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स्कैम करने के लिए ChatGPT जैसा एआई बना रहे हैकर्स, रहें सावधान

AI Phishing Scam: एआई आने के बाद हैकर्स भी लगातार एडवांस होते जा रहे हैं. अब रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि साइबर अटैक्स के लिए हैकर्स चैटजीपीटी जैसा LLM बना रहे हैं.

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  • AI-जनित नकली दस्तावेज़ों से वित्तीय धोखाधड़ी का खतरा बढ़ेगा।

AI Phishing Scam: एआई आने के बाद साइबर क्राइम तेजी से बढ़े हैं. एआई टूल्स का इस्तेमाल कर साइबर अपराधी अपने तरीकों को सुधार रहे हैं और लोगों के लिए इनसे बचना काफी मुश्किल हो गया है. अब एक नई रिपोर्ट सामने आई है, जिसने साइबर सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ा दी है. रिपोर्ट में बताया गया है कि नॉर्थ कोरिया से जुड़े हैकिंग ग्रुप ChatGPT जैसा लार्ज लैंग्वेज मॉडल बना (LLM) बना रहे हैं और इसका इस्तेमाल इंफोर्मेशन को एनालाइज, टास्क को ऑटोमेट करने और ज्यादा एडवांस स्कैम तैयार करने के लिए किया जाएगा. आसान भाषा में समझें तो हैकर्स स्कैम करने के लिए नया एआई मॉडल बना रहे हैं. आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं.

क्या होता है LLM?
स्कैम करने के लिए ChatGPT जैसा एआई बना रहे हैकर्स, रहें सावधान

लार्ज लैंग्वेज मॉडल डीप न्यूरल नेटवर्क पर बना एडवांस्ड एआई सिस्टम होता है, जिसे डेटा को प्रोसेस करने, समझने और इंसानों की तरह टेक्स्ट जनरेट करने के लिए डिजाइन किया जाता है. ये टेक्स्ट से पैटर्न, ग्रामर और कॉन्टेक्स्ट समझकर सवालों का जवाब देते हैं. ये कंटेट लिखने, लैंग्वेज को ट्रांसलेट करने समेत कई काम कर सकते हैं. LLM को मुख्य तौर पर ट्रांसफॉर्मर आर्किटेक्चर पर तैयार किया जाता है, जिसे वो टेक्स्ट का मतलब और संदर्भ समझते हैं. इसके फायदों की बात करें तो ये इनपुट डेटा को आसानी से समझ लेते हैं और रिपीटेटिव लैंग्वेज-बेस्ड टास्क को ऑटोमेट कर देते हैं. 

LLM के लिए सॉफ्टवेयर बना रहे हैं हैकर्स

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साउथ कोरिया की साइबर सिक्योरिटी कंपनी Genians के मुताबिक इस बात के सबूत मिले हैं कि हैकिंग ग्रुप Kimsuky अपने सिस्टम पर LLM रन करने के लिए सॉफ्टवेयर बना रहा है. यह ग्रुप Ollama, GPT4All और Msty जैसे टूल्स यूज कर रहा है, जो किसी एआई मॉडल को लोकली ऑपरेट करने में मदद करते हैं. ये टूल किसी मॉडल को क्लाउड-बेस्ड सर्विसेस की जरूरत नहीं पड़ने देते. रिसर्चर ने पाया कि हैकिंग ग्रुप रीट्रिवल ऑग्मेंटेड जनरेशन (RAG) टेक्नोलॉजी यूज करा रहा है, जिसकी मदद से एआई सिस्टम डॉक्यूमेंट्स के कलेक्शन को सर्च कर और समझ सकता है. इन सारे टूल्स का यूज कर हैकर सेंसेटिव फाइल्स को बिना किसी एक्सटर्नल प्लेटफॉर्म के एनालाइज कर पाएंगे.

भविष्य में बढ़ेंगे खतरे!

साइबर अपराधी पहले से ही एआई टूल्स की मदद से लेकर फिशिंग ईमेल लिख रहे हैं, जिनकी पहचान कर पाना काफी मुश्किल है. अब नए तरीके अपनाकर हैकर्स इससे आगे की चीजें प्लान कर रहे हैं. Genians ने कहा कि उसे एआई-असिस्ट कोडिंग, स्पीच को टेक्स्ट में बदलने वाली कैपेबिलिटीज और एआई एजेंट के डेवलपमेंट का पता चला है. इनकी मदद से हैकर्स अपने हैकिंग के कामों को ऑटोमेट कर सकते हैं. साथ ही वो चुराए गए डेटा को तेजी से एनालाइज कर पाएंगे और उनका इरादा मालवेयर बनाना भी हो सकता है. रिसर्चर का कहना है कि हैकर्स अब सिर्फ फर्जी मैसेज के लिए एआई को यूज नहीं कर रहे हैं बल्कि वो साइबर अटैक में अलग-अलग जगहों पर एआई को इंटीग्रेट कर रहे हैं. इससे भविष्य में और भी एडवांस्ड साइबर अटैक का खतरा बढ़ गया है. 

एआई से बनाए जा रहे फर्जी डॉक्यूमेंट्स
स्कैम करने के लिए ChatGPT जैसा एआई बना रहे हैकर्स, रहें सावधान

Genians की रिपोर्ट में फाइनेंस और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े कई एआई जनरेटेड डॉक्यूमेंट का भी जिक्र किया गया है. ये एकदम असली और कंपनियों से जुड़े डॉक्यूमेंट्स दिखते हैं. हैकर्स इनके सहारे लोगों को मलेशियस फाइल्स ओपन करने और सेंसेटिव इंफोर्मेशन शेयर करने के जाल में फंसा रहे हैं. इसलिए यह ध्यान रखने की जरूरत है कि जो ईमेल या मैसेज एकदम असली दिख रहा है, जरूरी नहीं कि वह किसी असली कंपनी से आपके पास आया हो. अपने जाल में फंसाने के लिए यह हैकर्स की एक ट्रिक भी हो सकती है. इसलिए एआई के इस दौर में ऑनलाइन सेफ्टी का ध्यान रखना बहुत जरूरी हो गया है. हमेशा किसी भी मेल को ओपन करने से पहले उसके सेंडर को वेरिफाई जरूर कर लें. अगर आपको किसी संदिग्ध या अनजान सेंडर से कोई मेल आता है तो इसे ओपन न करें.

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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पढ़ाई पूरी करने के बाद पिछले एक दशक से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय हूं. फिलहाल एबीपी न्यूज के साथ काम कर रहा हूं और यहां टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों, गैजेट्स, ऐप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया और डिजिटल ट्रेंड्स पर लिख रहा हूं. फ्यूचर टेक, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया से जुड़े टॉपिक्स में विशेष रुचि है. पिछले 10 वर्षों में नेशनल, पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, ऑटो, बिजनेस और टेक समेत कई बीट्स पर काम करने का अनुभव रहा है. इस दौरान टाइम्स इंटरनेट, दैनिक जागरण और न्यूजबाइट्स जैसे कई मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. 

विभिन्न बीट्स पर काम करने के अनुभव ने खबरों को अलग-अलग नजरिए से समझने और पेश करने की समझ दी. रिपोर्टिंग और कंटेंट लिखने के दौरान हमेशा कोशिश रही कि खबरों को आसान और भरोसेमंद तरीके से रीडर तक पहुंचाया जाए. 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान ग्राउंड रिपोर्टिंग करने और कई नेताओं के इंटरव्यू लेने का भी अवसर मिला. 

काम के सिलसिले में कई बड़े कार्यक्रमों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और विशेष आयोजनों को कवर करने का मौका मिला, जहां अलग-अलग पहलुओं को समझने का अवसर मिला. डिजिटल मीडिया के लगातार बदलते दौर में नई चीजें सीखने और खुद को अपडेट रखने की कोशिश रहती है, ताकि कंटेंट को बेहतर और रीडर के समझने के लिए आसान बनाया जा सके.

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