरिक केबल इंटरनेट सेवाएं प्रदान करती है, उसी प्रकार सैटेलाइट इंटरनेट भी यही काम करता है. बस इन दोनों में फर्क इतना है कि सैटेलाइट इंटरनेट आकाश में स्थित एक उपग्रह के माध्यम से मिलता है.

सैटेलाइट इंटरनेट का नाम आते ही लोगों के मन में अक्सर सवाल उठते हैं कि यह आखिर यह होता क्या है और आसमान से घर तक नेटवर्क कैसे पहुंचता है? ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि सैटेलाइट इंटरनेट क्या है, यह कैसे काम करता है और आसमान से आपके घर तक नेटवर्क कैसे पहुंचता है. 

क्या होता है सैटेलाइट इंटरनेट?

जिस तरह से सामान्य ब्रॉडबैंड या फाइबर इंटरनेट के जरिए केबल के माध्यम से इंटरनेट आपके घर तक पहुंचता है. उसी तरह सैटेलाइट इंटरनेट भी इंटरनेट सेवा ही है. फर्क सिर्फ इतना है कि इसमें इंटरनेट सिग्नल जमीन पर बिछी केबलों के बजाय अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट के जरिए भेजे जाते हैं. यह तकनीक खासतौर पर उन इलाकों के लिए उपयोगी मानी जाती है, जहां फाइबर या फिर ब्रॉडबैंड नेटवर्क पहुंचना मुश्किल होता है. पहाड़ी क्षेत्र, दूर-दराज के गांव और ऐसे स्थान जहां केबल बिछाना आसान नहीं है, वहां सैटेलाइट इंटरनेट अच्छा ऑप्शन माना जाता है. 

आसमान से आपके घर तक कैसे पहुंचता है नेटवर्क?

सैटेलाइट इंटरनेट की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है. सबसे पहले इंटरनेट सेवा देने वाली कंपनी अपने ग्राउंड स्टेशन से सिग्नल अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट तक भेजती है. इसके बाद वहीं सैटेलाइट इंटरनेट सिग्नल आपके घर की छत या दीवार पर लगाए गए डिश एंटीना या सैटेलाइट एंटीना तक पहुंचता है. यह डिश एक मॉडम से जुड़ी होती है, जो सिग्नल को इंटरनेट डेटा में बदल देता है. इसके बाद मॉडेम से राउटर के जरिए घर के मोबाइल, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी और दूसरे इंटरनेट डिवाइस इंटरनेट से कनेक्ट हो जाते हैं. 

सैटेलाइट इंटरनेट के लिए किन डिवाइस की होती है जरूरत? 

सैटेलाइट इंटरनेट कनेक्शन लेने पर कंपनी कुछ जरूरी डिवाइस उपलब्ध कराती है. इनमें मुख्य रूप से सैटेलाइट डिश या एंटीना, मॉडेम राउटर और कनेक्टिंग केबल शामिल है. डिश को घर में ऐसी जगह लगाया जाता है, जहां आसमान साफ दिखाई देता हो उसके सामने कोई पेड़, इमारत या रुकावट न हो. साफ लाइन और साइट मिलने पर नेटवर्क बेहतर तरीके से मिलते हैं. 

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भारत में सैटेलाइट इंटरनेट 

भारत में पहले से कुछ कंपनियां सैटलाइट इंटरनेट उपलब्ध करा रही है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले समय में बड़ी कंपनियों के इस क्षेत्र में आने से कंपटीशन बढ़ सकता है. खासकर उन इलाकों में जहां आज भी हाई स्पीड इंटरनेट पहुंचना बहुत बड़ी समस्या है, वहां सैटलाइट इंटरनेट एक अच्छा ऑप्शन बन सकता है. आपको बता दें कि एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक भी पिछले काफी समय से भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने की तैयारी कर रही है.

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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