'नाराज फूफा' कौन है?, जयंत चौधरी के करीबी नेता ने बताई पूरी कहानी
देश में नाराज फूफा को लेकर छिड़ी सियासत के बीच राष्ट्रीय लोकदल के नेता मलूक नागर का बड़ा बयान आया है. उन्होंने बताया है कि आखिर विपक्ष के किन नेताओं को नाराज फूफा कहा जा रहा है और क्यों?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विरोधी दलों पर निशाना साधते हुए नाराज फूफा का जिक्र किया, जिसके बाद इसे लेकर सियासत तेज हो गई हैं. विपक्षी दल पीएम की टिप्पणी पर निशाना साध रहे है कि जो भी विरोध की आवाज होगी उसे नाराज फूफा बता दिया जाएगा. इस बीच जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोकदल के नेता मलूक नागर ने बताया है कि आख़िर नाराज फूफा कौन हैं और उनके लिए ऐसा क्यों कहा गया हैं?
रालोद नेता मलूक नागर ने एबीपी न्यूज़ से बात करते हुए नाराज फूफा की निशानी बताई और कहा कि "जब भी किसी नौजवान की शादी है तो वो शादी में जीजा कहलाता है और फिर जब अगली पीढ़ी आती है और उसकी शादी होती है तो वो फूफा हो जाता है. लेकिन जब वो ससुराल जाता है तो वो चाहता है कि उसे इज़्ज़त जीजा वाली मिले. लेकिन वो इज़्ज़त मिलती नहीं है. तो चिढ़कर कुछ का कुछ बोलता है, तो उसे कहते हैं चल जा फूफा तू तो चुप ही रह."
यूपी: योगी कैबिनेट के 23 बड़े फैसले, स्मार्ट स्कूल, किसानों से अग्निवीर तक को राहत
कौन है 'नाराज फूफा'?
मलूक नागर ने कहा कि "आजकल विपक्षी दलों की स्थिति यही है कि ये कभी जीजा थे, जब ये सरकार में थे. अब सरकार में नहीं हैं तो बहुत दिनों से तो फूफा हो गए हैं. अब इन्हें दिक़्क़त होती है, कुछ का कुछ बोलते हैं. जो देशहित और जनहित में लिए गए निर्णयों का भी बिना किसी मतलब के खिलाफत करेंगे.
आज की तारीख में जो भी अच्छे काम करेंगे उसमें नाराज फूफा आए और जो भी कमी होगी उसे ढूंढकर निकाले, वहीं पहला फूफा है. जयराम रमेश जैसे लोग जो पाकिस्तान के फेवर में ज्यादा और देश के ख़िलाफ़ जाएं तो ये फूफा हैं और फूफा के बाद बुढ़ापे में या तो इज़्ज़त से दिन काट लो. नहीं तो समय से पहले साफ हो जाओगे. आज आम आदमी के हिसाब से साढे़ आठ फ़ीसद काँग्रेस बची है.
जो अच्छी बात का विरोध का करे वो फूफा और जो गलत बात कही हो उसमें संशोधन कराए, जो संशोधन बिल आते हैं उनको कहते हैं असली विपक्ष की भूमिका निभाना देश हित में और जन हित में. पर इनको समझ नहीं आता ये बिना किसी मतलब के खिलाफत करना ही विपक्ष का काम समझते हैं. विपक्ष का काम है सही बात का समर्थन करें, गाँव में तो लोग कहते हैं जा फूफा तू तो चुप ही रह."




















