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एआई ने मार ली बाजी! इंटरनेट पर पहली बार इंसानों से ज्यादा हुआ एआई बॉट का ट्रैफिक

AI Bots On Internet: इंटरनेट पर एआई बॉट्स का ट्रैफिक इंसानों से ज्यादा हो गया है. 27 अप्रैल को पहली बार वेबसाइट्स पर इंसानों की तुलना में एआई बॉट्स का ट्रैफिक ज्यादा था.

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  • Internet पर AI बॉट्स की सक्रियता पहली बार इंसानों से ज़्यादा हुई।
  • क्लाउडफ्लेयर रिपोर्ट के अनुसार, 27 अप्रैल को 57% ट्रैफिक AI बॉट्स से था।
  • AI बॉट्स एक काम के लिए हज़ारों वेबसाइटें देखते हैं, जिससे ट्रैफिक बढ़ता है।
  • जनरेटिव AI आने से पहले बॉट ट्रैफिक केवल 20% था, अब काफ़ी बढ़ा है।

AI Bots On Internet: इंटरनेट पर एआई ने इंसानों की बादशाहत खत्म कर दी है. अब इंटरनेट पर इंसानों से ज्यादा एआई बॉट्स एक्टिव हैं. क्लाउडफ्लेयर का कहना है कि अब वेबसाइट्स पर इंसानों से ज्यादा एआई एजेंट्स का ट्रैफिक है. यह सब इतनी तेजी से हुआ है कि खुद क्लाउडफ्लेयर के सीईओ मैथ्यू प्रिंस हैरान हैं. प्रिंस ने कहा कि उन्हें पहले लग रहा था कि यह 2027 के आखिर तक होगा, फिर लगा कि 2027 की शुरुआत में ऐसा हो जाएगा, लेकिन यह अभी हो गया है. अमेरिका अरबपति एलन मस्क भी इससे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके हैं. उन्होंने प्रिंस की पोस्ट पर 'Wow' रिप्लाई किया है.

इतिहास में पहली बार इंटरनेट पर इंसानों से ज्यादा एआई बॉट्स 

क्लाउडफ्लेयर की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 27 अप्रैल को HTML ट्रैफिक में से 57 प्रतिशत एआई बॉट्स के कारण था, जबकि कुल ट्रैफिक में इंसानों की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत थी. यह इतिहास में पहली बार हुआ है. इसका मतलब है कि अब इंटरनेट पर इंसानों से ज्यादा एआई बॉट्स की एक्टिविटी हो रही है. 27 अप्रैल के बाद से बॉट का ट्रैफिक 53-60 प्रतिशत के बीच रह रहा है.

क्या सच में इंसानों से ज्यादा हो गए हैं एआई बॉट्स?

आपके मन में सवाल आ सकता है कि क्या इंटरनेट पर एआई बॉट्स की संख्या इंसानों से ज्यादा हो गई है? इसका जवाब है नहीं. अब आप पूछेंगे फिर इन बॉट्स की एक्टिविटी इंसानों से ज्यादा कैसे हैं तो इसका जवाब थोड़ा लंबा है. असल में इंसानों और एआई बॉट्स की ऑनलाइन एक्टिविटी में बहुत फर्क होता है. उदाहरण के तौर पर जब किसी इंसान को कैमरा खरीदना होता है तो वह 5-10 वेबसाइट्स पर ही जाएगा. इसकी तुलना में एआई बॉट्स ऐसे ही एक काम के लिए हजारों वेबसाइट्स पर विजिट कर सकते हैं. इससे वेबसाइट्स पर ट्रैफिक और लोड दोनों ही बढ़ते हैं.

एआई से पहले क्या स्थिति थी?

प्रिंस का कहना है कि जनरेटिव एआई आने से पहले इंटरनेट पर बॉट का ट्रैफिक केवल 20 प्रतिशत था और इसमें से अधिकतर सर्च इंजन क्रॉलर जैसे भरोसेमंद सोर्स से आ रहा था. इसके अलावा बाकी ज्यादातर बॉट्स स्कैम और मलेशियस एक्टिविटी से लिंक्ड होते थे. अब इंटरनेट पर एआई बॉट्स का ट्रैफिक इंसानों से ज्यादा हो गया है. बॉट एक्टिविटी में इजाफा होने के कारण फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत पड़ेगी. साथ ही डेटा सेंटर और सर्वर आदि की भी डिमांड बढ़ेगी. 

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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पढ़ाई पूरी करने के बाद पिछले एक दशक से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय हूं. फिलहाल एबीपी न्यूज के साथ काम कर रहा हूं और यहां टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों, गैजेट्स, ऐप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया और डिजिटल ट्रेंड्स पर लिख रहा हूं. फ्यूचर टेक, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया से जुड़े टॉपिक्स में विशेष रुचि है. पिछले 10 वर्षों में नेशनल, पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, ऑटो, बिजनेस और टेक समेत कई बीट्स पर काम करने का अनुभव रहा है. इस दौरान टाइम्स इंटरनेट, दैनिक जागरण और न्यूजबाइट्स जैसे कई मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. 

विभिन्न बीट्स पर काम करने के अनुभव ने खबरों को अलग-अलग नजरिए से समझने और पेश करने की समझ दी. रिपोर्टिंग और कंटेंट लिखने के दौरान हमेशा कोशिश रही कि खबरों को आसान और भरोसेमंद तरीके से रीडर तक पहुंचाया जाए. 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान ग्राउंड रिपोर्टिंग करने और कई नेताओं के इंटरव्यू लेने का भी अवसर मिला. 

काम के सिलसिले में कई बड़े कार्यक्रमों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और विशेष आयोजनों को कवर करने का मौका मिला, जहां अलग-अलग पहलुओं को समझने का अवसर मिला. डिजिटल मीडिया के लगातार बदलते दौर में नई चीजें सीखने और खुद को अपडेट रखने की कोशिश रहती है, ताकि कंटेंट को बेहतर और रीडर के समझने के लिए आसान बनाया जा सके.

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