'ईरान भारत का मित्र देश है और...', मिडिल ईस्ट में घमासान पर AIMIM का आया बयान
Iran Israel News: ईरान लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनेई की मौत पर AIMIM ने कड़ी निंदा करते हुए भारत की विदेश नीति पर पुनर्विचार की मांग की. पार्टी ने कहा कि युद्ध व क्षेत्रीय अस्थिरता का असर भारत पर भी पड़ेगा.

ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने कड़ी निंदा की है. पार्टी प्रवक्ता शादाब चौहान ने बयान जारी कर भारतीय विदेश नीति पर पुनर्विचार की मांग भी कर दी है. बता दें कि AIMIM की यह प्रतिक्रिया वेस्ट एशिया में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव के बीच सामने आई है.
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रवक्ता शादाब चौहान ने कहा कि भारत की पहचान हमेशा तटस्थ रहने की रही है. भारत ने लगातार फिलिस्तीन के वैध अधिकारों का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी स्पष्ट किया था कि अरबों की जमीन इजरायल को खाली करनी चाहिए.
चौहान ने सक्रिय रूप से कहा कि ईरान भारत का मित्र देश है और किसी भी देश के प्रमुख की इस प्रकार हत्या अमानवीय व्यवहार है. उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग महिलाओं के अधिकारों की बात करते थे, वही आज बच्चियों के हत्यारे बन गए हैं. उन्होंने गर्ल्स स्कूल पर हमले को मानवता के खिलाफ बताया.
ओवैसी के सवाल और कूटनीतिक चिंता
पार्टी नेता असदुद्दीन ओवैसी ने कई बिंदु उठाए. उन्होंने पूछा कि जब प्रधानमंत्री वहां मौजूद थे तो क्या उन्हें हालात की जानकारी दी गई थी. अगर जानकारी थी तो वे प्रतिनिधिमंडल और पत्रकारों के साथ तुरंत वापस क्यों नहीं लौटे.
ओवैसी ने कहा कि यदि जानकारी नहीं दी गई तो इजराइल और अमेरिका ने भारत के साथ धोखा किया. उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री का विमान रास्ते में भी हो सकता था. उन्होंने जोर देकर कहा कि पड़ोस में युद्ध की स्थिति भारत के हित में नहीं है क्योंकि इसका सीधा प्रभाव पड़ता है.
होर्मुज स्ट्रेट और क्रूड ऑयल पर असर
शादाब चौहान ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होगी. उन्होंने बताया कि विश्व का 30 प्रतिशत से अधिक तेल इसी मार्ग से गुजरता है. ऐसे में युद्ध को बढ़ावा देने वाली शक्तियां वैश्विक मंदी और महंगाई के लिए जिम्मेदार होंगी.
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में युद्ध के लिए कोई स्थान नहीं है बल्कि प्रगति और शांति को प्राथमिकता मिलनी चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि हर स्वतंत्र देश को अपने वैध अधिकारों की रक्षा का अधिकार है. AIMIM ने मांग की कि भारत अपनी विदेश नीति को और मजबूत करे और किसी एक पक्ष के साथ खड़े होने का संदेश न दे.
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