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Dehradun News: उत्तराखंड CSR डायलॉग में CM धामी का संदेश, शिक्षा-स्वास्थ्य-पर्यावरण पर दिया जोर

Dehradun News In Hindi: CM ने कहा कि CSR को केवल वित्तीय सहयोग या औपचारिक दायित्व के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे समाज के प्रति उद्योगों की साझी जिम्मेदारी के रूप में अपनाने की जरूरत है.

उत्तराखंड को वर्ष 2035 तक देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लक्ष्य की दिशा में राज्य सरकार अब कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) को भी विकास की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देख रही है. इसी सोच के साथ आयोजित उत्तराखंड CSR डायलॉग में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देश के प्रमुख उद्योग समूहों और कॉरपोरेट संस्थानों से राज्य की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां और सामाजिक आवश्यकताएं ऐसी हैं, जहां CSR के माध्यम से किए गए कार्य लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं.  

मुख्यमंत्री ने कहा कि CSR को केवल वित्तीय सहयोग या औपचारिक दायित्व के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे समाज के प्रति उद्योगों की साझी जिम्मेदारी के रूप में अपनाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसी साझेदारी चाहती है, जिसमें सरकार, उद्योग और समाज मिलकर विकास के ऐसे मॉडल तैयार करें, जिनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे.

शिक्षा और कौशल विकास पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है. इसके लिए आधुनिक शिक्षा, डिजिटल लर्निंग, स्किल डेवलपमेंट, स्टार्टअप संस्कृति और नवाचार को बढ़ावा देना जरूरी है. उन्होंने उद्योग जगत से अपील की कि वे सरकारी स्कूलों में डिजिटल सुविधाएं विकसित करने, कौशल प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने और रोजगारोन्मुखी कार्यक्रमों में सहयोग करें.  

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उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पहले ही नई शिक्षा नीति, स्टार्टअप नीति और उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में कई कदम उठा चुकी है. यदि इन प्रयासों को CSR का सहयोग मिलता है, तो युवाओं को स्थानीय स्तर पर बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं.  

स्वास्थ्य और दूरस्थ क्षेत्रों पर फोकस

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय राज्य होने के कारण उत्तराखंड के कई गांव अब भी स्वास्थ्य सुविधाओं की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण हैं. ऐसे क्षेत्रों में मोबाइल हेल्थ यूनिट, टेलीमेडिसिन, चिकित्सा उपकरण, एंबुलेंस, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं तथा पोषण कार्यक्रमों में CSR की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है.

उन्होंने कहा कि यदि उद्योग समूह स्वास्थ्य क्षेत्र में दीर्घकालिक परियोजनाओं के साथ आगे आते हैं तो इसका सीधा लाभ दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मिलेगा और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहतर होगी.  

पर्यावरण संरक्षण और जल स्रोतों के संवर्धन पर जोर

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान केवल पर्यटन और तीर्थाटन से नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरणीय समृद्धि से भी है. इसलिए CSR के माध्यम से जल संरक्षण, वनीकरण, जैव विविधता संरक्षण, नदी पुनर्जीवन, कचरा प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन से जुड़े कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण में उद्योगों की भागीदारी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण निवेश साबित होगी।  

महिलाओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का आह्वान

मुख्यमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों, महिला उद्यमिता, स्थानीय उत्पादों के विपणन और ग्रामीण आजीविका से जुड़े कार्यक्रमों में कॉरपोरेट सहयोग की आवश्यकता पर भी बल दिया. उन्होंने कहा कि यदि CSR के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय साक्षरता, विपणन और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाए तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है.

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पहले से महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं चला रही है और निजी क्षेत्र की भागीदारी से इनके परिणाम और बेहतर हो सकते हैं.  

उद्योग और सरकार की साझेदारी से बनेगा विकास मॉडल

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड ने निवेश आकर्षित करने के लिए उद्योग, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन, स्टार्टअप और एमएसएमई से जुड़ी कई नई नीतियां लागू की हैं. राज्य में निवेश का माहौल लगातार बेहतर हुआ है और अब आवश्यकता इस बात की है कि उद्योग केवल औद्योगिक निवेश तक सीमित न रहें, बल्कि सामाजिक विकास के कार्यक्रमों में भी सक्रिय भूमिका निभाएं. 

उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट और सरकार की साझेदारी से ऐसे विकास मॉडल तैयार किए जा सकते हैं, जो शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, पर्यटन और रोजगार जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक प्रभाव छोड़ें.

CSR को परिणाम आधारित बनाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि CSR परियोजनाओं का मूल्यांकन केवल खर्च की गई राशि से नहीं, बल्कि उनके सामाजिक प्रभाव से होना चाहिए. उन्होंने उद्योग समूहों से आग्रह किया कि वे अल्पकालिक गतिविधियों के बजाय दीर्घकालिक और परिणाम आधारित परियोजनाओं पर काम करें, ताकि ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में स्थायी परिवर्तन दिखाई दे.

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसी सभी परियोजनाओं को आवश्यक सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है, जिनका उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है. 

उत्तराखंड के लिए क्यों महत्वपूर्ण है CSR?

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में भौगोलिक चुनौतियों के कारण कई क्षेत्रों में अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता होती है. शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क सुरक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी, पर्यावरण संरक्षण और आजीविका जैसे क्षेत्रों में CSR की भागीदारी विकास की गति को तेज कर सकती है. पिछले कुछ वर्षों में कई निजी कंपनियों ने राज्य में स्कूलों के डिजिटलीकरण, पर्यावरण संरक्षण, पेयजल, स्वास्थ्य और सामुदायिक विकास से जुड़ी परियोजनाओं में योगदान दिया है. सरकार अब इस भागीदारी को और व्यापक बनाने की दिशा में काम कर रही है.  

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अतुल चौहान को पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 35 वर्षों का अनुभव है. एबीपी न्यूज़ के साथ 17 सालों से जुड़े हैं और उत्तराखंड की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. इससे पहले एएनआई समेत अन्य बड़े संस्थानों से जुड़े रहे हैं.   वे कुमाऊं रीजन, उत्तराखंड के ब्यूरो चीफ रहे और क्षेत्रीय पत्रकारिता को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अतुल चौहान ने तीन दशक से अधिक के पत्रकारिता जीवन में राजनीति, प्रशासन, आपदा, विकास, सामाजिक सरोकार, चुनाव, अपराध और जनहित के अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की है. मेल आईडी- atul.media@gmail.com

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