उत्तराखंड निकाय चुनाव: 65% हुई वोटिंग, विवादों की जमकर हुई चर्चा
Uttarakhand News: राज्य के विभिन्न जिलों में सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लोगों की भीड़ देखने को मिली. देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, और ऊधमसिंह नगर जैसे प्रमुख क्षेत्रों में अच्छी खासी वोटिंग हुई.

Uttarakhand Nikay Chunav: उत्तराखंड में हाल ही में संपन्न हुए स्थानीय निकाय चुनावों में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. राज्यभर में शांतिपूर्ण मतदान की उम्मीद के बीच कुछ जगहों पर गड़बड़ियां और विवाद भी सामने आए. चुनाव आयोग के अनुसार, इस बार कुल मिलाकर 65% फीसदी से अधिक वोटिंग दर्ज की गई, जो पिछले चुनावों के मुकाबले थोड़ी अधिक है.
राज्य के विभिन्न जिलों में सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लोगों की भीड़ देखने को मिली. देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, और ऊधमसिंह नगर जैसे प्रमुख क्षेत्रों में अच्छी खासी वोटिंग हुई. ग्रामीण इलाकों में महिलाओं और बुजुर्गों ने भी उत्साहपूर्वक मतदान में हिस्सा लिया. हालांकि, कुछ शहरी इलाकों में कम मतदान प्रतिशत ने राजनीतिक विश्लेषकों को चिंतित किया है. विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी मतदाताओं में जागरूकता की कमी और त्योहारों का मौसम इसकी प्रमुख वजह हो सकती है.
हरिद्वार और हलद्वानी में चुनावी प्रक्रिया में आई समस्या
चुनाव प्रक्रिया के दौरान कुछ स्थानों पर विवाद भी सामने आए. सबसे बड़ा विवाद मतदाता सूची में नाम गायब होने को लेकर हुआ. कई मतदाताओं ने शिकायत की कि उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है. इस कारण कई लोग अपने मताधिकार का उपयोग नहीं कर सके. हरिद्वार और देहरादून जिलों में इस मुद्दे को लेकर कुछ जगहों पर मतदाताओं और अधिकारियों के बीच नोकझोंक भी हुई. इसके अलावा, कुछ मतदान केंद्रों पर ईवीएम में तकनीकी खराबी के कारण वोटिंग में थोड़ी देर हुई. हालांकि, अधिकारियों ने जल्द ही स्थिति पर काबू पा लिया.
रामनगर और रुड़की जैसे क्षेत्रों में राजनीतिक दलों के समर्थकों के बीच झड़पों की खबरें आईं. इन झड़पों में कुछ लोग घायल हुए, लेकिन पुलिस की त्वरित कार्रवाई से स्थिति नियंत्रण में रही. स्थानीय प्रशासन ने मतदान केंद्रों पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया था, जिससे अधिकतर जगहों पर मतदान शांतिपूर्ण रहा.
प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए चुनाव अहम
राज्य के सभी प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा, कांग्रेस और क्षेत्रीय पार्टियां इस चुनाव को लेकर पूरी तरह सक्रिय रहीं. नेताओं ने चुनाव से पहले जमकर रैलियां कीं और मतदाताओं को लुभाने की कोशिश की. कांग्रेस और भाजपा, दोनों के लिए यह चुनाव अहम माना जा रहा है क्योंकि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले ये स्थानीय निकाय चुनाव जनता के मूड का अंदाजा लगाने का जरिया बनेंगे.
मतदान प्रक्रिया खत्म होने के बाद अब सभी की नजरें मतगणना पर टिकी हैं. मतगणना का काम आगामी सप्ताह में पूरा होने की संभावना है. नतीजे यह तय करेंगे कि राज्य में स्थानीय स्तर पर किस दल की पकड़ मजबूत है. चुनाव आयोग ने इस बार मतदान प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए कई नए कदम उठाए थे. हालांकि, मतदाता सूची में नाम गायब होने जैसी समस्याओं को लेकर आयोग की आलोचना भी हो रही है. इन चुनावों का परिणाम राज्य की राजनीति में किस दिशा में बदलाव लाएगा, यह देखने वाली बात होगी. फिलहाल, सभी दल और मतदाता मतगणना के नतीजों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.
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Source: IOCL





















