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पढ़ाई में मदद के लिए बढ़ रहा AI का इस्तेमाल, यह कितना सही?

AI चैटबॉट का इस्तेमाल आज कल काफी आसान और प्रचलित हो गया है, पर क्या यह असल में स्टूडेंट्स की पढ़ाई और सोच के दायरे को बढ़ाने में मदद करता है, जानिए क्या कहती है रिसर्च ?

आज के समय में AI चैटबॉट स्टूडेंट्स  की पढ़ाई का हिस्सा बनते जा रहे हैं. कई स्टूडेंट्स  इसका इस्तेमाल किसी विषय को समझने, नए टॉपिक पर शुरुआती जानकारी लेने, लिखित असाइनमेंट तैयार करने और पढ़े हुए टेक्स्ट का सार निकालने के लिए करते हैं. PISA प्रोग्राम फॉर इंटरनेशनल स्टूडेंट असेसमेंट  2025 की रिपोर्ट में 15 साल के स्टूडेंट्स  के बीच AI के इस्तेमाल को लेकर जानकारी जुटाई गई. इसमें 91 देशों और अर्थव्यवस्थाओं के 7.6 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स  को शामिल किया गया था.

 AI से पढ़ाई में मिलती है मदद

रिपोर्ट के मुताबिक, स्टूडेंट्स  के बीच AI का सबसे आम इस्तेमाल पढ़ाई को समझने के लिए किया जाता है. इसके बाद किसी नए विषय पर शुरुआती रिसर्च करना, और नोट्स तैयार करना और पढ़े हुए कंटेंट को छोटा करके समझना शामिल है. AI स्टूडेंट्स  को जानकारी जल्दी समझने और किसी कठिन टॉपिक को आसान भाषा में समझने में मदद करता है. AI का इस्तेमाल केवल जवाब पाने तक सीमित रखना पढ़ाई का  सही तरीका नहीं है . स्टूडेंट्स के लिए जरूरी है कि वे AI से मिली जानकारी को खुद समझें और उसका इस्तेमाल सीखने के लिए करें.

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कितना सच, AI इस्तेमाल से नंबर बेहतर?

PISA रिपोर्ट में सामने आया कि जो स्टूडेंट्स स्कूल के काम के लिए AI का इस्तेमाल नहीं करते, उनका परफॉर्मेनस आमतौर पर AI इस्तेमाल करने वाले स्टूडेंट्स से बेहतर रहा. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि AI सीधे तौर पर स्टूडेंट्स के कम नंबर का कारण है. रिपोर्ट के अनुसार, AI के इस्तेमाल और प्रदर्शन के बीच संबंध कई चीजों पर निर्भर करता है. खासतौर पर AI का इस्तेमाल किस काम के लिए और कितनी बार किया जाता है, यह महत्वपूर्ण है.

AI का सही इस्तेमाल जरूरी

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि AI का सीमित और सोच-समझकर किया गया इस्तेमाल ज्यादा सही  है. जो स्टूडेंट्ल गभग हर दिन  AI का इस्तेमाल करते हैं, उनमें कुछ मामलों में  AI कम यूस करने वाले  स्टूडेंट्स का परफोर्मेंस बेहतर  देखा गया. वहीं, पढ़ाई में मदद लेने के लिए हफ्ते में एक बार AI इस्तेमाल करने वाले स्टूडेंट्स का परफोर्मेंस  उन स्टूडेंट्स के करीब था, जो AI का इस्तेमाल नहीं करते थे. इसलिए AI को स्टूडेंट्स   पढ़ाई में कुछ मदद के लिए ले सकते हैं ,पर अपनी पढ़ाई पूरी तरह उस पर निर्भर करना बिल्कुल ठीक नहीं है.  AI से मिली जानकारी को समझना, उसे खुद जांचना और फिर अपने शब्दों में सीखना ज्यादा सही  है. इससे स्टूडेंट् केवल तैयार जवाब लेने के बजाय विषय को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं. 

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मानसी उपाध्याय करीब दो साल से डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मूल रूप से उत्तराखंड से जुड़ी मानसी ने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से पूरी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए (ऑनर्स) हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की और वर्तमान में राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म कर रही हैं. पत्रकारिता में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अक्टूबर 2024 में एबीपी नेटवर्क से की. अब वह डिजिटल कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्हें फीचर और इंफॉर्मेटिव स्टोरीज लिखने के साथ-साथ स्क्रिप्ट राइटिंग, सोशल मीडिया और रिसर्च आधारित कंटेंट तैयार करने में रुचि है. हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखने वाली मानसी ऐसी स्टोरीज लिखना पसंद करती हैं, जो पाठकों को नई और जरूरी जानकारी आसान भाषा में दें. उनकी कोशिश रहती है कि कंटेंट सिर्फ जानकारी देने वाला ही नहीं, बल्कि पढ़ने में दिलचस्प और पाठकों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा हुआ भी हो.

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